अपडेटेड 18 September 2025 at 23:02 IST
Operation Sindoor: भारत ने हमले के लिए क्यों चुना रात 1:00 से 1:30 के बीच का समय? CDS अनिल चौहान ने बताई वजह
CDS Anil Chauhan on Operation Sindoor: सीडीएस अनिल चौहान ने इस दौरान उरी और बालाकोट स्ट्राइक के बारे में भी कुछ खास जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जब उरी का हमला हुआ था तो हमलोग जमीनी रास्ते से गए थे। जब बालाकोट का हुआ था तो एयर फोर्स के करीब 50 हवाई जहाज गए थे। अगर हम यही चीज दोबारा करते तो फिर सफलता उतनी नहीं मिलती क्योंकि किसी भी मिलिट्री ऑपरेशन में नवीनता लानी जरूरी है।
- भारत
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CDS Anil Chauhan on Operation Sindoor: बीते 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादियों ने बैसरन घाटी में पर्यटकों को निशाना बनाया था। उन्होंने 25 भारतीयों और एक नेपाली नागरिक को जान से मार दिया था। भारत ने इसकी जवाबी कार्रवाई में 'ऑपरेशन सिंदूर' चलाया था। इसमें भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाक अधिकृत जम्मू-कश्मीर में निर्धारित 9 आतंकवादी ठिकानों पर हमला किया और 100 से ज्यादा आतंकवादियों को मार गिराया। भारत के द्वारा यह हमला रात के करीब 1 बजे से डेढ़ बजे के बीच किया गया था।
वहीं, भारत के द्वारा इस ऑपरेशन को अंजाम देने पर देश के सीडीएस (Chief of Defence Staff) जनरल अनिल चौहान ने बड़ी जानकारी दिया है। उन्होंने बताया है कि आखिरकार भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के लिए रात 1:00 से 1:30 के बीच का समय क्यों चुना था। उन्होंने यह खुलासा रांची में एक कार्यक्रम में की है। आइए इसके बारे में जानते हैं...
इन खास दो कारणों से 1:00 से 1:30 बजे रात में किया गया हमला
झारखंड की राजधानी रांची में छात्रों के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर और भारत के हमले को लेकर खास जानकारी दी है। उन्होंने कहा, "हमने 7 तारीख(मई) को जो 9 आतंकी ठिकाने चुने थे, उनको हमने रात के 1:00 से लेकर के 1:30 के बीच हमला किया।" उन्होंने कहा, "हमने रात 1:30 बजे हमला क्यों किया? वो तो सबसे अंधेरा होता है, सैटेलाइट ईमेज, तस्वीरें प्राप्त करना और सबूत इकट्ठा करना सबसे मुश्किल होता है। फिर भी हमने रात के एक-डेढ़ बजे किया। ऐसा क्यों था?"
सीडीएस अनिल चौहान ने आगे बताया कि ऐसा दो कारणों से था। उन्होंने बताया, "एक तो हमें अपनी क्षमताओं पर भरोसा था कि रात में भी हमला करेंगे तो रात में भी उसकी तस्वीरें ले सकते हैं।" सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने बताया, "दूसरी महत्वपूर्ण चीज यह थी कि हमलोग नागरिक हताहतों से बचना चाहते थे। सबसे बेहतर समय 5:30-6:00 बजे (सुबह) का होता, जब उजाला होना शुरू हो जाता है। लेकिन वो समय पहली अजान या पहली नमाज का भी होता है। तो उस समय बहावलपुर और मुरीदके में लोगों की चहल-पहल शुरू हो गई होती, तो काफी सारे नागरिक मारे जाते। हो सकता है उनका आतंक के साथ कनेक्शन हो ना हो। तो हमलोग इससे बचना चाह रहे थे।"
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सीडीएस ने आगे बताया, "इसलिए हमने समय 1:00 से 1:30 के बीच का चुना।" उन्होंने बताया कि 7 मई मौसम के लिहाज से भी सही था। 1:00 से 1:30 के बीच हमला इसलिए भी किया गया कि हम लोग आतंकियों की गतिविधियों को ध्यान में रखे थे कि वे कितने बजे उठते थे और अपने बेस में कब लौटते थे, सुबह होने से पहले फिर वो कितने बजे उठते थे। वो देखकर के हमने सोचा कि हमले के लिए 1:00 से 1:30 बजे का समय ठीक है।
उरी स्ट्राइक, बालाकोट एयर स्ट्राइक पर क्या बोले अनिल चौहान?
सीडीएस अनिल चौहान ने इस दौरान उरी और बालाकोट स्ट्राइक के बारे में भी कुछ खास जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जब उरी का हमला हुआ था तो हमलोग जमीनी रास्ते से गए थे। जब बालाकोट का हुआ था तो एयर फोर्स के करीब 50 हवाई जहाज गए थे। अगर हम यही चीज दोबारा करते तो फिर सफलता उतनी नहीं मिलती क्योंकि किसी भी मिलिट्री ऑपरेशन में नवीनता लानी जरूरी है। मतलब कि सरप्राइज होना बहुत जरूरी है। हर एक रणनीति हर एक बार नई होनी चाहिए।
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Published By : Amit Dubey
पब्लिश्ड 18 September 2025 at 23:02 IST