कोटा महंत देवानंद महाराज की सुपारी देकर कराई हत्या, मठ की संपत्ति को लेकर था विवाद, विरोधी गुट का अध्यक्ष निकला मास्टरमाइंड, सनसनीखेज खुलासे
कोटा के चंद्रेसल मठ के महंत देवानंद महाराज हत्याकांड की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। 5 जून की रात हुई इस हत्या के पीछे कोई रंजिश नहीं, बल्कि मठ की करोड़ों की बेशकीमती संपत्ति और ट्रस्ट पर वर्चस्व की लड़ाई सामने आई है।
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राजस्थान के कोटा में स्थित चंद्रेसल मठ के महंत देवानंद महाराज की हत्या की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। इस ब्लाइंड मर्डर केस ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी, लेकिन कोटा पुलिस ने कार्रवाई करते हुए इस साजिश के पीछे छिपे काले चेहरों को बेनकाब कर दिया है। पुलिस के अनुसार, इस पूरी वारदात के पीछे धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये की मठ की संपत्ति और वर्चस्व की लड़ाई थी।
सुपारी देकर करवाई गई हत्या
कोटा शहर पुलिस अधीक्षक तेजस्विनी गौतम ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि महंत देवानंद की हत्या एक सोची-समझी साजिश का परिणाम थी। जांच में सामने आया है कि इस हत्याकांड का मास्टरमाइंड कोई और नहीं, बल्कि मठ के ही विरोधी गुट का कथित अध्यक्ष संतोष कुमार राय है। संतोष ने महंत को रास्ते से हटाने के लिए एक लाख रुपये की सुपारी दी थी।
क्या था पूरा मामला?
चंद्रेसल मठ की बेशकीमती जमीनों, ट्रस्ट के संचालन और नई कार्यकारिणी के गठन को लेकर पिछले काफी समय से विवाद चल रहा था। पुलिस की पूछताछ में यह स्पष्ट हुआ कि संतोष कुमार राय मठ की संपत्ति पर अपना पूरा नियंत्रण चाहता था। इसी लालच में उसने पेशेवर बदमाशों के साथ मिलकर हत्या की योजना बनाई। घटना 5 जून की रात की है। आरोपियों ने पहले पूरी तैयारी और रेकी की और फिर मौका देखते ही धारदार हथियारों से महंत देवानंद महाराज पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। जिससे उनके मौके पर ही मौत हो गई।
पुलिस ने किया विशेष टीम का गठन
इस मामले के तह तक पहुंचने के लिए पुलिस ने विशेष टीमों का गठन किया था। जिसमें 100 से अधिक पुलिसकर्मी, साइबर सेल, डीएसटी और एसआईटी शामिल थे। पुलिस ने मुख्य साजिश संतोष कुमार और आरोपी पुष्पेंद्र सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। हालांकि, इस हत्याकांड में शामिल अन्य आरोपी आदित्य वर्मा, अंकित बैरवा और उनके साथी अभी भी फरार हैं।