PoJK में हालात बेकाबू... 40 लोगों के कत्लेआम पर विदेश मंत्रालय का जोरदार हमला, कहा- हम अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह करते हैं कि...

PoJK में हालात अब बेकाबू हो गए हैं। पाकिस्तान प्रशासन पर बेगुनाहों का कत्लेआम करने का आरोप लगा रहा है। अब पूरे हालात पर भारतीय विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया आई है।

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PoJK Violence
PoK में हालात बेकाबू | Image: ANI

पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में तनाव बढ़ता जा रहा है। लोगों की शिकायतों से शुरू हुए विरोध-प्रदर्शन अब आंदोलन का रूप ले लिया है। पाकिस्तान सरकार पर लगातार बेगुनाहों की जान लेने का आरोप लग रहा है। अब तो मीडिया कवरेज पर रोक की बात भी सामने आने लगी है। मुनीर की सेना पर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने का आरोप लग रहा है। PoJK में आम नागरिकों के साथ बर्बरता और हिंसा पर भारतीय विदेश मंत्रालय का बयान सामना आया है।

PoJK पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, " पाकिस्तानी प्रशासन PoJK में शांतिपूर्ण नागरिकों के खिलाफ बेरहमी से बल प्रयोग कर रहा है। इस कार्रवाई में 40 से ज्यादा बेगुनाह लोगों की दुखद मौत हुई है और कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

रणधीर जायसवाल ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से की ये अपील

रणधीर जायसवाल ने आगे कहा "पाकिस्तानी प्रशासन की बेगुनाह लोगों के प्रति पूरी तरह से बेरुखी तब साफ हो गई जब उनके रक्षा मंत्री ने विरोध कर रहे नागरिकों को दुश्मन करार दिया। हम अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह करते हैं कि वे पाकिस्तान की हरकतों की जांच करें और उसके अत्याचारों के लिए उसे जवाबदेह ठहराएं।"

PoJK के निवासी ने बताया कैसे हैं हालात

वहीं, दूसरी ओर PoJK के दो निवासियों रावलकोट के सरदार अमान खान कश्मीरी और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अकील -ने सार्वजनिक बयान जारी कर  PoJK के हालात पर चिंता जताई है। उन्होंने पाकिस्तानी अधिकारियों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग का आरोप लगाया है और राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय मीडिया से जमीनी हालात का स्वतंत्र रूप से जायजा लेने की अपील की है।

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सरदार अमान खान कश्मीरी ने PoJK पुलिस के इंस्पेक्टर जनरल के बयान की आलोचना की, जिसे उन्होंने "गैर-ज़िम्मेदाराना" बताया और आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को आतंकवादी करार दिया गया। इस आरोप को खारिज करते हुए, उन्होंने दावा किया कि रावलकोट में जमा हुए प्रदर्शनकारी निहत्थे नागरिक थे जो अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल कर रहे थे।

मुनीर की सेना ने बेगुनाहों पर चलाई गोली

उन्होंने आरोप लगाया कि रेंजर्स, पुलिस, फ्रंटियर कॉर्प्स (FC) और अन्य सुरक्षा बलों के जवानों को शहर की ऊंची इमारतों की छतों पर तैनात किया गया था और उन पर ऊंची जगहों से नागरिकों को निशाना बनाया। आधिकारिक दावों पर सवाल उठाते हुए, अमान खान ने पाकिस्तानी सरकार से अपील की कि वह घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया के साथ-साथ विपक्षी राजनीतिक नेताओं को भी बिना किसी रोक-टोक के वहां जाने की अनुमति दे।

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तीन दिन में 40 लोगों की मौत का दावा

अमान खान ने आगे कहा, "अगर यहां आतंकवादी हैं, तो पाकिस्तान की मीडिया और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया को आकर खुद देखने दें।" उन्होंने तर्क दिया कि प्रदर्शनकारी आम नागरिक थे जो बेहतर शासन, रोजगार के अवसर, शिक्षा, न्याय और जिसे उन्होंने राज्य का दमन कहा, उसे खत्म करने की मांग कर रहे थे। आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान सैकड़ों युवा मारे गए। उन्होंने दावा किया कि पिछले तीन दिनों में ही लगभग 40 लोगों की मौत हुई है।

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Published By:
 Rupam Kumari
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