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Updated May 9th, 2024 at 18:13 IST

'जब जब हिन्दू घटा देश बंटा...जनसंख्या कानून बनाने की सख्त जरूरत', BJP MP साक्षी महाराज ने उठाई मांग

साक्षी महाराज ने कहा कि जनसंख्या को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी चिंता जता चुका है। सरकार को तत्काल प्रभाव से जनसंख्या नियंत्रण कानून बनान चाहिए।

Reported by: Digital Desk
Edited by: Sagar Singh
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India Population : प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) की एक रिपोर्ट के बाद नई चर्चा शुरू हो गई है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 1950 और 2015 के बीच भारत में 43 फीसदी मुसलमानों की आबादी बढ़ी है और 7.82 प्रतिशत हिंदू घट गए है। इस रिपोर्ट में धार्मिक आधार पर देश की आबादी को लेकर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।

आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के वर्किंग पेपर के अनुसार, भारत के भीतर हिंदू आबादी में लगातार गिरावट हुई है। इस रिपोर्ट पर उन्नाव से बीजेपी सांसद साक्षी महाराज का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि 'जमीन कम होती जा रही है और जनसंख्या बढ़ती जा रही है। दुर्भाग्य की बात यह है कि 8% हिंदू कम हो गए और 40 % मुसलमान बढ़ गए। पाकिस्तान में विभाजन के समय 25.5% हिन्दू थे, जो अब घटकर 2.50% रह गए।'

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जनसंख्या नियंत्रण कानून की मांग

साक्षी महाराज ने कहा कि जनसंख्या को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी चिंता जता चुका है। सरकार को तत्काल प्रभाव से जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाना चाहिए। ये देश के हित में है और बहुत जरूरी है। यह बहुत चिंता का विषय है, हर देशवासी के लिए जो राष्ट्र के बारे में सोचता है। आम आदमी जानता है कि जहां-जहां हिन्दू घटा, देश बटा। जब जब हिन्दू घटा देश बटा।

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ईएसी-पीएम में क्या है?

देश के प्रधानमंत्री को आर्थिक और संबंधित मुद्दों पर सलाह देने के लिए गठित एक स्वतंत्र निकाय है। किसी भी मुद्दे, आर्थिक या अन्य विश्लेषण, उस पर सलाह देना, व्यापक आर्थिक महत्व के मुद्दों को संबोधित करना और उन पर प्रधानमंत्री के सामने विचार रखने का काम ईएसी-पीएम का है। फिलहाल बिबेक देबरॉय इसके चेयरमैन हैं। बाकी सदस्यों में संजीव सान्याल, शमिका रवि, राकेश मोहन, साजिद चिनॉय, नीलकंठ मिश्रा, नीलेश शाह, टीटी राम मोहन और पूनम गुप्ता शामिल हैं।

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आबादी के धार्मिक आंकड़ों की रिपोर्ट

आर्थिक सलाहकार परिषद के वर्किंग पेपर के मुताबिक, 1950 और 2015 के बीच भारत में बहुसंख्यक हिंदू आबादी की हिस्सेदारी 84.68 फीसदी से 7.82 फीसदी घटकर 78.06 फीसदी हो गई। 1950 में मुस्लिम आबादी की हिस्सेदारी 9.84 प्रतिशत थी और 2015 में बढ़कर 14.09 प्रतिशत हो गई। इससे कुल मिलाकर उनकी हिस्सेदारी में 43.15 प्रतिशत का इजाफा हुआ।

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पारसियों और जैनियों को छोड़कर भारत में अन्य सभी धार्मिक अल्पसंख्यकों की आबादी में इस अवधि में 6.58 प्रतिशत तक की वृद्धि देखी गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की जनसंख्या में जैनियों की हिस्सेदारी 1950 में 0.45 प्रतिशत से घटकर 2015 में 0.36 प्रतिशत हो गई। भारत में पारसी आबादी की हिस्सेदारी में 85 प्रतिशत की भारी गिरावट देखी गई, जो 1950 में 0.03 प्रतिशत से घटकर 2015 में 0.004 प्रतिशत हो गई। इस अवधि के दौरान ईसाई आबादी का हिस्सा 2.24 फीसदी से 5.38 फीसदी बढ़कर 2.36 फीसदी हो गया। सिख आबादी में पिछले 65 साल में 6.58 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। सिख आबादी का हिस्सा 1950 में 1.24 प्रतिशत से बढ़कर 2015 में 1.85 प्रतिशत हो गया।

पाकिस्तान में घटी हिंदू आबादी

पाकिस्तान की बात करें तो यहां मुस्लिम बहुसंख्यक हैं, जिनकी हिस्सेदारी में 3.75 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इससे उनकी हिस्सेदारी 77 प्रतिशत से बढ़कर 80 प्रतिशत हो गई है। हालांकि, आरसीएस-डेम डेटासेट के अनुसार, 1971 में बांग्लादेश के गठन के बावजूद 1950 और 2015 के बीच पाकिस्तान में कुल मुस्लिम आबादी का हिस्सा 10 प्रतिशत बढ़ गया, जो 84 प्रतिशत से बढ़कर 93 प्रतिशत हो गया। शिया आबादी का हिस्सा (6 से 9 प्रतिशत तक) और अहमदिया आबादी का हिस्सा तीन गुना (1 से 3 प्रतिशत) बढ़ा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में हिंदू आबादी में भारी गिरावट आई है। 1950 में 13 प्रतिशत से घटकर 2015 में केवल 2 प्रतिशत रह गई। यह 65 साल की अवधि में 80 प्रतिशत की भारी कमी है, जहां वैश्विक स्तर पर अल्पसंख्यकों में औसतन 22 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। दिलचस्प बात यह है कि इसी अवधि में पाकिस्तान में ईसाइयों की हिस्सेदारी 1 से 2 प्रतिशत तक लगभग दोगुनी हो गई।

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ये भी पढ़ें: मुसलमानों की आबादी बढ़ी तो स्मृति ईरानी ने लगाया कांग्रेस पर आरोप, कहा- 'कांग्रेसी खुली बहस कर लें'

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Published May 9th, 2024 at 18:12 IST

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