ईशा फाउंडेशन के लापता लोगों की तलाश जारी, तिब्बत से नेपाल लौटे सतगुरु; ग्राउंड जीरो पर जाकर पीड़ितों की मदद करने की जताई इच्छा

ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सतगुरु तिब्बत से नेपाल लौट आए हैं। वे अभी काठमांडू में हैं। वहीं, फाउंडेशन के 77 लोग अभी लापता है जिनकी तालाश के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।

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Sadhguru Refused Immediate Evacuation from Tibet to Ensure Safe Exit of Over 700 Isha Members, Says Foundation
तिब्बत से नेपाल लौटे सतगुरु, ग्राउंड जीरो पर जाकर पीड़ितों की मदद करने की जताई इच्छा | Image: X

चीन-नेपाल सीमा के नजदीकी इलाकों में आई भीषण बाढ़ के बाद ईशा फाउंडेशन के कई तीर्थयात्री अभी भी लापता हैं। उनकी तलाश के लिए लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। इस बीच ईशा सेक्रेड वॉक्स की समन्वयक मां गंभीरी ने बताया कि सतगुरु जी तिब्बत से नेपाल लौट आए हैं। वे अभी काठमांडू में हैं। भारत सरकार उन्होंने देश लौटने को कह रही है मगर वो ग्राउंड जीरो पर जाकर लोगों की मदद करने की इच्छा जताई है।

आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु ने बताया है कि कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौट रहे उनके एक ग्रुप के कम से कम 77 लोग लापता हैं। सद्गुरु के अनुसार, यह ग्रुप तिब्बत-चीन सीमा के पास स्थित जिगरोंग (Gyirong) के इमिग्रेशन सेंटर में मौजूद था, तभी अचानक बाढ़ आ गई। इमिग्रेशन कार्यालय में मौजूद लोगों के बारे में अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं हो पाई है।  

तिब्बत से नेपाल लौटे सतगुरु

ईशा सेक्रेड वॉक्स की समन्वयक मां गंभीरी ने कहा, "सतगुरु जी तिब्बत से नेपाल लौट आए हैं। वे अभी काठमांडू में हैं। भारत सरकार का काफी दबाव था कि सतगुरु हवाई जहाज़ से चले जाएं लेकिन उनका इरादा कुछ और है। असल में वे उस जगह (ग्राउंड ज़ीरो) पर जाना चाहते हैं जहां घटना हुई थी, ताकि वे हर संभव मदद पहुंचा सकें। सतगुरु जमीनी रास्ते से जाना चाहते थे।"

ग्राउंड जीरों पर जाना चाहते हैं सतगुरु-मां गंभीरी 

मां गंभीरी ने आगे कहा, "हम अलग-अलग तरह की अनुमति लेने की कोशिश कर रहे हैं। हम इसे मुमकिन बनाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं लेकिन बदकिस्मती से ऐसा हो नहीं पा रहा है। रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहे हैं और हमें इसके लिए आवश्यक अनुमति नहीं मिल पा रही है। जाहिर है, वे(सतगुरु जी) वो काम नहीं कर सकते जो मिलिट्री कर सकती है, लेकिन हम वहां पहुंचना चाहते हैं। सतगुरु जी उड़कर नहीं जाना चाहते और न ही कोई दूसरी मदद लेना चाहते हैं।"

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ईशा फाउंडेशन के 77 लोग लापता

गौरतलब है कि ईशा फाउंडेशन हर साल कैलाश मानसरोवर की कई तीर्थयात्राओं का आयोजन करता है। तीर्थयात्रियों के समूह काठमांडू से नेपाल होते हुए तिब्बत जाते हैं, जहां यात्रा के दौरान पैदल ट्रेकिंग भी शामिल होती है। इस साल भी बड़ी संख्या में तीर्थ यात्री शामिल हुए थे। सदगुरु ने अपने X पोस्ट में बताया था कि हमारी यात्रा में शामिल 21 समूहों में से 495 लोग पहले ही सुरक्षित लौट चुके हैं। अभी 743 लोग तिब्बत में हैं, 148 लोग नेपाल में हैं, 77 लोग इमिग्रेशन सेंटर पर थे और 3 वॉलंटियर्स नेपाल के तिमुरे (Timure) में हैं। इमिग्रेशन सेंटर में रूकने वाला लोगों का फिलहाल कोई पता नहीं चल पा रहा है।


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Published By:
 Rupam Kumari
पब्लिश्ड