अजमेर दरगाह में मंदिर के दावे पर भड़कीं महबूबा, पूर्व CJI पर निशाना, कहा- अब तो हमारे घरों में...

Mehbooba Mufti News: महबूबा मुफ्ती अजमेर दरगाह में मंदिर के दावे पर भड़क गई हैं। उन्होंने कहा कि अब लगता है कि मुसलमानों के घर में भी शिवलिंग ढूंढे जाएंगे।

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अजमेर दरगाह में मंदिर के दावे पर भड़कीं महबूबा | Image: mehbooba mufti

Ajmer Sharif Dargah News: राजस्थान के अजमेर में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह को हिंदू मंदिर होने का दावा करते हुए कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। अजमेर में ख्वाजा हैं या फिर महादेव, ये तो कोर्ट तय करेगा। लेकिन जब से हिंदू पक्ष की तरफ अजमेर शरीफ को मंदिर बताया गया है। एक के बाद एक नेता के बयान सामने आ रहे हैं। कोर्ट में याचिका स्वीकार हुई तो देश की सियासत में दंगल शुरू हो गया है।

अजमेर शरीफ में शुक्रवार को इस बात की चर्चा जोरों पर रही कि 20 दिसंबर को क्या होगा? वहीं जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती अजमेर दरगाह में मंदिर के दावे पर भड़क गई हैं। उन्होंने कहा कि अब लगता है कि मुसलमानों के घर में भी शिवलिंग ढूंढे जाएंगे। उन्होंने कहा कि अब अजमेर शरीफ जैसी जियारत में भी शिवलिंग डूबे जा रहे हैं। जहां काफी संख्या में हिंदू लोग जाते हैं और यह 800 साल पुरानी जियारत है।

'मुल्क को तबाही की और ले जा रहे हैं'

महबूबा मुफ्ती ने अपना गुस्सा जाहिर करते हुए कहा कि 'इसके लिए पूर्व चीफ जस्टिस जिम्मेदार हैं। उन्होंने ज्ञानवापी मस्जिद पर यह फैसला दिया कि आप सर्वे कर सकते हैं। 1991 का सुप्रीम कोर्ट का जजमेंट है कि 1947 में जो धार्मिक स्थान हैं उसकी नियति वैसी ही रहनी चाहिए। लेकिन चीफ जस्टिस ने एक फैसला दिया कि जिसमें मस्जिदों में शिवलिंग ढूढे जाते थे, अब मस्जिद में सर्वे किए जा रहे हैं और अब अजमेर शरीफ में भी शिवलिंग ढूंढें जा रहे हैं। यह मुल्क को तबाही और बंटवारे की और ले जा रहा है। भारत की पहचान के लिए जवाहर लाल नेहरू और महात्मा गांधी ने जो बुनियाद रखी थी, उसको हिलाया जा रहा है।'

याचिका की बुनियाद बनी एक किताब

20 दिसंबर को अब इस मामले में कोर्ट में बहस होनी है। अजमेर की सिविल कोर्ट सभी पक्षों को सुनेगी और फिर तय करेगी कि हिंदू पक्ष की सर्वे वाली मांग जायज है या नहीं। सुनवाई से पहले ही हिंदू पक्ष को उम्मीद है कि कोर्ट उनकी सर्वे वाली मांग को मानेगा, लेकिन मुस्लिम पक्ष और दरगाह कमेटी हिंदू पक्ष की याचिका पर भड़का हुआ है।

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हिंदू पक्ष की इस याचिका की सबसे बड़ी बुनियाद एक किताब बनी है। जिसका नाम 'अजमेर हिस्टोरिकल एंड डिस्क्रिप्टिव' है। इस किताब में दावा किया गया है कि दरगाह के निर्माण में मंदिर के मलबे का इस्तेमाल किया गया है। किताब में दरगाह के तहखाने का भी विवरण है, जिसमें शिवलिंग होने का दावा है। किताब को लिखने वाले हरविलास शारदा ने अपनी किताब में इस बात का भी जिक्र किया है कि दरगाह की संरचना में जैन मंदिर के भी अवशेष हैं। दरगाह के 75 फीट ऊंचे बुलंद दरवाजे की संरचना में जैन मंदिर की उपस्थिति का संकेत है।

हिंदू पक्ष दावा कर रहा है कि 800 साल पहले जो सबूत थे वो दरगाह में आज भी मौजूद हैं। कोर्ट ने सारी बातें सुनने के बाद याचिका स्वीकार की है। सच क्या है, दावे में कितना दम है, ये अभी बहुत दूर की बात है। लेकिन कुछ मौलाना और सियासतदानों से इंतजार नहीं हो रहा है और वो सीधे कोर्ट और जज पर ही सवाल खड़े कर रहे हैं।

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Published By:
 Sagar Singh
पब्लिश्ड