Naxalite Papa Rao: अमित शाह का मिशन सफल! मुकर्रर तारीख से पहले कुख्यात नक्सली कमांडर पापा राव ने 18 साथियों के साथ किया सरेंडर

Naxalite Papa Rao: छत्तीसगढ़ में सशस्त्र नक्सल आंदोलन को अब तक का सबसे बड़ा झटका लगा है। खूंखार नक्सली लीडर पापा राव ने अपने 17 साथियों और भारी मात्रा में हथियारों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया है।

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Naxalite Papa Rao Surrender
Naxalite Papa Rao Surrender | Image: Social Media

Naxal Free Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग से एक ऐसी खबर आई है जो राज्य के इतिहास में शांति के नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है। दशकों तक सुरक्षाबलों की आंखों में धूल झोंकने वाले 25 लाख रुपये के इनामी नक्सली कमांडर पापा राव ने आखिरकार हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है।

18 साथियों के साथ सरेंडर 

पापा राव ने अपने 18 साथियों के साथ आत्मसमर्पण करने का ऐलान किया है, जिनमें 8 महिलाएं भी शामिल हैं। इसके साथ ही नक्सलियों की सबसे खूंखार मानी जाने वाली 'दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी' (DKSZC) का प्रभाव लगभग समाप्त हो गया है। पापा राव ने स्पष्ट किया कि अब वह संविधान के दायरे में रहकर लोकतांत्रिक तरीके से जनता की आवाज उठाएगा।

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राज्य के उपमुख्यमंत्री और गृहमंत्री विजय शर्मा ने इस सफलता को ऐतिहासिक बताया है। उन्होंने जानकारी दी कि इन नक्सलियों के पास से 8 AK-47, SLR और इंसास जैसे घातक हथियार बरामद हुए हैं। विजय शर्मा के मुताबिक, पापा राव के सरेंडर के बाद अब तकनीकी रूप से छत्तीसगढ़ में उस स्तर का कोई भी बड़ा नक्सली नेता सक्रिय नहीं रह गया है। 

उन्होंने कवर्धा में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि राज्य अब 'लाल आतंक' के साये से बाहर निकल चुका है। पापा राव वही शख्स है जो 2010 के ताड़मेटला हमले जैसे कई बड़े हमलों का मास्टरमाइंड रहा है।

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क्या तय वक्त से पहले मुक्त होगा छत्तीसगढ़?

केंद्र और राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ को सशस्त्र नक्सलवाद से मुक्त करने के लिए 31 मार्च 2026 की डेडलाइन तय की थी। हालांकि, जिस तरह से पापा राव और उनके साथियों ने हथियार डाले हैं, उससे यह उम्मीद जग गई है कि यह लक्ष्य समय से पहले ही हासिल कर लिया जाएगा। 

आंकड़ों पर गौर करें तो जनवरी 2024 से अब तक करीब 2871 नक्सलियों ने पुनर्वास नीति का लाभ उठाते हुए सरेंडर किया है। वर्तमान में सशस्त्र नक्सलियों की संख्या घटकर 50 से भी कम रह गई है। पापा राव के इस फैसले के बाद बचे हुए कुछ अन्य कमांडर जैसे हेमला बिच्चा और सोढ़ी केशा पर भी मुख्यधारा में लौटने का दबाव बढ़ गया है।

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सरकार की प्रभावी पुनर्वास नीति और सुरक्षाबलों के बढ़ते दबाव का ही परिणाम है कि अब नक्सली संगठन के बड़े चेहरे वर्दी उतारकर सामान्य जीवन जीने की इच्छा जाहिर कर रहे हैं। 

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Published By:
 Sujeet Kumar
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