श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर देश ने किया नमन, PM मोदी ने लिखा लेख, उपराष्ट्रपति और अमित शाह ने दी यूं दी श्रद्धांजलि
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर PM मोदी ने विशेष लेख के जरिए शिक्षा, उद्योग और राष्ट्रीय एकता में उनके योगदान को सराहा। उन्होंने अनुच्छेद 370 हटाने को सच्ची श्रद्धांजलि बताया।
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Shyama Prasad Mukherjee 125th Birth Anniversary: भारतीय राजनीति के पुरोधा, महान शिक्षाविद और प्रखर राष्ट्रवादी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर आज (6 जुलाई) पूरा देश उन्हें याद कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह समेत देश के कई बड़े नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। इन नेताओं ने कहा कि देश की एकता और अखंडता के लिए डॉ. मुखर्जी ने जो बलिदान दिया, उसे भारत कभी नहीं भूल सकता। आज कश्मीर से धारा 370 हटने के बाद उनका 'एक देश, एक कानून' का सपना पूरी तरह सच हो चुका है।
उपराष्ट्रपति ने दी श्रद्धांजलि
उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने उपराष्ट्रपति भवन में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी एक दूरदर्शी राजनेता और राष्ट्र निर्माता थे। स्वतंत्र भारत के पहले उद्योग और आपूर्ति मंत्री और भारतीय जनसंघ के संस्थापक के रूप में डॉ. मुखर्जी ने राष्ट्र की असाधारण सेवा की।
राधाकृष्णन ने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्रीय एकता और अखंडता के अडिग समर्थक के रूप में, डॉ. मुखर्जी ने जम्मू और कश्मीर को भारत में पूर्ण रूप से एकीकृत करने के प्रयासों में सर्वोच्च बलिदान दिया।
PM मोदी ने लिखा विशेष लेख
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन और उनकी विरासत पर एक विशेष लेख लिखा है। इसमें उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी का प्रभाव केवल राजनीति तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने अलग-अलग भूमिकाओं में देश की बड़ी सेवा की। एक बेहतरीन विचारक और शिक्षाविद् के रूप में उन्होंने हमेशा ऐसी शिक्षा व्यवस्था की वकालत की, जो नई सोच (इनोवेशन) को बढ़ावा दे और आने वाले समय की जरूरतों को पूरा कर सके।
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उन्होंने कहा कि आजाद भारत के पहले उद्योग मंत्री के तौर पर उन्होंने देश को औद्योगिक रूप से अपने पैरों पर खड़ा करने की मजबूत नींव रखी। इसके अलावा, पीएम मोदी ने बंगाल के भीषण अकाल के समय डॉ. मुखर्जी द्वारा किए गए राहत कार्यों को भी याद किया। पीएम मोदी ने अंत में लिखा कि साल 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35(A) को पूरी तरह हटाना, राष्ट्रीय एकता के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित करने वाले डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के संघर्षों और बलिदान को देश की तरफ से एक सच्ची और सबसे बड़ी श्रद्धांजलि है।
अमित शाह-राजनाथ ने भी किया याद
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी डॉ. मुखर्जी के बलिदान को याद किया। उन्होंने कहा, "डॉ. मुखर्जी जी ने 'राष्ट्र प्रथम' के आदर्श को अपने जीवन का ध्येय बनाया। बंगाल के विभाजन के समय उनका दूरदर्शी नेतृत्व और जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बनाए रखने के लिए उनका संघर्ष भारतीय इतिहास में सदैव स्मरणीय रहेगा। सिद्धांतों के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता और देश की अखंडता के लिए उनका आजीवन संघर्ष युवाओं को सदैव प्रेरणा देता रहेगा"
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने X पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, "डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को उनकी 125वीं जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की। एक दूरदर्शी राजनेता, प्रख्यात विद्वान और राष्ट्र-निर्माण के प्रति समर्पित व्यक्तित्व के रूप में, उन्होंने अपना जीवन देश की एकता को बनाए रखने, लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने और राष्ट्रीय अखंडता को बढ़ावा देने के लिए समर्पित कर दिया।"
शिक्षा के क्षेत्र में युवावस्था में ही कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में बड़ी पहचान बनाने वाले डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का पूरा सफर देश के प्रति समर्पण की कहानी है। जब भी देशहित की बात आई, उन्होंने सत्ता और मंत्री पद को छोड़ने में एक पल की भी देर नहीं की। 'भारतीय जनसंघ' के रूप में एक मजबूत विकल्प की नींव रखने वाले डॉ. मुखर्जी के राष्ट्रवाद से जुड़े विचार आज भी प्रासंगिक हैं।