अपडेटेड 20 March 2026 at 23:46 IST

Surat News: ATM से नहीं निकला 10 हजार कैश, अब बैंक को लौटाने होंगे 3.28 लाख रुपये; पूरा मामला जान उड़ जाएंगे होश

Surat News: गुजरात के सूरत से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सबको चौंका दिया है। यहां एक ग्राहक को ATM से 10,000 रुपये न मिलने पर 9 साल बाद 3.28 लाख रुपये का मुआवजा मिला है।

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Surat ATM Transaction Fail News
Surat ATM Transaction Fail News | Image: Canva

Surat ATM Transaction Failed Case: गुजरात के सूरत से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सबको चौंका दिया है। एक शख्स 9 साल पहले ATM से महज 10,000 रुपये निकालने गया था, उसे अब बैंक की तरफ से 3.28 लाख रुपये मिलने जा रहे हैं। 

सूरत की कंज्यूमर कोर्ट ने बैंक ऑफ बड़ौदा को आदेश दिया है कि वह तकनीकी खामी को हल न करने और ग्राहक को परेशान करने के बदले मुआवजा चुकाए। 

क्या है यह पूरा मामला?

दरअसल, यह घटना 18 फरवरी 2017 की है। जब सूरत के उधना इलाके में रहने वाला एक ग्राहक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के ATM से 10,000 रुपये निकालने पहुंचा था। उसने मशीन में अपना कार्ड डाला और PIN दर्ज किया, लेकिन मशीन से न तो पैसे निकले और न ही कोई रसीद आई। 

लेकिन, ग्राहक को हैरानी तब हुई जब कुछ ही देर में उसके मोबाइल पर मैसेज आया कि खाते से 10,000 रुपये कट चुके हैं। ग्राहक ने तुरंत अपने बैंक में लिखित शिकायत दर्ज कराई, लेकिन बैंक ने उसकी नहीं सुनी। 

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RTI से जुटाई जानकारी और कोर्ट पहुंचा 

जब बैंक ने शिकायत के बावजूद पैसे वापस नहीं किए और न ही सफल ट्रांजैक्शन का कोई सबूत दिया, तो ग्राहक ने हार नहीं मानी। उसने RTI के जरिए उस ATM की CCTV फुटेज मांगी। मामला नहीं सुलझता देख, दिसंबर 2017 में उसने कंज्यूमर फोरम का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट में बैंक ऑफ बड़ौदा ने दलील दी कि ATM स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) का था, इसलिए जिम्मेदारी उनकी है। हालांकि, कोर्ट ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया।

कोर्ट ने लगाई फटकार

हालांकि सुनवाई के दौरान अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि कार्ड जारी करने वाले बैंक की यह प्राथमिक जिम्मेदारी है कि वह अपने ग्राहक की समस्या का समाधान करे। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि बैंक यह साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहा कि ट्रांजैक्शन सफल हुआ था। सबूतों के अभाव में बैंक की दलीलों को कमजोर माना गया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दो बैंकों के बीच तालमेल की कमी के कारण किसी आम आदमी को वित्तीय और मानसिक नुकसान नहीं पहुंचाया जा सकता।

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कैसे 10 हजार बन गए 3.28 लाख?

कंज्यूमर कोर्ट ने इस मामले में RBI के सख्त दिशा-निर्देशों का हवाला दिया और बताया कि अगर एटीएम से ट्रांजैक्शन फेल होता है और बैंक 5 दिनों के भीतर पैसा वापस नहीं करता, तो बैंक को ग्राहक को 100 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से हर्जाना देना होता है। ऐसे में कुल 3,288 दिनों की देरी हुई, जिसके लिए कोर्ट ने 3,28,800 रुपये का मुआवजा तय किया जाएगा। वहीं, बैंक को 10,000 रुपये की मूल राशि 9% वार्षिक ब्याज के साथ लौटानी होगी। साथ ही मानसिक उत्पीड़न के लिए 3,000 रुपये और कानूनी कार्यवाही के खर्च के लिए 2,000 रुपये अलग से देने होंगे।

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Published By : Kunal Verma

पब्लिश्ड 20 March 2026 at 23:44 IST