Mauni Amavasya: मध्य प्रदेश में मौनी अमावस्या पर लाखों लोगों ने नदियों में डुबकी लगाई

मध्य प्रदेश में मौनी अमावस्या के अवसर पर बुधवार को लाखों श्रद्धालुओं ने नर्मदा, शिप्रा और अन्य प्रमुख नदियों में आस्था की पवित्र डुबकी लगाई।

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Mauni Amavasya
Lakhs of people took a dip in rivers on Mauni Amavasya in Madhya Pradesh | Image: Freepik

मध्य प्रदेश में मौनी अमावस्या के अवसर पर बुधवार को लाखों श्रद्धालुओं ने नर्मदा, शिप्रा और अन्य प्रमुख नदियों में आस्था की पवित्र डुबकी लगाई। नर्मदापुरम के तहसीलदार देवशंकर धुर्वे ने बताया कि इस वर्ष यहां डुबकी लगाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या तुलनात्मक रूप से कम है, क्योंकि कई लोग महाकुंभ के दौरान गंगा नदी में पवित्र स्नान के लिए उत्तर प्रदेश के प्रयागराज गए हैं।

हिंदुओं द्वारा त्रिवेणी संगम (गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम) को सबसे पवित्र माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि महाकुंभ के दौरान और खासतौर पर मौनी अमावस्या जैसी विशेष स्नान तिथियों पर इसमें डुबकी लगाने से लोगों के पाप धुल जाते हैं एवं उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है।

धुर्वे ने बताया कि नर्मदापुरम में 25 हजार से अधिक श्रद्धालु नर्मदा नदी के विभिन्न घाटों पर एकत्र हुए और तड़के उन्होंने यहां पवित्र डुबकी लगाई। खंडवा जिले में ज्योतिर्लिंगों में से एक ओंकारेश्वर में भी भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने नर्मदा नदी में पवित्र डुबकी लगाई।

ओंकारेश्वर के पुजारी पंडित ओमप्रकाश नागर ने दावा किया है कि सुबह 25 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने नदी में स्नान किया। उन्होंने बताया कि सुबह से 15 हजार से अधिक लोगों ने ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की पूजा की। जिलाधिकारी नीरज सिंह ने बताया कि उज्जैन में शिप्रा नदी में पवित्र स्नान के लिए श्रद्धालु तड़के से ही रामघाट और मंगलनाथ घाट सहित विभिन्न स्थानों पर एकत्रित होने लगे थे।

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उन्होंने बताया कि सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और श्रद्धालुओं के स्नान स्थलों पर स्वयंसेवकों एवं नौकाओं को तैनात किया गया है। स्थानीय मंदिर के एक पुजारी मनोज शर्मा ने बताया कि बैतूल जिले के मुलताई में ताप्ती नदी के उद्गम स्थल पर स्नान करने के लिए एक हजार से अधिक लोग पहुंचे हैं।

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स्थानीय मंदिर के पुजारी आचार्य गिरजाशंकर अत्रे ने बताया कि खरगोन जिले के बड़वाह में नर्मदा नदी के नावघाट खेड़ी में भी हजारों श्रद्धालुओं ने पवित्र डुबकी लगाई। उन्होंने बताया कि लोगों ने अपने दिवंगत पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए ‘तर्पण’ अनुष्ठान किया।

Published By:
 Ritesh Kumar
पब्लिश्ड