अपडेटेड 14 March 2024 at 15:00 IST
एक देश-एक चुनाव को लेकर हलचल तेज, कोविंद कमेटी ने राष्ट्रपति मुर्मू को सौंपी 18,626 पन्ने की रिपोर्ट
वन नेशन वन इलेक्शन को लेकर हलचल तेज हो गई। भारत के पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने वर्तमान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को कोविंद कमेटी की रिपोर्ट सौंपी है।
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वन नेशन वन इलेक्शन को लेकर हलचल तेज हो गई। भारत के पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने वर्तमान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को कोविंद कमेटी की रिपोर्ट सौंपी है। कोविंद कमेटी ने 18626 पन्ने की ये रिपोर्ट राष्ट्रपति मुर्मू को सौंपी है।
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली एक उच्च स्तरीय समिति ने लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और स्थानीय निकायों के एक साथ चुनाव कराने की व्यवहार्यता पर 14 मार्च, गुरुवार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी। एक बयान में कहा गया है कि यह रिपोर्ट दो सितंबर 2023 को समिति गठन के बाद से हितधारकों, विशेषज्ञों के साथ व्यापक परामर्श और 191 दिनों के रिसर्च वर्क के बाद तैयार की गई है। कोविंद समिति ने कहा है कि पहले चरण में लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराए जा सकते हैं, जिसके बाद 100 दिन के अंदर दूसरे चरण में स्थानीय निकायों के चुनाव कराए जा सकते हैं।
रिपोर्ट में लोकसभा, विधानसभा और नगर निकाय एक साथ करने की सिफारिश
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ गोविंद की अध्यक्षता में वन नेशन वन इलेक्शन यानी एक राष्ट्र एक चुनावी समिति ने अपनी रिपोर्ट में देश में लोकसभा, विधानसभा और नगर निकाय के चुनावों को एक साथ करने की सिफारिश की है। सूत्रों की मानें तो कमेटी ने 2029 के चुनावों को देश में एक साथ करने की सिफारिश की है।
एक देश एक इलेक्शन से क्या है लाभ?
देश में एक चुनाव के सफल आयोजन के लिए समय, मशीनों, मानवीय संसाधन के अलावा काफी पैसों का खर्च भी होता है। कहा जा रहा है कि देश में यदि एक चुनाव होता है तो इससे लाखों करोड़ों रुपए की बचत की जा सकती है। आंकड़ों की मानें तो 1951-52 में लोकसभा चुनाव का जो आयोजन किया गया, उसमें करीब 11 करोड़ रुपए का खर्च हुआ था। वहीं 2019 के लोकसभा चुनाव में 60 हजार करोड़ रुपए का खर्च उठाना पड़ा। इसके साथ ही सरकारी कर्मचारियों को जो बार-बार बूथ पर ड्यूटी करना पड़ता है, इससे भी राहत मिलेगी।
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Published By : Kanak Kumari Jha
पब्लिश्ड 14 March 2024 at 12:09 IST