Mahakumbh 2025: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह लगाएंगे महाकुंभ में आस्था की डुबकी, कल दोपहर हेलिकॉप्टर से पहुंचेंगे
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह कल महाकुंभ में महात्माओं से मुलाकात करने पहुंचेंगे और त्रिवेणी की धारा में आस्था की डुबकी लगा सकते हैं।
- भारत
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Rajnath Singh Mahakumbh News: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह महाकुंभ के अवसर पर प्रयागराज जा रहे हैं। वह कल महाकुंभ में महात्माओं से मुलाकात करने पहुंचेंगे और त्रिवेणी की धारा में आस्था की डुबकी लगा सकते हैं। महाकुंभ के पांच दिन हो गए हैं। इस दौरान 7 करोड़ से ज्यादा लोगों ने संगम में आस्था की डुबकी लगाई है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 18 जनवरी को दोपहर 12:30 बजे हेलिकॉप्टर से महाकुंभ क्षेत्र में उतरेंगे और शाम तक वहीं रूकेंगे। इसके बाद वह एक वैवाहिक समारोह में शामिल होने जाएंगे, फिर अगले दिन वह जौनपुर के लिए रवाना हो जाएंगे। प्रयागराज के महाकुंभ में इस बार 45 करोड़ श्रद्धालुओं के पवित्र संगम में स्नान करने का अनुमान है। वहीं कुछ लोगों के मन में ये सावाल आ रहा होगा कि कुंभ में आने वाली इतनी भारी भीड़ की गिनती आखिर कैसे होती है? साथ ही यह सिर्फ अनुमान है या फिर इसके पीछे किसी सटीक मैथड का भी इस्तेमाल किया जाता है। बताते हैं कि आखिर दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन कहे जाने वाले कुंभ में लोगों की गिनती करने के लिए क्या-क्या तकनीक अपनाई जाती रही हैं।
कैसे हो रही है महाकुंभ की भीड़ की गिनती ?
महाकुंभ 2025 में श्रद्धालुओं की गिनती के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने अत्याधुनिक तकनीकों का सहारा लिया है। मेला क्षेत्र में 1800 AI-बेस्ड कैमरे लगाए गए हैं, जिनमें 1100 फिक्स्ड और 744 अस्थाई कैमरे शामिल हैं। ये कैमरे 360 डिग्री पर भीड़ का विश्लेषण कर, चेहरों की स्कैनिंग और भीड़ का अनुमान लगाते हैं। इसके अलावा, ड्रोन तकनीक का उपयोग कर प्रति वर्ग मीटर भीड़ का माप किया जा रहा है।
क्राउड असेसमेंट टीम जुटा रही रियल टाइम डाटा
बता दें योगी सरकार ने क्राउड असेसमेंट टीम का गठन किया है, जो रियल-टाइम डाटा जुटाकर लोगों की गिनती करती है। वहीं, मेला क्षेत्र में आने वाले मार्गों और मोबाइल फोन की गिनती के आधार पर डेटा एकत्र किया जा रहा है।
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पहले के तरीके क्या होते थे
पहले, गिनती मैनुअल हेड काउंट, ट्रेनों और बसों के यात्री आंकड़ों पर आधारित होती थी। हालांकि, तकनीक के बिना डेटा सटीक नहीं होता था। नई तकनीक ने गणना को ज्यादा सटीक बनाया है, लेकिन फिर भी सटीक आंकड़े संभव नहीं हैं। महाकुंभ में नई तकनीकी, प्रशासनिक कोशिश और श्रद्धालुओं की आस्था का संगम देखने को मिल रहा है।