9 पसलियां टूटी, फेफड़े डैमेज हुए, लेकिन हौसला नहीं डगमगाया... हार ना मानने वाली इस जांबाज बेटी के लिए शिक्षा मंत्री ने बदले NEET के नियम
जज्बा और हौसला हो तो बड़ी से बड़ी बाधाएं भी घुटने टेक देती हैं। कोलकाता की सृष्टि दुबे ने आज अपने हौसले से साबित कर दिखाया है। 9 पसलियों के गंभीर फ्रैक्चर और हाल ही में वेंटिलेटर से बाहर आने के बाद भी, सृष्टि का डॉक्टर बनने का सपना इतना बड़ा है कि दर्द और शारीरिक अक्षमता उनके इरादों को डिगा नहीं पाई।
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देशभर में नीट यूजी (NEET UG) री-एग्जाम का शोर है, लेकिन इस परीक्षा के बीच कोलकाता से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरे देश को भावुक और प्रेरित कर दिया है। यह कहानी है सृष्टि दुबे की, जिन्होंने शारीरिक पीड़ा और मौत को मात देकर अपने डॉक्टर बनने के सपने को प्राथमिकता दी। महज सात दिन पहले एक सड़क हादसे का शिकार हुई सृष्टि ने वेंटिलेटर और मेडिकल उपकरणों के बीच परीक्षा देकर दृढ़ इच्छाशक्ति की मिसाल कायम की है।
वेंटिलेटर से परीक्षा तक सृष्टि की जिद के आगे झुका सिस्टम
कोलकाता की रहने वाली सृष्टि के लिए बीते कुछ दिन किसी बुरे सपने से कम नहीं थे। 14 जून को हुए एक भीषण सड़क हादसे में उनकी 9 पसलियां टूट गईं और फेफड़ों को गंभीर क्षति पहुंची। हालत इतनी नाजुक थी कि उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया। हालांकि, जैसे ही उनकी स्थिति में मामूली सुधार हुआ, उन्होंने अपने पिता से परीक्षा में शामिल होने की जिद पकड़ ली। एक साल की कड़ी मेहनत को व्यर्थ न जाने देने का उनका संकल्प इतना मजबूत था कि उन्होंने हार मानने से इनकार कर दिया।
पिता की गुहार पर जागा शिक्षा मंत्रालय
सृष्टि के पिता, श्रीराम शिवजी दुबे, अपनी बेटी की जिद के आगे बेबस थे लेकिन उसकी हिम्मत को सलाम भी कर रहे थे। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को एक भावुक पत्र लिखकर बेटी के सपने को पूरा करने के लिए मानवीय सहायता मांगी। मंत्री ने तत्परता दिखाते हुए एनटीए (NTA) और स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिए कि सृष्टि को परीक्षा में बैठने के लिए हर संभव सहयोग प्रदान किया जाए। शिक्षा मंत्री की इस पहल ने एक बेटी के डॉक्टर बनने की राह को आसान बना दिया।
मेडिकल निगरानी में परीक्षा का अनूठा दृश्य
शिक्षा मंत्री के आदेशों के बाद, कोलकाता हाई स्कूल में सृष्टि के लिए विशेष व्यवस्था की गई। उन्हें ग्राउंड फ्लोर पर एक अलग कमरा दिया गया। परीक्षा के दौरान, सृष्टि अस्पताल की ड्रेस में व्हीलचेयर पर बैठी थीं। उनके शरीर से मेडिकल पाइप्स और चेस्ट ड्रेन जैसे उपकरण जुड़े हुए थे। उनकी स्थिति की गंभीरता को देखते हुए परीक्षा केंद्र के अंदर आईएलएस (ILS) अस्पताल के डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ मौजूद रहे, जबकि बाहर एक एम्बुलेंस स्टैंडबाय पर तैनात की गई।
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सोशल मीडिया पर छाई सृष्टि की हिम्मत
सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि जो छात्रा मौत के मुंह से निकलकर और इतनी शारीरिक पीड़ा सहकर भी अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित है, वह निश्चित रूप से भविष्य में एक बेहतरीन और संवेदनशील डॉक्टर साबित होगी। परीक्षा केंद्र पर मौजूद डॉक्टरों की टीम का कहना है कि सृष्टि की तबीयत स्थिर है और उनका आत्मविश्वास ही उनके रिकवरी में सबसे बड़ी दवा साबित हो रहा है।
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