Raja Raghuvanshi Murder: हनीमून पर हत्या, 790 पन्नों की चार्जशीट और पुलिस की एक गलती...सोनम रघुवंशी को ऐसे मिली जमानत

मेघालय की राजधानी शिलॉन्ग की एक अदालत ने चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में मुख्य आरोपी और उसकी पत्नी सोनम रघुवंशी को लगभग 11 महीने बाद जमानत पर रिहा कर दिया है।

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Shillong Court Grants Bail To Accused Wife Sonam Raghuvanshi In 'Honeymoon Murder' Case
हनीमून पर हत्या, 790 पन्नों की चार्जशीट और पुलिस की एक गलती...सोनम रघुवंशी को ऐसे मिली जमानत | Image: X

मेघालय की राजधानी शिलॉन्ग की एक अदालत ने चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में मुख्य आरोपी और उसकी पत्नी सोनम रघुवंशी को लगभग 11 महीने बाद जमानत पर रिहा कर दिया है। यह जमानत हाई प्रोफाइल केस में अचानक मिलने से सियासी और कानूनी दोनों स्तरों पर सवाल खड़े कर रही है, खासकर इस बात को लेकर कि गंभीर हत्या मामले में जमानत क्यों और कैसे मिली।

शिलॉन्ग की अतिरिक्त जिला न्यायाधीश दशलेन आर. खारबेंग की अदालत में चौथी जमानत सुनवाई के दौरान पासा बदला और सोनम को जमानत मिल गई। अदालत का मुख्य आधार यह था कि मेघालय पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के दस्तावेजों में धाराएं गलत लिख दीं। सोनम की गिरफ्तारी के मामले में जहां बीएनएस (बंगला नेशनल स्टेट अधिनियम) की धारा 103(1) लगानी थी, वहां पुलिस ने गलती से धारा 403(1) लगा दी, जो अपराध नहीं बल्कि “संपत्ति के दुरुपयोग” जैसे आरोप से जुड़ी है। इस गलत धारा के चलते अदालत ने उसकी गिरफ्तारी के आधार और उद्देश्य को स्पष्ट रूप से नहीं बताया माना और इसे उसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन कहा, जिस पर जमानत देना कानून के तहत जायज ठहराया गया।

गाजीपुर कोर्ट में कानूनी सहायता की अनुपस्थिति ने बढ़ाया विश्वासघात का आरोप

अदालत ने एक और बड़ी गड़बड़ी यह बताई कि 2 जून 2025 को जब सोनम को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर कोर्ट में पेश किया गया तब पुलिस के दस्तावेजों में यह नहीं दिख रहा था कि उसकी ओर से वहां किसी वकील ने कानूनी प्रतिनिधित्व किया या उसे कानूनी सहायता दी गई। इसे अदालत ने उसके मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के तौर पर लिया और तर्क दिया कि अगर उसे सही तौर पर कानूनी मदद और जानकारी उपलब्ध होती तो वह जल्द ही गिरफ्तारी के खिलाफ आपत्ति दर्ज करवा सकती थी।

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बचाव पक्ष का तर्क था कि न सिर्फ गिरफ्तारी ज्ञापन बल्कि जांच डायरी और अन्य दस्तावेजों में भी गलत धाराएं लिखी गईं, जिससे पुलिस की कार्य प्रक्रिया पर संवैधानिक और कानूनी विश्वसनीयता कमजोर हो गई।

जमानत के साथ लगाई गई शर्तें

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सोनम को जमानत देते हुए कोर्ट ने कड़ी शर्तें लगाईं। उसे सबूतों और गवाहों से दूर रहने, किसी तरह की छेड़छाड़ या प्रभावित करने से बचने को कहा गया है। शिलॉन्ग के अदालती अधिकार क्षेत्र से बिना अनुमति बाहर न जाने, हर निर्धारित पेशी पर कोर्ट में हाजिर होने और 50,000 रुपये का निजी मुचलका तथा दो जमानतदार पेश करने की शर्तें भी लागू हुईं, जो उसके पिता देवी सिंह ने इंदौर से आकर पूरी कीं।

चार्जशीट में क्या दिखता है? खूनी साजिश का विस्तृत नक्शा

सोनम को जमानत मिलने के बाद भी केस अभी चलने वाला है, क्योंकि मेघालय पुलिस ने पहले ही 790 पन्नों की चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस दस्तावेज में राजा रघुवंशी की हत्या की तारीख 23 मई 2025, जगह सोहरा के आसपास का खाली इलाका और मुख्य साजिशकर्ता के तौर पर सोनम रघुवंशी को नामजद किया गया है।

