टेलीग्राम पर PDF, जयपुर में प्रिंट और लाखों में डील...NEET पेपर लीक मामले में CBI ने किया बड़ा खुलासा, ऐसे हुआ स्टूडेंट्स के भविष्य से 'खेल'
CBI की जांच में NEET-UG पेपर लीक को लेकर हैरान कर देने वाला खुलासा हुआ है। सीबीआई ने दावा किया है कि पूरी खेल NTA के एक्सपर्ट ने ही रचा था। इसके लिए लाखों रुपए की डील हुई थी।
- भारत
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NEET-UG पेपर लीक मामले की जांच फिर तेज हो गई है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अपनी चार्जशीट दाखिल की है। CBI ने दावा किया है कि NTA के एक्सपर्ट का ही पेपर लीक कराने में हाथ था और इसके लिए लाखों रुपए की डील की गई थी। चार्जशीट में यह भी बताया है कि कैसे भुगतान के डिजिटल रिकॉर्ड ना मिले इसके लिए केश में पूरा लेन देन किया गया था।
जांच में सामने आया है कि तीन अलग-अलग विषयों के विशेषज्ञों ने अलग-अलग तरीकों से नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के दिल्ली कार्यालय से प्रश्नपत्र बाहर निकाले थे। पेपर किसी प्रिंटिंग प्रेस से नहीं बल्कि NTA के लिए काम कर रहे विशेषज्ञों ने ही बाहर निकाला था। CBI के इस खुलासे के बाद राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी में हड़कंप मच गया है।
डिजिटल रिकॉर्ड से बचने के लिए केश में लेन-देन
CBI को ऑनलाइन भुगतान के डिजिटल रिकॉर्ड भी मिले हैं। जांच के दौरान डॉ. शिरुरे के परिवार से 5 लाख रुपये नकद बरामद होने का भी दावा किया गया है। CBI का कहना है कि चार्जशीट में डिजिटल, दस्तावेजी और फोरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर पेपर लीक की पूरी साजिश का खुलासा किया गया है। जांच एजेंसी ने फोरेंसिक जांच, पैसों के लेनदेन के सबूत और नकदी बरामद करके इस पूरे नेटवर्क को उजागर किया है।
अस्पताल में याद करवाया था प्रश्न
CBI का दावा है कि फिजिक्स के प्रश्न तेजस शाह को बताए गए, जिन्होंने उनकी तस्वीरें लेकर लातूर के RCC तक पहुंचाईं। CBI के मुताबिक, पी.वी. कुलकर्णी, मनीषा मंधारे और डॉ. मनोज शिरुरे ने उम्मीदवारों को अस्पताल बुलाकर परीक्षा से पहले पूरा प्रश्न बैंक याद कराया।
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जयपुर में निकाली गई थी प्रश्नपत्र की प्रिंट
जांच में दावा, पेपर महाराष्ट्र से हरियाणा और फिर राजस्थान तक पहुंचा।आरोप है कि जयपुर में प्रश्नपत्र की प्रिंट कॉपी निकालकर छात्रों और निजी ट्यूटर्स में बांटी गई। CFSL और GEQD की जांच में बरामद नोटबुक का मिलान असली NEET-UG प्रश्नपत्र से हुआ, दोनों में प्रश्न और उत्तर समान पाए गए।
CBI के अनुसार एक आरोपी ने प्रश्न कागज की पर्चियों पर लिखकर छिपा दिए। दो अन्य आरोपियों ने प्रश्न याद किए और होटल लौटकर उन्हें लिख लिया या NCERT की पुस्तकों में संबंधित अंश चिन्हित कर दिए। जांच में सामने आया कि NTA कार्यालय की पहली मंजिल के पूरे गोपनीय विंग में लाइव CCTV मॉनिटरिंग की व्यवस्था नहीं थी।
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CCTV फुटेज का नहीं मिला बैकअप
NTA के CCTV सिस्टम में केवल 20-25 दिनों का बैकअप उपलब्ध था। NEET-UG 2026 से जुड़ा गोपनीय कार्य 7 अप्रैल 2026 को पूरा हो गया था। जबकि CBI ने मामला 12 मई 2026 को दर्ज किया। इसी कारण जांच के दौरान संबंधित अवधि का CCTV फुटेज उपलब्ध नहीं मिला। CBI का दावा है कि आरोपी मनीषा संजय हवलदार दिल्ली स्थित अपने ठिकाने पर लौटकर प्रश्नों के संक्षिप्त नोट तैयार करती थी। मामले में दाखिल चार्जशीट पर दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट 10 अगस्त को संज्ञान लेगी।