NEET-UG 2026: 'UPSC में कभी पेपर लीक नहीं हुआ, NTA को सीखने की जरूरत', नीट पेपर लीक मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान क्या-क्या हुआ?

नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को कड़ी फटकार लगाई है। जस्टिस नरसिम्हा की बेंच ने कहा कि जब तक इस मामले में असली जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक ऐसी गड़बड़ियां नहीं रुकेंगी।

  • Facebook Share Icon
  • Twitter Share Icon
  • WhatsApp Share Icon
 
Follow : Google News Icon
NEET-UG 2026
NEET-UG 2026 | Image: X

NEET-UG पेपर लीक मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जब तक इस मामले में असली जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक ऐसी घटनाओं पर लगाम लगाना नामुमकिन है। 

कोर्ट ने NTA की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) इससे भी बड़े पैमाने पर परीक्षाएं आयोजित करता है, लेकिन वहां कभी पेपर लीक जैसी स्थिति पैदा नहीं होती। NTA को UPSC के मॉडल से सीखने की जरूरत है।

PM मोदी खुद रख रहे हैं नजर, सरकार युवाओं को लेकर गंभीर

सुनवाई के दौरान सरकार का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को आश्वस्त किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इस पूरी जांच प्रक्रिया की निगरानी कर रहे हैं ताकि भविष्य में किसी भी चूक की गुंजाइश न रहे। उन्होंने कहा, "हम देश के युवाओं और उनके भविष्य को लेकर बेहद गंभीर हैं। 21 जून को होने वाले री-टेस्ट के लिए कड़े सुरक्षा इंतजाम और नए वैज्ञानिक तरीके अपनाए जा रहे हैं।"

जस्टिस नरसिम्हा की अगुवाई वाली बेंच ने शिक्षा मंत्रालय से इस परीक्षा की पूरी जांच प्रक्रिया का ब्योरा मांगा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि NTA फिलहाल एक मजबूत और स्थायी संस्था की तरह काम नहीं कर रही है। इसे एड-हॉक (तदर्थ) रवैये से बाहर निकालकर एक मजबूत इंस्टीट्यूशनल सिस्टम में बदलना होगा। कोर्ट ने सुझाव दिया कि फुल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने के लिए NTA को IIT और देश के अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों की मदद लेनी चाहिए।

Advertisement

सिफारिशों के बाद भी क्यों हुई नाकामी?

अदालत ने NTA को भंग करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए साल 2024 के पेपर लीक के बाद गठित हाई-पावर मॉनिटरिंग कमेटी के प्रमुख और पूर्व इसरो चीफ डॉ. के. राधाकृष्णन से सीधा सवाल किया कि तमाम सुधारों और दावों के बावजूद इस बार परीक्षा में नाकामी क्यों हाथ लगी? जस्टिस नरसिम्हा ने पूछा-  'गड़बड़ी कमेटी की सिफारिशों में थी या उनके सही तरीके से इंप्लीमेंटेशन में?'

इस पर डॉ. राधाकृष्णन ने सफाई देते हुए कहा कि कमेटी द्वारा सुझाए गए 35 दीर्घकालिक और 60 अल्पकालिक सुझावों में से अधिकांश को लागू किया जा चुका है। उन्होंने माना कि पेपर से छेड़छाड़ एक बड़ी चुनौती रही है, लेकिन आगामी री-एग्जाम में सुरक्षा का पूरा खाका तैयार है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि NTA में विशेषज्ञों की कमी थी, जिसे अब दूर किया जा रहा है।

Advertisement

छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बंद हो

कोर्ट ने बेहद भावुक और सख्त लहजे में कहा कि हर साल लाखों छात्र दिन-रात मेहनत करते हैं। परीक्षा में इस तरह की धांधली से वे मानसिक तनाव (ट्रॉमा) से गुजरते हैं, जिससे उन्हें बचाना सरकार और एजेंसी की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इससे पहले 25 मई की सुनवाई में भी कोर्ट ने NTA को फटकार लगाते हुए कहा था कि यह बेहद दुखद है कि 2024 के पेपर लीक मामले से एजेंसी ने कोई सबक नहीं सीखा।

NEET पेपर लीक में अब तक 13 गिरफ्तार, 21 जून को परीक्षा

3 मई को  देशभर के 551 शहरों में NEET-UG परीक्षा आयोजित हुई, जिसमें करीब 23 लाख छात्र शामिल हुए। 7 मई को परीक्षा में गड़बड़ी और पेपर लीक की बात सामने आई। वहीं 12 मई को गड़बड़ी की पुष्टि होने के बाद परीक्षा को रद्द कर दिया गया। CBI जांच मामले की कमान सीबीआई के पास है और अब तक 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। अब 21 जून के देश के प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेजों MBBS, BDS, AYUSH की लगभग 1.25 लाख से अधिक सीटों पर दाखिले के लिए अब 21 जून को दोबारा परीक्षा Re-Exam आयोजित की जाएगी।

ये भी पढ़ें - युद्ध की चिंगारी भड़कने के बाद फिर अच्छी खबर, अमेरिका-ईरान के बीच डील फाइनल मोड़ पर, सिर्फ ट्रंप की मुहर का इंतजार- अमेरिकी मीडिया का दावा

Published By:
 Sujeet Kumar
पब्लिश्ड