अपडेटेड 20 March 2025 at 10:46 IST
झूठ फैलाने वाले 97 पोस्ट, बांग्लादेश कनेक्शन; नागपुर में और दंगे भड़काने के लिए कैसे सोशल मीडिया को बनाया गया हथियार?
नागपुर हिंसा को लेकर साइबर पुलिस ने कई ऐसे अकाउंट को आईडेंटिफाई कर लिया है, जिन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से अफवाह फैलाने की कोशिश की।
- भारत
- 2 min read

Nagpur Violence: महाराष्ट्र के नागपुर में 17 मार्च की हिंसा के पीछे की साजिश का परत-दर परत खुलासा हो रहा है। पूरे घटनाक्रम के दौर की एक-एक कड़ी जोड़ने की कोशिश है और उसके सहारे नागपुर पुलिस असली गुनहगारों को उनके किए की सजा देने का रिकॉर्ड रख रही है। अब नागपुर दंगे में बांग्लादेश कनेक्शन भी पता चला है, जहां से सोशल मीडिया के जरिए आग को और भड़काने के पूरे प्रयास थे। साइबर क्राइम की टीम ने ऐसे ही 100 के करीब झूठ फैलाने वाले पोस्ट वैरिफाई किए हैं।
महाराष्ट्र साइबर पुलिस के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, साइबर पुलिस ने कई ऐसे अकाउंट को आईडेंटिफाई कर लिया है, जिन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से अफवाह फैलाने की कोशिश की। इन सभी अकाउंट होल्डर को महाराष्ट्र साइबर की तरफ से नोटिस भेजा जाएगा और इन सभी के खिलाफ सख्त एक्शन की भी तैयाी है। साइबर पुलिस ऐसे और भी कई अकाउंट्स पर नजर बनाए हुए है।
बांग्लादेशी अकाउंट की पहचान की गई
साइबर पुलिस को एक बांग्लादेशी अकाउंट के बारे में पता चला है। बताया जाता है कि एक फेसबुक अकाउंटर बांग्लादेश से चल रहा था, जिससे नागपुर में और दंगे भड़काने की धमकी दी जा रही थी। उसके अलावा भी सोशल मीडिया पर झूठे दावे किए गए दंगों के दौरान घायल हुए दो व्यक्तियों की मौत हो गई। जानकारी है कि साइबर सेल ने गलत सूचना फैलाने वाले 97 पोस्ट की पहचान की है और लोगों से असत्यापित सूचनाओं पर विश्वास करने से बचने का आग्रह किया है।
हिंसा की जांच कितनों पर आंच? VIDEO
नागपुर दंगे में पुलिस ने और क्या-क्या एक्शन लिया?
नागपुर हिंसा को लेकर अब तक 10 FIR दर्ज हो चुकी हैं। सूत्र बताते हैं कि पुलिस ने दंगों के सीसीटीवी फुटेज के आधार पर 200 संदिग्धों की पहचान की है और 1000 के करीब लोगों की पहचान करने पर काम कर रही है। हिंसा को लेकर तथाकथित मास्टरमाइंड फहीम खान समेत अब तक 90 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सामने ये भी आया है कि विशेषज्ञों और मौलवियों ने औरंगजेब की प्रतिमा पर लपेटे गए हरे कपड़े की जांच की, लेकिन उस पर कोई धार्मिक ग्रंथ या कथन नहीं मिला।
Advertisement
Published By : Dalchand Kumar
पब्लिश्ड 20 March 2025 at 10:46 IST