'किसे पहचानने की जरूरत है ये तो खुद पीएम मोदी ही...', प्रधानमंत्री के 'दिमागी नक्सल' वाले बयान पर तेज प्रताप की प्रतिक्रिया
तेज प्रताप यादव ने कहा कि किसे पहचानने की आवश्यकता है ये तो पीएम मोदी ही बताएंगे कि कौन दिमागी तौर पर नक्सली है या पागल है। इस बारे में वह खुद ज्यादा जानते होंगे।
- भारत
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Tej Pratap Yadav: आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और जन शक्ति जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'दिमागी तौर पर नक्सली' वाले बयान पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह तो खुद पीएम ही बताएंगे कि कौन दिमागी तौर पर नक्सली है या कौन पागल है।
तेज प्रताप यादव ने कहा कि किसे पहचानने की आवश्यकता है ये तो पीएम मोदी ही बताएंगे कि कौन दिमागी तौर पर नक्सली है या पागल है। इस बारे में वह खुद ज्यादा जानते होंगे। वह देश और बिहार में आकर खुद निकालेंगे कि आखिर ऐसे कौन से लोग हैं और किस माइंडसेट के हैं। हो सकता है कि ऐसे बहुत सारे लोग भाजपा में ही हों।'
प्रधानमंत्री की सोच में अर्बन नक्सल- कांग्रेस
वहीं कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, 'दो-तीन साल पहले उन्होंने (पीएम मोदी) अपने राजनीतिक विरोधियों को 'अर्बन नक्सल' (शहरी नक्सली) कहा, तब संसद में ये पूछा गया कि 'अर्बन नक्सल' (शहरी नक्सली) की परिभाषा क्या है? गृह मंत्री से जवाब आता है कि अर्बन नक्सल कोई चीज नहीं है, कोई परिभाषा नहीं है। आज प्रधानमंत्री लाल किले से दिमागी नक्सल की भाषा, अपने राजनीतिक विरोधियों को लेकर इस्तेमाल करते हैं। हकीकत ये है कि जो मुद्दा 'अर्बन नक्सल' उठाते हैं, जो प्रधानमंत्री की सोच में 'अर्बन नक्सल' हैं, जो मांग वे करते हैं, उसे वे स्वीकार करते हैं। जातिगत जनगणना को लेकर उन्होंने अर्बन नक्सल सोच ठहराया था लेकिन एक साल पहले उन्होंने जाति आधारित जनगणना की घोषणा की। पहले आप गाली दें, अर्बन नक्सल कहो, दिमागी नक्सल कहो लेकिन बाद में जो आपके राजनीतिक विरोधी कह रहे हैं उनकी मांगों को मानो। 12 साल बाद भी उनके राजनीतिक भाषण में कोई नई बात नहीं थी।'
आप किसे दिमागी नक्सल कह रहे हैं?- कांग्रेस
कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने कहा, ‘पहले तो दिमागी नक्सल की परिभाषा बताई जाए कि ये क्या है? आप किसे दिमागी नक्सल कह रहे हैं? ये तमाम उन युवाओं का अपमान है, तमाम उन सोचने वालों का अपमान है, तमाम उन बुद्धिजीवियों का अपमान है जो देश के लिए और समाज के लिए सोचते हैं। पहले भी उन्होंने अर्बन (शहरी) नक्सल का टैग दिया था, लेकिन अब दिमागी नक्सल बता दिया।'
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उन्होंने आगे कहा, ‘महिला आरक्षण बिल पहले ही पास हो चुका है, उसे केवल लागू करने की बात है लेकिन महिला आरक्षण बिल की आढ़ में उनका मकसद कुछ और है।’
PM मोदी ने क्या कहा था?
पीएम मोदी ने लाल किले की प्राचीर से देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि नक्सलवाद और माओवाद ने लाखों युवाओं के भविष्य को तबाह कर दिया, अनेक माताओं से उनके नौजवानों को छीन लिया, उन्हें बर्बाद कर दिया और मां-बाप के सपनों को चूर-चूर कर दिया। नक्सलवाद ने चार दशक तक हिंदुस्तान के बहुत बड़े हिस्से को, बड़ी आबादी को, बंदूक की नोक पर दबोचकर रखा था और संविधान की धज्जियां उड़ा दी थीं और देश के सामान्य नागरिकों की रक्षा में 3500 से ज्यादा पुलिस सुरक्षा बल के जवान शहीद हो गए। उन्होंने आगे कहा कि 2014 में आपने जब हमें मौका दिया, उसी दिन हमने संकल्प लिया था कि हम देश को नक्सलवाद से मुक्त करेंगे और आज मुझे खुशी है कि नक्सली-माओवादी हिंसा में आखिरी सांस की भी ताकत नहीं रही।
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प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि वर्षों तक देश की सत्ता में माओवादी सोच के लोग गलियारों में अपनी जगह बनाकर बैठे थे। सरकारी कमेटियों में सलाहकार के रूप में भी इस माओवादी सोच ने नीतियों को प्रभावित किया था। जंगलों में हमें हथियारी नक्सलियों का खात्मा बुलाने में और उस संकट से देश को मुक्त कराने में सफलता मिली है। हथियारी नक्सल तो गए लेकिन दिमागी नक्सल मौके की तलाश में हैं। वह हिंसा, अराजकता के रास्ते खोज रहे हैं। समाज को गलत राह पर घसीटने के लिए, भांति-भांति के दांव खेल रहे हैं, इन दिमागी नक्सलों को पहचानना होगा। इन दिमागी नक्सलियों को आइसोलेट करना होगा और राष्ट्र को विकसित राष्ट्र बनाने की ओर देश की युवा पीढ़ी को जोड़ना होगा।
उन्होंने देशवासियों से अपील की कि इन चेहरों को बेनकाब करना जरूरी है, क्योंकि इनका सीधा निशाना देश का नौजवान है। युवाओं को गलत राह पर जाने से रोकने के लिए ऐसे दिमागी नक्सलियों को पहचानकर समाज से पूरी तरह अलग-थलग करना होगा।