'मैं डरता नहीं, ऐसी घटनाएं मुझे...', अंडा फेंके जाने पर भड़के TMC विधायक कुणाल घोष, ममता बनर्जी के घर के बाहर हुआ था हमला
West Bengal: TMC विधायक कुणाल घोष पर हमला तब हुआ जब वह TMC सुप्रीमो चेयरपर्सन ममता बनर्जी के आवास से बाहर निकल रहे थे। एक स्थानीय युवक ने उन पर अंडा फेंका।
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TMC MLA Kunal Ghosh Statement: तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेताओं पर हमले का सिलसिला थम नहीं रहा है। एक के बाद एक कई नेता निशाने पर आ रहे हैं। ताजा मामला टीएमसी विधायक कुणाल घोष से जुड़ा है, जिस पर सोमवार (15 जून) पर अंडा फेंका गया। उन्होंने भड़कते हुए इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि ये BJP के उपद्रवी थे।
उन पर हमला तब हुआ जब वह TMC सुप्रीमो चेयरपर्सन ममता बनर्जी के आवास से बाहर निकल रहे थे। तभी एक स्थानीय युवक ने अंडा फेंका। इस दौरान वे खुद को बचाते नजर आए।
‘मैंने अपनी आंख बचा ली, वरना…’
इस पर कुणाल घोष ने बरसते हुए कहा, "मैं ममता बनर्जी के घर एक मीटिंग में शामिल होने आया था। मीटिंग के बाद जब मैं बाहर निकल रहा था, तो रोज की तरह पत्रकारों ने मुझसे इंटरव्यू के लिए कहा। इसलिए, मैं उनके सवालों का जवाब दे रहा था। मेरा पूरा ध्यान पत्रकारों पर था। उसी समय, दो लड़कों ने मुझे निशाना बनाया और मुझ पर अंडा फेंका। उनमें से एक ने अंडा फेंका। मैंने अपनी आंख बचा ली, वरना वह खराब हो सकती थी।"
TMC विधायक ने आगे कहा कि ममता बनर्जी को Z कैटेगरी की सुरक्षा मिलती है, फिर भी उनके घर के पास ऐसी घटना हुई; यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। इसे जनता का गुस्सा न कहें, वे BJP के दो उपद्रवी थे। मैं किसी से नहीं डरता। उस समय पुलिस मौजूद थी, लेकिन उन्होंने कोई कदम नहीं उठाया। मैंने पुलिस कमिश्नर और दूसरे अधिकारियों को शिकायत दी है। मैं एक बात कहना चाहता हूं कि इस तरह की घटना मुझे रोक नहीं सकती।
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हमला करने वाले ने क्या कहा?
कुणाल घोष पर अंडा फेंककर हमला करने की जिम्मेदारी चंदन नाम के एक स्थानीय युवक ने ली। उसने कहा कि इन लोगों पर बहुत जुल्म किए हैं। कुणाल घोष भी कम नहीं हैं। इसलिए, वे इसी के लायक हैं। उन्होंने हमारे साथ बहुत बुरा किया है।
इससे पहले TMC के वरिष्ठ नेता और विधायक मदन मित्रा के साथ भी ऐसी ही घटना हुई थी। उत्तर 24 परगना जिले के कमरहाटी के अरियादह इलाके में कथित तौर पर उनके काफिले पर अंडे फेंके गए थे और उनके खिलाफ नारेबाजी भी की गई थी। बढ़ते विरोध के बीच मदन मित्रा के काफिले को वहां से निकलना पड़ा था।