New Gratuity Rules: ग्रेच्‍युटी पाने के लिए 5 साल की नौकरी जरूरी नहीं, एक साल में भी मिलेगा लाभ! सरकार ने बदले ये नियम

New Gratuity Rules: भारत सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से नया लेबर कोड लागू कर दिया है। इसके तहत अब फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों को 5 साल के बजाय मात्र 1 साल की नौकरी पर ग्रेच्युटी मिलेगी।

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New Gratuity Rules
New Gratuity Rules | Image: File photo

New Gratuity Rules: सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से नया लेबर कोड लागू कर दिया है। इसके तहत इन-हैंड सैलरी, काम के घंटों और रिटायरमेंट प्लानिंग पूरी तरह से रि-सेट होने वाली है। सरकार के नए बदलावों के तहत कर्मचारियों को मिलने वाली ग्रेच्युटी की राशि में इजाफा हो सकता है।
बता दें, ग्रेच्युटी किसी भी कर्मचारी को रिटायरमेंट के समय म‍िलने वाला वह पैसा है, ज‍िसकी कैलकुलेशन हर पांच साल के बेस पर की जाती है। ऐसे में आइए जानते हैं 1 अप्रैल 2026 से इसमें क्या बदलाव होने वाले हैं और ग्रेच्युटी की कैलकुलशन पर क्‍या फर्क पड़ेगा?

1 साल की नौकरी पर भी मिलेगी ग्रेच्युटी

अब तक किसी भी निजी या सरकारी संस्थान में ग्रेच्युटी का लाभ पाने के लिए कम से कम 5 साल की लगातार सेवा अनिवार्य थी, लेकिन नए नियमों ने इस बाध्यता को खत्म कर दिया है। 

नए लेबर कोड के तहत 'फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉई' (FTE) यानी अनुबंध या निश्चित अवधि के लिए काम करने वाले कर्मचारी केवल एक साल की नियमित सेवा के बाद ग्रेच्युटी के पात्र होंगे। वहीं, सामान्य नियमित कर्मचारियों के लिए 5 साल की शर्त बनी रहेगी, लेकिन यदि आखिरी साल में नौकरी 6 महीने से ज्यादा की है, तो उसे पूरा एक साल गिना जाएगा।

सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव से घटेगी टेक-होम सैलरी?

नए नियमों के अनुसार, अब किसी भी कर्मचारी की बेसिक सैलरी, महंगाई भत्ता (DA) और रिटेनिंग अलाउंस मिलकर उसकी कुल सीटीसी (CTC) का कम से कम 50% होना अनिवार्य है। पहले कंपनियां अलाउंस बढ़ाकर बेसिक सैलरी कम रखती थीं ताकि उन्हें ग्रेच्युटी और PF में कम योगदान देना पड़े। अब बेसिक सैलरी बढ़ने से आपकी ग्रेच्युटी की राशि में भारी इजाफा होगा।

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इसका एक असर यह भी होगा कि आपके PF का योगदान बढ़ जाएगा, लेकिन हर महीने हाथ में आने वाली टेक-होम सैलरी कम हो सकती है। हालांकि, रिटायरमेंट के समय मिलने वाली एकमुश्त राशि काफी बड़ी होगी।

पुराने कर्मचारियों के लिए प्रावधान

लेबर मिनिस्ट्री ने साफ किया है कि नई व्यवस्था 21 नवंबर 2025 से प्रभावी मानी जाएगी। जो पुराने कर्मचारी इस तारीख के बाद इस्तीफा देंगे या रिटायर होंगे, उनकी ग्रेच्युटी की गणना उनकी 'लास्ट ड्रॉन सैलरी' (अंतिम वेतन) के आधार पर की जाएगी। इसका मतलब है कि बढ़ी हुई बेसिक सैलरी का लाभ उनके पूरे सेवा काल के लिए मिलेगा।

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नए फ्रेमवर्क में कंपनियों के लिए पारदर्शिता दिखाना अनिवार्य हो गया है। इससे अब ग्रेच्युटी बेनिफिट को CTC का अनिवार्य हिस्सा माना जाएगा, चाहे वह ऑफर लेटर में स्पष्ट रूप से लिखा हो या नहीं। 

काम के घंटे कितने होंगे? 

नए कोड में हफ्ते में अधिकतम 48 घंटे काम का प्रावधान है। ऐसे में अगर आप दिन में 8 घंटे काम करते हैं, तो 6 दिन की वर्किंग होगी। वहीं, अगर कंपनी 12 घंटे की शिफ्ट रखती है, तो आपको हफ्ते में सिर्फ 4 दिन काम करना होगा और 3 दिन की छुट्टी मिलेगी। 

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Published By :
Shashank Kumar
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