चार्जशीट के मुताबिक राजा की पत्नी सोनम और उसके प्रेमी राज कुशवाहा ने साजिश रची, जिसमें तीन कातिलों आकाश सिंह राजपूत, विशाल सिंह चौहान और आनंद कुर्मी को राजा को खत्म करने के लिए चुना गया था। अदालत के दस्तावेजों में बताया गया है कि 23 मई को दिन में विशाल ने तेजधार दाव से राजा पर पीछे से हमला शुरू किया, जिसके बाद आकाश और आनंद भी उसे धार देने के लिए आगे आए; जबकि सोनम मौका पर खड़ी रही और बाद में लाश को खाई में ठुकवाने में भी शामिल रही।

सबूतों का एक दृश्य नक्शा: सीसीटीवी, सिम कार्ड और कॉल डिटेल

मेघालय पुलिस की चार्जशीट में सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन, किराए की स्कूटी, स्टे होम की डिटेल्स और आनंद के नाम पर खरीदी गई सिम कार्ड, फोन कॉल डिटेल जैसे तमाम डिजिटल और फौरन्सिक सबूत शामिल हैं। इन सबूतों के आधार पर जांचकर्ताओं का दावा है कि सोनम और राज कुशवाहा ने गुवाहाटी और सोहरा के रास्ते, टाइमिंग और लोकेशन बहुत पहले तय कर रखी थी, ताकि अपराध के वक्त वहां न कोई गवाह रहे और न ही कोई अनपेड़ नज़दीकी आवाजाही।

केस पर अब क्या असर दिखेगा? दूसरे आरोपियों की जमानत की आशंका

सोनम जैसी मुख्य आरोपी को जमानत मिलने के बाद अन्य चार आरोपियों को भी राहत मिलने की संभावना तेज़ हो गई है। वकीलों का कहना है कि अब बचाव पक्ष यह तर्क दे सकता है कि अगर मामले की “मास्टरमाइंड” को भी जमानत दी जा सकती है तो बाकी आरोपियों के खिलाफ जो सबूत हैं, वे उतने मजबूत नहीं रहते।

इसके उलट राजा के परिवार ने इस फैसले को “अन्याय” और “जांच विफलता” का संकेत बताते हुए हाई कोर्ट में चुनौती देने और सीबीआई जांच की मांग तेज कर दी है। दूसरी तरफ पुलिस की तरफ से यह जोर दिया जा रहा है कि चार्जशीट और जांच डायरी मजबूत हैं और जमानत से ट्रायल प्रक्रिया पर फाइनल निर्णय प्रभावित नहीं होगा।

जमानत का मतलब पीड़ित की चुप्पी नहीं होना चाहिए

इस पूरे मामले में पुरुष आयोग की अध्‍यक्ष बरखा त्रेहन ने कहा, जब आरोपी अस्थायी रूप से ही सही, लेकिन आजाद हो जाए और पीड़ित हमेशा के लिए चला जाए, तब न्याय अधूरा सा लगने लगता है। राजा रघुवंशी मर्डर केस में सोनम रघुवंशी को जमानत मिलने की खबर ने न सिर्फ इंदौर को, बल्कि पूरे देश की संवेदनाओं को झकझोर दिया है।

उन्‍होंने कहा कि यह समझना जरूरी है कि जमानत बेगुनाही का प्रमाण नहीं होती, बल्कि एक कानूनी अधिकार है। अदालतें सबूतों, प्रक्रिया और कानून के आधार पर फैसला करती हैं। लेकिन इस मामले में जमानत के जो आधार सामने आए हैं, वे और भी गंभीर सवाल खड़े करते हैं।

राजा रघुवंशी के माता पिता के लिए न्याय किसी कानूनी तकनीक का नाम नहीं है। उनके लिए यह उस खाली कुर्सी का दर्द है, जहां उनका बेटा बैठता था। वह सन्नाटा है, जहां कभी हंसी गूंजती थी। वह सच है कि एक हनीमून, जो जीवन की नई शुरुआत होना चाहिए था, मौत में बदल गया। निष्पक्ष जांच और निष्पक्ष ट्रायल हर आरोपी का अधिकार है, लेकिन उतना ही अधिकार पीड़ित के परिवार का भी है कि उन्हें सच्चाई और न्याय मिले।

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Published By:
 Ankur Shrivastava
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