'हिंदुस्तान हिंदुओं और मुसलमानों के बीच भाईचारा...', RSS प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर गदगद हुए बाबरी मस्जिद पक्षकार इकबाल अंसारी
हिंदू-मुस्लिम एकता पर RSS प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि मामले के पूर्व वादी इकबाल अंसारी ने कहा, हिंदुस्तान हिंदुओं और मुसलमानों के बीच भाईचारा का देश है।
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RSS प्रमुख मोहन भागवत इन दिनों अमेरिका दौरे पर हैं। शनिवार को न्यूयॉर्क में आयोजित ‘वन वर्ल्ड, वन ह्यूमैनिटी’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने एक महत्वपूर्ण बयान दिया। भागवत ने कहा कि अगर कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में कोई मुसलमान नहीं होना चाहिए, तो वह वास्तव में खुद को हिंदू नहीं मान सकता।इस बयान पर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों दलों की ओर से प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। वहीं, अयोध्या में बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि मामले के पूर्व पक्षकार इकबाल अंसारी ने मोहन भागवत के इस बयान का खुलकर समर्थन किया है।
न्यूज एजेंसी से ANI से बात करते हुए इकबाल अंसारी ने कहा,'हिंदुस्तान हिंदुओं और मुसलमानों के बीच भाईचारे और आपसी स्नेह की भूमि है। देश को आगे बढ़ना चाहिए और सभी को देश की भलाई के लिए मिलकर काम करना चाहिए। लोग देश के लिए, विकास के लिए और रोजगार के लिए काम करें।'
हिंदुस्तान हिंदुओं और मुसलमानों के बीच भाईचारे का देश-इकबाल अंसारी
इकबाल अंसारी ने आगे कहा, "मोहन भागवत ने जो कहा है, वह सही है। वे दुनिया भर में घूमने और चीजों को देखने-समझने के अपने अनुभव के आधार पर बात करते हैं। यह भाईचारे की मिसाल पेश करता है और दिखाता है कि हमें किस तरह के नेता की जरूरत है। हमें ऐसा नेता चाहिए जो सबका ख्याल रखे, हिंदुओं और मुसलमानों के बीच एकता को बढ़ावा दे और देश की प्रगति, विकास और रोजगार को आगे बढ़ाए।"
मोहन भागवत ने धर्मगुरुओं के सम्मेलन में क्या कहा?
मोहन भागवत ने शनिवार को न्यूयॉर्क में आयोजित ‘एक विश्व: एक मानवता धर्मगुरुओं के सम्मेलन’ (One World: One Humanity’ faith leaders conference) में धार्मिक विविधता, मानवता और सामाजिक एकता को लेकर अपना संदेश दिया। अलग-अलग धर्मों के धर्मगुरुओं की मौजूदगी में मोहन भागवत ने कहा कि पूजा-पद्धतियां और धार्मिक अनुशासन अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन अंतिम सत्य और मानवता एक ही हैता है।
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सत्य केवल सत्य होता है-मोहन भागवत
संघ प्रमुख ने आगे कहा कि सच्चाई मूल रूप से एक ही होती है, लेकिन इसको देखने का नजरिया अलग-अलग हो सकता है। उन्होंने कहा कि इंसान अपने दिमाग में बनी सोच और समझ के दायरे से प्रभावित होता है, इसलिए एक ही सत्य को बताने के तरीके अलग हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया में कई धर्म हैं और मौजूदा समय में धर्मों की पहचान काफी हद तक उनकी अलग-अलग परंपराओं और रीति-रिवाजों से होती है। किसी धार्मिक व्यवस्था और आध्यात्मिक मार्ग का पालन करने के लिए इन परंपराओं और अनुशासन की भी अपनी भूमिका होती है।