अधूरी रह गई केतन के दादा की एक ख्वाहिश, निधन से पहले सिया-चेतन को लेकर की थी ये मांग, पोते की हत्या के बाद बुआ-फूफा पर किया था बड़ा खुलासा
सिया ने अपने बॉयफ्रेंड के साथ मिलकर मंगेतर केतन को लोहगढ़ किले से गहरी खाई में धकेल दिया था, जिससे केतन की मौत हो गई थी। देवीचंद अग्रवाल पोते को खोने का गम बर्दाश्त नहीं कर पाए। उन पर पोते की हत्या का गहरा मानसिक असर पड़ा था।
- भारत
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Ketan Grandfather Dies: अग्रवाल परिवार अभी जवान बेटे केतन को खोने के शोक से उबर भी नहीं पाया था कि अब उन पर दुखों का एक और पहाड़ टूट पड़ा। पोते के निधन का गहरा सदमा दादा देवीचंद अग्रवाल बर्दाश्त नहीं कर सके और उन्होंने भी दम तोड़ दिया। इस दोहरे हादसे से पूरा परिवार पूरी तरह टूटकर बिखर गया है। इस बीच, देवीचंद अग्रवाल का करीब एक महीने पुराना इंटरव्यू वायरल हो रहा है जिसमें उनकी हिम्मत टूटती दिखाई दी थी। इतना ही नहीं, अपने बुढ़ापे के सहारे को खोने के बाद उनका रो-रोकर बुरा हाल था।
केतन अग्रवाल के दादा ने फफफ-फफककर रोते हुए कहा था कि उनके बुढ़ापे का सहारा चला गया। इस दौरान उन्होंने सिया गोयल और उसके आशिक चेतन चौधरी के लिए मौत की सजा की मांग की थी। उन्होंने यह भी बताया था कि अग्रवाल परिवार सिया के परिवार को करीब 3 दशकों से ज्यादा समय से जानता था। इसके बावजूद उन्होंने सिया की खौफनाक साजिश की भनक तक नहीं लग पाई।
'35 सालों की यारी थी, और कितनी चौकसी करते?'
25 साल के मृतक के दादा ने रोते हुए कहा था, 'हमारे परिवार के लड़की वालों से करीब 35 सालों से संबंध हैं। सालों का याराना और दोस्ती है, इससे ज्यादा और क्या चौकसी (निगरानी) करेंगे? इससे ज्यादा चौकसी तो नहीं कर सकते?'
बुआ-फूफा को लेकर क्या कहा था?
इतना ही नहीं उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा था, 'इस पूरे खेल के बारे में सिया के परिवार को मालूम था। उन्हें पता था कि उनकी बच्ची का किसी के साथ लव अफेयर है। इसमें सबसे ज्यादा उसकी बुआ रेणु और फूफा नरेंद्र का हाथ है। इन दोनों ने जोर देकर रिश्ता करवाया।' उन्होंने मुझे कई दफा यकीन दिलाया कि चिंता न करूं, बहुत अच्छी लड़की है। बहुत शांत लड़की है। इसके लिए वे लोग जवाबदार हैं।'
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देवीचंद अग्रवाल ने आगे रुंधे गले से कहा कि आज कोई भी कुछ बोलने के तैयार नहीं है। मैं तड़प रहा हूं कि मेरे बुढ़ापे का सहारा चला गया। उन्होंने मुख्यमंत्री और जज साहब से सिया और चेतन के लिए मौत की सजा की मांग की थी। उनका कहना था कि ये दोनों बचने नहीं चाहिए।
केतन के दादा का कैसे हुआ निधन?
सूत्रों के मुताबिक, देवीचंद अग्रवाल की कुछ समय पहले ही हृदय से जुड़ी बड़ी सर्जरी हुई थी। तभी से उनकी सेहत में उतार-चढ़ाव बना हुआ था। इसी बीच अचानक उनके पोते केतन की हत्या से उन्हें गहरा सदमा लगा था। ऐसे में उनकी तबीयत बिगड़ती चली गई।
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बताया जा रहा है कि करीब दो दिन पहले उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें पुणे के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत गंभीर होने के कारण उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर शिफ्ट कर दिया गया। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की तमाम कोशिश की, लेकिन शनिवार रात 71 की उम्र में उनका निधन हो गया।