इश्क बन गई थी इन्क्वायरी...गर्लफ्रेंड के भाई की हत्या कर शव को दफनाया; नमक से खुला राज; दृश्यम जैसे हत्याकांड से हिला इंदौर
कभी-कभी इश्क, इम्तहान नहीं… इन्क्वायरी बन जाता है। और जब प्यार में डर, और डर में गुस्सा मिल जाए तो मौत ज्यादा दूर नहीं होती। ऐसा ही एक मामला मध्य प्रदेश के इंदौर में सामने आया है
- भारत
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कभी-कभी इश्क, इम्तहान नहीं… इन्क्वायरी बन जाता है। और जब प्यार में डर, और डर में गुस्सा मिल जाए तो मौत ज्यादा दूर नहीं होती। ऐसा ही एक मामला मध्य प्रदेश के इंदौर में सामने आया है। यहां बारिश की कुछ बूंदों ने वो राज खोल दिए, जिसे मिट्टी में दबाकर भुला देने की कोशिश की गई थी। जी हां यहां बॉलीवुड फिल्म दृश्यम की तरह एक मर्डर मिस्ट्री की बात हो रही है जिस पुलिस ने अब वर्कआउट किया है। इंदौर के पास खुडैल थाना क्षेत्र में एक आशिक ने अपनी प्रेमिका के भाई की हत्या कर लाश तालाब के किनारे गड्ढा कर गाढ़ दी थी। बीते कुछ दिनों से बारिश होने कारण उसे लगा कि लाश दुर्गंध मार रही होगी। यह सोचकर वह लाश को नमक में दबाने के लिए कुछ मजदूरों को अपने साथ ले गया, लेकिन शराब के नशे में उन मजदूरों ने पूरी कहानी उगल दी। इसके बाद इस सनसनीखेज हत्या का खुलासा हुआ। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। मृतक का नाम विशाल (21) है, जिसकी गुमशुदगी की एफआईआर कुछ दिन पहले उसकी बहन ने करवाई थी।
पुलिस के मुताबिक हत्या करने वाला कोई और नहीं, बल्कि युवती का आशिक रोहित परमार निकला। उसे शक था कि उसके प्रेमिका का भाई विशाल उसके रिश्ते में बाधा बन रहा है। इसलिए उसने विशाल की हत्या कर दी और लाश को तालाब किनारे गड्ढा खोदकर दफना दिया। डीएसपी उमाकांत चौधरी के अनुसार, पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है।
विस्तार से जानिए पूरा मामला
इंदौर का खुडैल गांव शांत था,लेकिन उसके भीतर एक चुपचाप सुलगती आग पल रही थी। प्यार, डर और ब्लैकमेल की आग। पेशे से कंपाउंडर रोहित परमार पांच साल से अपने ही इलाके की एक युवती के साथ रिश्ते में था। युवती अपने भाई विशाल के साथ एक कपड़े की दुकान पर काम करती थी।
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भाई को लग गई रिश्ते की भनक
विशाल को जब अपनी बहन और रोहित के रिश्ते का पता चला, तो वह बुरी तरह भड़क गया। पर उसने चिल्लाया नहीं, उसने चालाकी से खेल खेला। रोहित को ब्लैकमेल करने लगा। गांव की इज्जत, लड़की की बदनामी और खुद की बहन के नाम पर वह रोहित को धमकियां देकर फायदा उठाने लगा। वो जानता था कि अगर अफेयर की बात गांव में फैलती, तो उसका काम, इज्जत, सब खत्म हो जाता। उसने बहुत बर्दाश्त किया। लेकिन एक दिन उसके भीतर का इंसान मर गया, और एक हत्यारे ने जन्म ले लिया। उसने विशाल को रास्ते से हटाने का दिन तय कर लिया। रोहित ने विशाल को कॉल किया। जरूरी बात करने के लिए अकेले में बुलाया। विशाल के आते ही रोहित ने गोली मारकर उसकी हत्या कर दी। उसके बाद रोहित ने पास के तालाब किनारे एक छोटा सा गड्ढा खोदा, लाश को गाड़ा, और वहां से खामोशी से निकल गया। उसे लगा, केस खत्म।
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लगातार हो रही बारिश के बाद लाश सड़ने से बचाने के लिए रोहित कुछ मजदूरों को लेकर वहां पहुंचा। शव को नमक में दबाने के लिए इलाके के दो मजदूर बबलू खाड़पा और सोनू परमार से 40 हजार रुपये में सौदा तय किया। इतनी बड़ी रकम सुन दोनों ने इस काम के लिए हां कर दी। उन्होंने शव को अच्छे से दफना कर आरोपी से 40 हजार लिए और चले गए। एक दिन दोनों मजदूरों बबलू और सोनू ने शराब के नशे में एक लाश को नमक दबाने के लिए 40 हजार मिलने की बात उगल दी। यह खबर किसी पुलिस के मुखबिर को मिल गई और उसने पुलिस को जानकारी दी। इसके बाद परत दर परत यह कहानी खुल गई। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
फिल्म दृश्यम की तरह बनाई पूरी प्लानिंग
रोहित परमार सिर्फ एक कंपाउंडर नहीं था। वह सिनेमा का शौकीन था। खासकर क्राइम फिल्मों का। और उसकी सबसे पसंदीदा फिल्म थी'दृश्यम'। जब विशाल ने उसकी पांच साल पुरानी प्रेम कहानी को हथियार बनाकर ब्लैकमेल करना शुरू किया, रोहित ने कानून नहीं, सिनेमा का रास्ता चुना। पूरी प्लानिंग की और 'दृश्यम' की तर्ज पर सबूतों को गुमराह करने का खेल शुरू हुआ।
विशाल की हत्या पहले ही हो चुकी थी। सुनसान जगह पर गोली मार कर, लाश तालाब किनारे दबा दी गई थी। लेकिन असली खेल शुरू हुआ उसके बाद। रोहित ने विशाल का मोबाइल लिया, और खुद ही इंदौर से सांवरिया सेठ दर्शन के लिए गया। वहीं से उसने विशाल के घर कुछ एमएमएस और मैसेज भेजे ताकि सबको लगे कि विशाल जिंदा है और कहीं बाहर गया है। उसने सोचा था कि अगर पुलिस लोकेशन निकालेगी, तो मोबाइल इंदौर दिखाएगा और केस भटक जाएगा।