N Chandrasekaran: मान गए चंद्रशेखरन, फिर चुने गए टाटा संस के चेयरमैन, पिछले महीने दिया था इस्तीफा
N Chandrasekaran Tata Sons: एन चंद्रशेखरन को एक बार फिर से टाटा संस के चेयरमैन पद के लिए चुना गया है। गुरुवार को हुई बैठक में सभी बोर्ड मेंबर ने चंद्रशेखरन के अगले पांच साल तक इस पद पर बने रहने के लिए वोट किया है।
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N Chandrasekaran Tata Sons: टाटा संस के चेयरमैन पद के लिए एन. चंद्रशेखरन को फिर से पांच साल के लिए अपॉइंट किया गया है। यह निर्णय गुरुवार को हुई टाटा संस की बोर्ड बैठक में लिया गया, जिसमें बोर्ड ने चंद्रशेखरन की पांच साल के एक और कार्यकाल के लिए पुनर्नियुक्ति को मंजूरी दी। रिपोर्ट के अनुसार बैठक में नोएल टाटा को छोड़कर सभी बोर्ड अधिकारियों ने एन. चंद्रशेखरन को फिर से चेयरमैन नियुक्त करने के लिए वोट किया है।
पिछले महीने इस्तीफे का ऐलान किया था
गौरतलब है कि एन. चंद्रशेखरन ने पिछले महीने ही चेयरमैन पद से इस्तीफे का ऐलान किया था। उन्होंने कहा था कि ग्रुप के लीडरशिप को लेकर कई चीजों में स्पष्टता नहीं है, जबकि स्पष्टता होनी बहुत जरूरी है। ऐसे में वे आगे इस पद से इस्तीफा दे देंगे। अब उन्होंने फिर से अगले पांच साल तक के लिए टाटा संस के चेयरमैन पद के लिए चुना गया है।
2017 में टाटा संस के चेयरमैन का पद संभाला था
एन. चंद्रशेखरन, जिन्होंने 2017 में टाटा संस के चेयरमैन का पद संभाला था, अभी अपने दूसरे पांच साल के कार्यकाल में हैं, जो फरवरी 2027 में खत्म होने वाला है। इस ताज़ा फ़ैसले से वह अगले पांच साल तक टाटा ग्रुप की कमान संभाले रख सकेंगे। उनकी लीडरशिप में टाटा ग्रुप ने टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, एविएशन, स्टील, कंज्यूमर प्रोडक्ट्स और फाइनेंशियल सर्विसेज जैसे कई सेक्टर में अपनी मौजूदगी बढ़ाई है।
टाटा संस की लिस्टिंग फिर से चर्चा में क्यों?
भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा वैधानिक लिस्टिंग आवश्यकता से छूट के लिए दायर याचिका को अस्वीकार किए जाने के बाद होल्डिंग कंपनी पर नियामक दबाव और बढ़ गया है। गुरुवार को हुई बोर्ड बैठक में इस विषय पर विस्तार से चर्चा हुई।
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चर्चाओं से परिचित सूत्रों के अनुसार, लिस्टिंग पर कोई औपचारिक निर्णय लेने के बजाय, निदेशकों ने टाटा संस के लिए आरबीआई मानकों का अनुपालन करने हेतु कई विकल्पों की समीक्षा की और निष्कर्ष निकाला कि सभी संभावित विकल्पों पर विचार किया जाना चाहिए।
टाटा संस ने लिस्टिंग की अनिवार्यता से छूट मांगी थी। सार्वजनिक लिस्टिंग से होल्डिंग कंपनी पर नियामकीय जांच का दबाव बढ़ जाएगा और टाटा समूह में किए गए उसके निवेशों के लिए व्यापक प्रकटीकरण दायित्व भी बढ़ जाएंगे। इसलिए, फिलहाल बोर्ड ने नेतृत्व के प्रश्न को तो सुलझा लिया है, लेकिन लिस्टिंग के मुद्दे को अनसुलझा छोड़ दिया है।