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Updated June 9th, 2024 at 22:42 IST

Modi 3.O Cabinet: चुनावी बिसात पर शह को मात में बदल देने की कला के माहिर रहे हैं अमित शाह

अपने राजनीतिक एवं रणनीतिक कौशल के लिए पहचाने जाने वाले वरिष्ठ भाजपा नेता अमित शाह ने पार्टी की ताकत अभूतपूर्व रूप से बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

Amit Shah holds meeting with officials after Rajkot fire tragedy
अमित शाह | Image:PTI
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अपने राजनीतिक एवं रणनीतिक कौशल के लिए पहचाने जाने वाले वरिष्ठ भाजपा नेता अमित शाह ने पार्टी की ताकत अभूतपूर्व रूप से बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके इस कौशल ने 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी के 300 सीट का आंकड़ा पार करने में मदद की थी।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बाद देश में दूसरे सबसे प्रभावशाली और भाजपा की विचारधारा के प्रति समर्पित व्यक्ति के रूप में जाने जाने वाले 59 वर्षीय शाह उस समय बड़े दिग्गज नेता के रूप में उभरे जब पार्टी महासचिव के रूप में उनके नेतृत्व में भाजपा नीत गठबंधन ने 2014 में उत्तर प्रदेश से 73 सीट हासिल कीं।

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सड़कों पर अपनी पार्टी के पोस्टर और पर्चे चिपकाकर अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू करने वाले अमित शाह को भारतीय जनता पार्टी की चुनावी रणनीति तैयार करने वाला ‘चाणक्य’ कहा जाता है क्योंकि वह बूथ से लेकर चुनाव मैदान तक प्रबंधन और प्रचार की ऐसी सधी हुई बिसात बिछाते हैं कि मंझे से मंझे राजनीतिक खिलाड़ी भी अकसर मात खा जाते हैं।

शतरंज खेलने से लेकर क्रिकेट देखने एवं संगीत में गहरी रुचि रखने वाले अमित शाह को राजनीति का माहिर रणनीतिकार माना जाता है। इस वर्ष अक्टूबर में अपने जीवन के छह दशक पूरे करने जा रहे शाह को राज्य दर राज्य भाजपा की सफलता गाथा लिखने का सूत्रधार माना जाता है।

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गत चार जून को घोषित आम चुनाव के परिणामों में शाह ने गांधीनगर संसदीय सीट से अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को सात लाख 44 हजार से अधिक मतों के अंतर से पराजित किया।

वर्तमान लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल, ओडिशा और दक्षिण भारत में पार्टी के बेहतर प्रदर्शन के लिए उनकी सफल रणनीति को श्रेय दिया जा रहा है।

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राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि शाह ने विचारधारा की दृढ़ता, असीमित राजनीतिक कल्पनाशीलता और वास्तविक राजनीतिक लचीलेपन का शानदार मिश्रण करके चुनावी समर में भाजपा की शानदार जीत का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने बिहार और महाराष्ट्र में न केवल राजग के घटक दलों के साथ गठबंधन को लेकर लचीला रुख अपनाया बल्कि स्थानीय स्तर पर प्रतिद्वंद्वी दलों के वोट बैंक को अपनी पार्टी के पाले में लाने की रणनीति को अंजाम दिया ।

उनके करीबी बताते हैं कि पारिवारिक और सामाजिक मेल-मिलाप में वह बहुत कम वक्त जाया करते हैं। शाह को कार्यकर्ताओं की अच्छी परख है और वह संगठन व प्रबंधन के माहिर खिलाड़ी हैं।

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शाह ने पहली बार सरखेज से 1997 के विधानसभा उपचुनाव में किस्मत आजमाई और तब से 2012 तक लगातार पांच बार वहां से विधायक चुने गए। सरखेज की जीत ने उन्हें गुजरात में युवा और तेजतर्रार नेता के रूप में स्थापित किया। उस जीत के बाद वह भाजपा में लगातार सीढ़ियां चढ़ते गए।

मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री बनने के बाद शाह और अधिक मजबूती से उभरे। 2003 से 2010 तक गुजरात सरकार की कैबिनेट में उन्होंने गृह मंत्रालय का जिम्मा संभाला। हालांकि उन्हें इस बीच कई सियासी उतार-चढ़ावों का सामना करना पड़ा, लेकिन जब नरेन्द्र मोदी को राष्ट्रीय राजनीतिक पटल पर लाया गया तो उनके सबसे करीबी माने जाने वाले अमित शाह को भी पूरे देश में भाजपा के प्रचार-प्रसार में शामिल किया गया ।

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शाह ने जुलाई 2014 से जनवरी 2020 तक भाजपा अध्यक्ष पद का दायित्व संभाला। इस दौरान भाजपा ने कई राज्यों में विजय प्राप्त की। अध्यक्ष पद से हटने के बाद भी शाह पार्टी संगठन में अपनी सक्रियता और रुचि निरंतर बनाए रखे हुए हैं।

उन्होंने अगस्त 2019 में गृह मंत्री के तौर पर संसद में जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को समाप्त करने के प्रस्ताव के समय जिस तैयारी के साथ विपक्षी दलों की अलोचनाओं की धार को कुंद किया और जिस प्रकार जम्मू कश्मीर में बिना किसी खून-खराबे के इसे लागू करवाया, उससे उनके कुशल प्रशासक होने की छवि काफी मजबूत हुई।

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शाह ने गृह मंत्री के तौर पर संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) को संसद से पारित करवाने के समय भी काफी दृढ़ता का परिचय दिया।

देश की आपराधिक न्याय प्रणाली के परिदृश्य को नया आकार देने के उद्देश्य से एक साहसिक कदम में, शाह ने ब्रिटिश युग के पुराने कानूनों को आधुनिक बनाने और बदलने के उद्देश्य से तीन क्रांतिकारी कानून पेश किए।

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भारतीय न्याय संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता और भारतीय साक्ष्य कानून की जगह लेने को तैयार हैं जो एक अधिक कुशल एवं प्रभावी कानूनी ढांचे की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतीक है।

ये कानून एक जुलाई, 2024 को लागू होने वाले हैं।

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शाह ने माओवादी हिंसा को खत्म करने और रणनीतिक शांति समझौते के माध्यम से पूर्वोत्तर राज्यों में शांति बहाल करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

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Published June 9th, 2024 at 22:34 IST

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