'क्या हिंदुओं के लिए बॉर्डर खोल देना चाहिए?', बांग्लादेश में बवाल पर RSS चीफ मोहन भागवत की हुंकार; बोले- हिन्दू संगठित हो जाए तो...
बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचारों को लेकर RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कोलकाता में एकता की अपील की। जानें उन्होंने बॉर्डर खोल देने वाली मांग पर क्या बोला। मोहन भागवत ने लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर क्या कुछ कहां वो भी पढ़ें।
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Mohan Bhagwat News: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने 'RSS 100 व्याख्यानमाला' में बांग्लादेश की घटनाओं पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि, 'इसमें कोई संदेह नहीं है कि बांग्लादेश की घटनाओं का बंगाल पर प्रभाव पड़ रहा है। जो आप सब सोच रहे हैं, वही मैं भी सोच रहा हूं। मोहन भागवत ने कहा कि, अगर हिन्दू संगठित हो जाए, तो हालात बदलने में वक्त नहीं लगेगा। हिंदुओं को एकजुट होना होगा। हमें अपनों के साथ खड़े रहना होगा। हिंदुओं के लिए दुनिया में एक ही देश है और वह है भारत।
लिव-इन पर क्या बोले मोहन भागवत?
लिव-इन और विवाह पर मोहन भागवत ने कहा कि, 'मेरी डॉक्टरों से बात हुई है। उनका कहना है कि 19 से 25 साल की उम्र में शादी होने और 3 संतान होने से माता-पिता और बच्चों, दोनों का स्वास्थ्य ठीक रहता है।
आधुनिक जीवनशैली और ‘लिव-इन रिलेशनशिप’ पर संघ प्रमुख ने चिंता व्यक्त जताई। उन्होंने युवाओं को नसीहत देते हुए कहा कि जिम्मेदारी लेने से भागना उचित नहीं है। भागवत ने कहा, जहां तक महिलाओं की प्रवृत्ति और विवाह न करने वाली बातें हैं, आप जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार नहीं हैं, यह ठीक नहीं है। देश की असली बचत और सोना परिवारों के पास ही रहता है। इसलिए हमारा परिवार ही हमारी कल्चर यूनिट, सोशल यूनिट और इकॉनमी यूनिट है। अपने देश और अपनी परंपरा को बनाए रखना जरूरी है।'
हिंदुओं के लिए बॉर्डर खोलना चाहिए या नहीं?
बांग्लादेश में जारी हिंसा और हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के बीच भारत में एक सवाल उठ रहा है। क्या भारत को अपनी सीमाएं खोल देनी चाहिए? क्या वहां फंसे हिंदुओं को भारत आने की इजाजत मिलनी चाहिए? संघ प्रमुख से पूछा गया तो मोहन भागवत ने बांग्लादेश में पिस रहे हिंदुओं के लिए बॉर्डर खोल देने को लेकर कहा कि वह इसका फैसला सरकार और प्रशासन पर छोड़ेंगे।
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अगर हम बॉर्डर खोलेंगे तो दूसरे लोग भी अंदर आएंगे- भागवत
मोहन भागवत ने आगे कहा कि, हमें सीमा खोलनी चाहिए या नहीं, यह हम नहीं जानते। यह पूरी तरह से प्रशासन (सरकार) का फैसला है। अगर हम बॉर्डर खोलेंगे तो दूसरे लोग भी अंदर आएंगे। सरकार ही इसका जवाब देगी। भागवत का यह बयान इशारा करता है कि बॉर्डर खोलने से न सिर्फ पीड़ित हिंदू आ सकते हैं, बल्कि अराजक तत्व भी घुसपैठ कर सकते हैं, जिससे देश की सुरक्षा को खतरा हो सकता है।