'विदेश से आदेश आया कि रैली उसी दिन आयोजित की जाए, जिस दिन...,' कांग्रेस की रैली पर चंडीगढ़ से अमित शाह का तीखा पलटवार
दिल्ली के रामलीला मैदान में विपक्षी दल इंडी ब्लॉक के 'चलो दिल्ली' मार्च पर तीखा जवाब देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा आज ही के दिन, 1 नवंबर को कांग्रेस के राज में दिल्ली में नरसंहार हुआ था, और माफी मांगने की जगह वो देश में अराजकता फैला रहे हैं।
- भारत
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रविवार, 1 नवंबर को रामलीला मैदान में विपक्षी दल इंडी ब्लॉक के 'चलो दिल्ली' मार्च पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तीखा पलटवार किया है। चंडीगढ़ में एक जनसभा को संबोधित करते हुए शाह ने कहा "राहुल गांधी से दिल्ली में रैली न करने का अनुरोध किया था, लेकिन उन्होंने हमारी और व्यापारियों की एक भी न सुनी और रैली आयोजित की है और 25 हज़ार करोड़ व्यापार का नुकसान करा दिया।
इस दौरान उन्होंने 1 नवंबर 1984 के सिख-विरोधी दंगे को लेकर कांग्रेस की रैली पर निशाना साधते हुए कहा 1 नवंबर 1984 को, कांग्रेस पार्टी द्वारा भड़काए गए दंगों के दौरान दिल्ली में हजारों सिखों की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। मेरी बात याद रखिए, अगले तीन चुनाव तक आपका खाता खुलने वाला नहीं है।
सिख नरसंहार के दिन ही रैली करनी थी
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा "जिस तरह राजीव गांधी ने कभी कहा था कि 'जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है, तो धरती हिलती है', उसी तरह उनके बेटे राहुल गांधी ने आज दिल्ली में एक बड़ी रैली आयोजित की है, जो दंगों के पीड़ितों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है। हमने सोचा था कि शायद उस समय वे बहुत छोटे रहे होंगे, या उन्होंने इतिहास नहीं पढ़ा होगा और इसलिए उन्हें जानकारी नहीं होगी।
हमारी पार्टी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके उनसे अनुरोध किया था कि वे 1, 2 और 3 नवंबर को, यानी उन्हीं दिनों जब सिख-विरोधी दंगे हुए थे, कोई कार्यक्रम न रखें, क्योंकि इससे सिख समुदाय की भावनाओं को गहरी चोट पहुंचेगी, जिसमें माताएं, बहनें और बच्चे भी शामिल हैं। लेकिन वे अपनी जिद पर अड़े रहे।
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विदेश से आदेश आया कि रैली उसी दिन...
अमित शाह आगे कहा "25 हज़ार करोड़ का व्यापार 3-4 दिन में होता है। पूरा उत्तर भारत दिल्ली के होलसेल मार्केट में दीपावली की चीजों को खरीदने के लिए आता है। 3-3 बार उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस की, पत्र लिखे, मिन्नत की कि आप दीपावली के बाद अपनी रैली करिए मगर नहीं माने।
विदेश से आदेश आए थे कि रैली उसी दिन आयोजित की जाए, जिस दिन हजारों सिखों को जिंदा जला दिया गया था। गुरुओं की इस धरती से, मैं इस घिनौनी कोशिश की कड़ी निंदा करता हूं। मैं इसकी निंदा करता हूं। भारत और पंजाब इसे कभी नहीं भूल पाएंगे।"
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1 नवंबर 1984 का दिन देश के लिए काला अध्याय
उन्होंने आगे कहा "जब नरेंद्र मोदी की सरकार सत्ता में आई, तो हमने दंगाइयों के खिलाफ सभी मामलों को फिर से खोला, पीड़ितों में से प्रत्येक को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी, और यह सुनिश्चित किया कि कांग्रेस के प्रमुख नेताओं को जेल भेजा जाए। भारत ने कभी ऐसा नहीं देखा था, और न ही कभी देखेगा कि किसी राजनीतिक दल ने इस तरह से दंगे भड़काए हों।"