अपडेटेड 10 August 2024 at 17:10 IST
प्रधानमंत्री मोदी ने वायनाड में भूस्खलन प्रभावित चूरलमाला का दौरा किया
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शनिवार को केरल के भूस्खलन प्रभावित वायनाड जिला पहुंचे और चूरलमाला में पैदल चलकर आपदा से हुए नुकसान का आकलन किया।
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शनिवार को केरल के भूस्खलन प्रभावित वायनाड जिला पहुंचे और चूरलमाला में पैदल चलकर आपदा से हुए नुकसान का आकलन किया। अधिकारियों ने बताया कि मोदी कन्नूर हवाई अड्डे से वायुसेना के हेलीकॉप्टर के जरिये वायनाड पहुंचे और 30 जुलाई को बड़े पैमाने पर हुई भूस्खलन की घटनाओं से प्रभावित चूरलमाला क्षेत्र में पैदल चलकर नुकसान का जायजा लिया।
मोदी ने एक राहत शिविर का भी दौरा किया, जहां भारी भूस्खलन के कारण विस्थापित हुए कई लोग रह रहे हैं। उन्होंने घटना से प्रभावित कुछ लोगों से बातचीत की। इनमें दो बच्चे भी शामिल थे, जिन्होंने इस आपदा में अपने प्रियजनों को खो दिया। इस आपदा में 200 से अधिक लोगों की मौत हुई है। बाद में, प्रधानमंत्री ने दोपहर करीब ढाई बजे मेप्पाडी स्थित शिविर का दौरा किया और वहां करीब आधा घंटा बिताया तथा कुछ लोगों से बातचीत की।
टीवी चैनलों पर प्रसारित दृश्यों के अनुसार, प्रधानमंत्री ने भूस्खलन प्रभावित लोगों से बात की, उनकी चिंताओं और जरूरतों को सुना तथा उन्हें सांत्वना देने की कोशिश की। मोदी ने सांत्वना देते हुए पीड़ितों के सिर और कंधों पर हाथ रखा। प्रभावित लोगों में से कई प्रधानमंत्री को अपनी आपबीती बताते हुए रोने लगे। कलपेट्टा में उतरने से पहले, प्रधानमंत्री ने भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टर से भूस्खलन प्रभावित चूरलमाला, मुंडक्कई और पुंचिरीमट्टम का हवाई सर्वेक्षण किया था।
अधिकारियों के मुताबिक, हवाई सर्वेक्षण के बाद मोदी का हेलीकॉप्टर कलपेट्टा में एसकेएमजे विद्यालय में उतरा, जहां से वह सड़क मार्ग से चूरलमाला के लिए रवाना हुए। चूरलमाला में सेना ने आपदा के बाद राहत एवं बचाव कार्यों में मदद के लिए 190 फुट लंबा पुल बनाया है। मोदी नुकसान का जायजा लेते हुए इस पुल से पैदल गुजरे। अधिकारियों के अनुसार, चूरलमाला पहुंचने के बाद मोदी अपने वाहन से उतरे, बचाव कर्मियों, राज्य के मुख्य सचिव वी वेणु और जिले के अधिकारियों से बातचीत की, फिर पैदल ही पत्थरों और मलबे से भरे क्षेत्र का सर्वेक्षण किया। इस दौरान, केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और केंद्रीय पर्यटन तथा केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी भी उनके साथ थे।
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अधिकारियों ने बताया कि हवाई सर्वेक्षण में प्रधानमंत्री ने भूस्खलन के केंद्र बिंदु को देखा, जो इरुवाझिनजी पुझा (नदी) के उद्गम स्थल पर है। उन्होंने पुंचिरीमट्टम, मुंडक्कई और चूरलमाला के सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों का भी जायजा लिया। वायनाड से चूरलमाला के बीच प्रधानमंत्री के काफिले के मार्ग पर सैकड़ों लोग उनकी एक झलक पाने के लिए सड़कों के किनारे एकत्र थे। केरल के वायनाड जिले में 30 जुलाई को बड़े पैमाने पर हुई भूस्खलन की घटनाओं में कम से कम 226 लोगों की मौत हो गई। क्षेत्र में 130 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं।
Published By : Dalchand Kumar
पब्लिश्ड 10 August 2024 at 17:10 IST