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Updated May 14th, 2024 at 17:18 IST

शराब घोटाले में ED का दावा- साजिश थी AAP के लिए रिश्वत से पैसे वसूले जाएं, सिसोदिया ने निभाई भूमिका

दिल्ली HC मंगलवार को मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहा था। इस दौरान ईडी ने पक्ष रखते हुए तथाकथित शराब घोटाले के पीछे साजिश का दावा किया।

Reported by: Digital Desk
Edited by: Dalchand Kumar
manish sisodia
मनीष सिसोदिया | Image:PTI/File
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Delhi Liquor Scam: प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने दिल्ली के तथाकथित शराब घोटाला केस में आम आदमी पार्टी के दिग्गज नेता मनीष सिसोदिया की भूमिका लेकर एक बार फिर बड़ा दावा किया है। मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान ईडी ने दावा किया कि गलत तरीके से कमाए गए पैसे को चुनावी उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया गया। ईडी ने कहा कि पूरी व्यवस्था को नुकसान पहुंचाया गया है और इससे निपटना होगा। एजेंसी ने मंगलवार को हाईकोर्ट में मनीष सिसोदिया की जमानत का विरोध किया और कहा कि इस मामले में देरी जमानत देने का एकमात्र आधार नहीं हो सकती है।

दिल्ली हाईकोर्ट मंगलवार को मनीष सिसोदिया की जमानत वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा था। इस दौरान ईडी ने अपना पक्ष रखते हुए तथाकथित शराब घोटाले के पीछे साजिश का दावा किया। ईडी ने कहा कि साजिश ये थी कि आम आदमी पार्टी के लिए रिश्वत के जरिए पैसे वसूले जाएं। इसमें मनीष सिसोदिया ने अहम भूमिका निभाई। सिसोदिया दिल्ली के डिप्टी सीएम और आम आदमी पार्टी के एक प्रमुख व्यक्ति थे। ईडी ने कहा कि विजय नायर की रिश्वत देने वालों से पहचान थी। नायर ने कंपनियों को भरोसा दिया था कि नीतिगत लाभ दूंगा बशर्ते आप हमें पार्टी के चंदे के लिए 100 करोड़ रुपये दें। इसलिए मनीष सिसोदिया ने एक्सपर्ट कमेटी की उस सिफारिश को खारिज कर दिया, जिसमें सरकार की तरफ से थोक बिक्री को नियंत्रित करने की बात थी। सिसोदिया ने जनता की स्वीकृति का दिखावा किया और ईमेल पर सुझाव मंगाए।

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'11 महीने में 192 करोड़ का मुनाफा'

ईडी ने कहा कि सिसोदिया ने सुनिश्चित किया कि इंडोस्पिरिट्स को एल1 लाइसेंस मिले। इसलिए उन्होंने दिनेश अरोड़ा को विजय नायर के साथ मिलकर काम करने का निर्देश दिया। एजेंसी ने दावा किया कि नई शराब नीति जब तक लागू रही, तब तक इंडोस्पिरिट्स को इन 11 महीने के दौरान 192 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाने में मदद मिली।

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सिसोदिया ने क्षतिग्रस्त फोन नहीं दिखाया- ED

एजेंसी का दावा है कि सिसोदिया ने 22 जुलाई 2022 को अपना फोन बदल दिया, जिस दिन दिल्ली के उपराज्यपाल की तरफ से मामले में सीबीआई जांच की सिफारिश की खबर मीडिया में आई थी। वो फोन अभी तक बरामद नहीं हुआ है। हमारे पास ये भी बयान है कि सिसोदिया ने ये सुनिश्चित करने के लिए पुराने कैबिनेट नोट को नष्ट कर दिया, ताकि कोई सबूत ना छूट जाए। ED ने कहा कि फोन को लेकर सिसोदिया बस इतना कहते हैं कि ये क्षतिग्रस्त हो गया था। लेकिन उन्होंने क्षतिग्रस्त फोन भी नहीं दिखाया। फिलहाल मनीष सिसोदिया की जमानत पर दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है।

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यह भी पढ़ें: रामदेव-बालकृष्ण पर अवमानना का केस चलेगा या नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षित रखा आदेश

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Published May 14th, 2024 at 17:18 IST

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