स्वच्छता में नंबर-1 इंदौर, बजट की कोई कमी नहीं, फिर भी पेयजल में पुलिस चौकी टॉयलेट का गंदा पानी, 12 मौत के बाद टूटी सिस्टम की नींद
MP News : इंदौर दूषित पानी मामले में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जांच कमेटी बनाई है, कुछ अधिकारियों को सस्पेंड किया गया है। मृतकों के परिवारों को मुआवजा और मरीजों के मुफ्त इलाज का ऐलान हुआ है। लेकिन असली सवाल यह है कि ऐसी लापरवाही दोबारा न हो, इसके लिए सिस्टम में सुधार कब होगा? आम नागरिक की जान इतनी सस्ती नहीं होनी चाहिए।
- भारत
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Indore Contaminated Water : देश का सबसे स्वच्छ शहर कहलाने वाला इंदौर इन दिनों एक बड़ी त्रासदी से जूझ रहा है। भागीरथपुरा इलाके में नर्मदा की पेयजल पाइपलाइन में लीकेज के कारण सीवेज का गंदा पानी मिल गया, जिससे सैकड़ों लोग बीमार पड़ गए। स्थानीय लोगों के अनुसार, दूषित पानी पीने से अब तक 13 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई सौ लोगों के बीमार होने की खबर है, लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है।
इंदौर में नल का पानी जहर बन चुका है। जिन घरों में सुबह चाय की केतली चढ़ती थी, अब वहां मातम पसरा है। कई रिपोर्ट्स में 26 लोग ICU में और 160 से अधिक गंभीर रूप से बीमार बताए जा रहे हैं। उल्टी-दस्त और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याओं ने पूरे इलाके में हाहाकार मचा दिया है।
क्या हुआ था?
करीब दो हफ्ते से इलाके में नलों से बदबूदार और गंदा पानी आने की शिकायत आ रही थी। जांच में पता चला कि पुलिस चौकी के पास बने शौचालय के नीचे मुख्य पाइपलाइन में लीकेज था, जिससे सीवर का पानी पेयजल में मिल गया। लोगों ने कई शिकायतें कीं, लेकिन समय पर कार्रवाई नहीं हुई। मौतें होने के बाद ही प्रशासन पूरी तरह जागा। अब पानी की सप्लाई रोककर टैंकरों से साफ पानी दिया जा रहा है और घर-घर सर्वे कर मरीजों का इलाज किया जा रहा है।
जिम्मेदारी किसकी?
यह हादसा सिर्फ एक लीकेज नहीं, बल्कि सिस्टम की गहरी लापरवाही का नतीजा है। ये 'जनसंहार' नगर निगम की अनदेखी, स्थानीय नेताओं की बेरुखी और प्रशासन की सुस्ती का नतीजा है।
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- नगर निगम की अनदेखी : पुरानी पाइपलाइनें, शिकायतों पर ध्यान न देना और रखरखाव की कमी।
- स्थानीय नेताओं की बेरुखी : जब लोग तड़प रहे थे, तब जिम्मेदार मौज में थे। इलाके के पार्षद कमल वाघेला का झूला झूलते वीडियो और जलकार्य प्रभारी बबलू शर्मा का आयोजन में व्यस्त रहने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं।
- प्रशासन की सुस्ती : 150 से ज्यादा शिकायतें आने के बावजूद सप्लाई तुरंत क्यों नहीं रोकी गई? खतरे की आशंका होने पर पहले जांच क्यों नहीं हुई?
बजट की कोई कमी नहीं
इंदौर नगर निगम का बजट 2024-25 में 8,232 करोड़ रुपये था, जिसमें जल संकट खत्म करने और उपकरणों में 50% बढ़ोतरी का दावा किया गया। मध्य प्रदेश में जल जीवन मिशन के लिए 2025-26 में 17,136 करोड़ रुपये का प्रावधान है, जिसमें नर्मदा परियोजना के लिए 1,900 करोड़ शामिल हैं। इतने बड़े बजट के बावजूद आम आदमी को साफ पानी नहीं मिल पाया। स्वच्छता में नंबर-1 शहर में पानी से मौतें होना शर्मनाक है।
हाईकोर्ट के सख्त आदेश
स्थानीय लोग और पीड़ित परिवारों के मुताबिक अब तक 12 लोगों की मौत हुई लेकिन CM मोहन यादव और इंदौर कलेक्टर महज 4 की मौत का दावा कर रहे। हाईकोर्ट ने सख्त आदेश दिए है कि सभी मरीजों का मुफ्त में इलाज करना होगा। मृतक मरीजों की स्टेटस रिपोर्ट प्रदेश सरकार को 2 जनवरी को पेश करनी होगी। इंदौर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रितेश इंसानी ने यह जनहित याचिका दायर की थी।