'SIR के नाम पर जरूरतमंदों के राशन रोके जा रहे', ओवैसी का बंगाल सरकार पर आरोप, बोले- ऐसा लग रहा है जैसे ये योजना 'प्रिंस शुभेंदु' ही चला रहे
AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने सुवेंदु सरकार की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसा बर्ताव कर रही है जैसे ये योजनाएं उनका निजी दान-पुण्य हों। साथ ही सवाल उठाया कि गरीब का राशन इस बात पर क्यों निर्भर होना चाहिए कि उसका नाम वोटर लिस्ट में है या नहीं?
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Asaduddin Owaisi Criticises West Bengal Govt: AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने सुवेंदु सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि SIR के दौरान वोटर लिस्ट से बाहर हुए लोगों को राशन और दूसरी सरकारी सुविधाओं से वंचित किया जा रहा है। साथ ही सवाल उठाया कि गरीब का राशन इस बात पर क्यों निर्भर होना चाहिए कि उसका नाम वोटर लिस्ट में है या नहीं? उन्होंने बरसते हुए कहा कि सरकारी योजनाएं किसी की निजी खैरात नहीं, बल्कि हर योग्य नागरिकों का अधिकार है।
हैदराबाद के सांसद ओवैसी ने अपने ऑफिशियल एक्स हैंडल पर लिखा, 'पश्चिम बंगाल सरकार ने कल्याणकारी योजनाओं के लाभों को वोटर लिस्ट से जोड़ दिया है और अब SIR के दौरान लिस्ट से हटाए गए लोगों को PDS राशन और दूसरे लाभ नहीं दे रही है। इसमें वे लोग शामिल हैं जिन्हें गैरहाजिर (absent) या शिफ़्टेड (shifted) मान लिया गया है, और जिन्हें पिछले चुनाव के दौरान वोटर स्लिप नहीं मिली थी। लेकिन इन कैटेगरी में कई लोग असली मतदाता भी हैं।'
‘…तो आधार ऑथेंटिकेशन का क्या मतलब?’
उन्होंने आगे लिखा, 'राशन या कल्याणकारी योजनाओं का लाभ इस बात पर क्यों निर्भर होना चाहिए कि आपका नाम वोटर लिस्ट में है या नहीं? अगर वोटर लिस्ट ही तय करने का आधार है, तो फिर आधार ऑथेंटिकेशन का क्या मतलब है?'
सरकारी योजनाएं मतदान के लिए इनाम नहीं- ओवैसी
ओवैसी आगे कहते हैं, 'सरकारी योजनाएं मतदान करने वालों के लिए कोई इनाम नहीं होतीं। इसका मकसद सभी योग्य नागरिकों तक मदद पहुंचाना है।' उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि यह कदम वेरिफिकेशन से ज्यादा लाभार्थियों की संख्या कम करने की कोशिश जैसा लगता है, जिसका सबसे ज्यादा प्रभाव सबसे गरीब लोगों, खासकर महिलाओं, SCs और मुसलमानों की जिंदगी पर पड़ सकता है। इससे जरूरतमंद लोगों की जिंदगी और ज्यादा मुश्किल हो सकती है।
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ये योजनाएं ‘प्रिंस’ सुवेंदु की निजी खैरात नहीं- ओवैसी
असदुद्दीन ओवैसी ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि सरकार ऐसा बर्ताव कर रही है जैसे ये योजनाएं ‘प्रिंस’ सुवेंदु की निजी खैरात हो। जबकि ऐसा नहीं है, इन्हें जनता के टैक्स के पैसों से चलाया जाता है और ये हर योग्य नागरिक का अधिकार हैं।