'PoK, नोआखली और चटगांव पोर्ट.... समय आ गया है इन्हें भारत में शामिल किया जाए', निशिकांत दुबे ने बंटवारे को लेकर कांग्रेस पार्टी पर साधा निशाना
निशिकांत दुबे ने कांग्रेस पार्टी पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि भारत नोआखली, चटगांव पोर्ट और सिलहट इलाके के साथ-साथ पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) को भी वापस ले ले, जिसे पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 'जबरन सौंप दिया था'।
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भारतीय जनता पार्टी के नेता और सांसद निशिकांत दुबे ने शुक्रवार (6 नवंबर) को कांग्रेस पार्टी पर तीखा प्रहार करते हुए कई गंभीर आरोप लगाए। कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि भारत नोआखली , चटगांव पोर्ट और सिलहट इलाके के साथ-साथ पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) को भी वापस ले ले, जिसे पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 'जबरन सौंप दिया था'।
निशिकांत दुबे की उनकी यह टिप्पणी तब आई जब TIPRA मोथा पार्टी के फाउंडर प्रद्योत बिक्रम माणिक्य देब बर्मा ने आरोप लगाया कि "बंटवारे के समय मेरी दादी को अंधेरे में रखते हुए पुराने त्रिपुरा राज के बड़े हिस्से को पूर्वी पाकिस्तान को दे दिए गए थे और यह हमारे देश के इतिहास का सबसे काला दौर था।"
'PoK, नोआखली और चटगांव पोर्ट लेने का समय...
निशिकांत दुबे ने समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा "अब समय आ गया है कि सिर्फ़ पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर को पाकिस्तान से वापस लिया जाए। अब समय आ गया है कि उन इलाकों को भी वापस लिया जाए जो नेहरू जी ने 'जबरदस्ती सौंप दिए थे', चाहे वह नोआखली हो , चटगांव पोर्ट हो या सिलहट हो। अब इतिहास को सही करने का समय आ गया है।"
आगे उन्होंने कहा "तीनों इलाके, नोआखली , सिलहट और चटगांव पोर्ट, टिपरा किंगडम का हिस्सा थे। त्रिपुरा को पहले टिपरा के नाम से जाना जाता था। इसके राजा, बीर बिक्रम सिंह, नेहरू से लगातार लड़ते रहते थे, यह पूछते हुए कि वह अपने इलाके पर बातचीत कैसे कर सकते हैं। वह पूछते थे, आप नोआखली को पाकिस्तान को कैसे सौंप सकते हैं? आप सिलहट पर रेफरेंडम कैसे कर सकते हैं ? आप चटगांव पर रेफरेंडम कैसे कर सकते हैं? यह मेरा किंगडम है। मैं तय करूंगा कि यह भारत का हिस्सा रहेगा, पाकिस्तान का या एक आज़ाद देश बनेगा।"
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हिंसा का जवाब देने के बजाय मुस्लिम लीग को चुना
दुबे ने आरोप लगाया कि पंडित नेहरू ने 1946 में नोआखली में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा का जवाब देने के बजाय मुस्लिम लीग को अपनी सरकार में लाने को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा "नेहरू जी प्रधानमंत्री बनने के लिए बेताब थे।
भारत 1947 में आजाद हुआ, लेकिन वे 15 अगस्त 1947 को प्रधानमंत्री नहीं बने। वे 2 सितंबर 1946 को प्रधानमंत्री बने। जैसे ही वे प्रधानमंत्री बने, मुस्लिम लीग ने डायरेक्ट एक्शन शुरू कर दिया।
अक्टूबर में, 15 अक्टूबर 1946 को, हिंदू-बहुल इलाके नोआखली में हिंदुओं का बड़े पैमाने पर नरसंहार हुआ । एक ही दिन में लगभग 10,000 हिंदू मारे गए। लेकिन वह प्रधानमंत्री के तौर पर वहां नहीं गए। उन्हें इस बात की चिंता थी कि मुस्लिम लीग उनकी सरकार का हिस्सा कैसे बन सकती है।"
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चटगांव पोर्ट जाने से नॉर्थ-ईस्ट का डेवलपमेंट रुक गया
उन्होंने कहा, "चटगांव पोर्ट के चले जाने की वजह से ही पूरे नॉर्थईस्ट का डेवलपमेंट रुक गया था। अगर आज नॉर्थईस्ट पिछड़ा हुआ लगता है, अगर उसे दिक्कतें आ रही हैं, अगर हम उसकी खदानों, मिनरल्स और गैस का पूरा इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं, और अगर यह इलाका अभी भी कटा हुआ महसूस करता है, तो ऐसा सिर्फ इसलिए है क्योंकि अब हमारे पास वह पोर्ट नहीं है। यह समय चटगांव, नोआखली और सिलहट को भी वापस पाने का है।"