हर-हर महादेव...विधि-विधान के साथ खुले केदारनाथ धाम के कपाट; शिव के जयघोष से गूंज उठी घाटी; 51 क्विंटल फूलों से हुआ मंदिर का भव्य शृंगार
केदारनाथ धाम के कपाट आज सुबह आठ बजे शुभ मुहूर्त में विधि-विधान और पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। धाम के कपाट खुलने के समय केदारनाथ मंदिर को 51 क्विंटल ताजे गेंदे के फूलों से सजाया गया था।
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केदारनाथ धाम के कपाट आज सुबह आठ बजे शुभ मुहूर्त में विधि-विधान और पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। धाम के कपाट खुलने के समय केदारनाथ मंदिर को 51 क्विंटल ताजे गेंदे के फूलों से सजाया गया था। सीएम पुष्कर सिंह धामी खुद केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के साक्षी बने। कपाट खुलने को लेकर देश-विदेश से पहुंचे भक्तों में भारी उत्साह देखा गया। बाबा केदार के जयकारों से पूरा धाम गुंजायमान है।
देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु पहले ही धाम पहुंच चुके थे और कपाट खुलने के इस अद्भुत क्षण साक्षी बने।इससे पहले बाबा केदार की पंचमुखी चल विग्रह उत्सव डोली मंगलवार शाम लगभग 4:30 बजे केदारनाथ धाम पहुंची। ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ से रवाना हुई यह डोली 17 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा तय करते हुए जंगलचट्टी, रामबाड़ा, लिनचोली और बेस कैंप से होकर केदारपुरी पहुंची।
पीएम मोदी के नाम हुई पहली पूजा
पहले दिन बड़ी संख्या में भक्तों ने अखंड ज्योति के दर्शन करने का भी सौभाग्य प्राप्त किया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के हाथों मंदिर में पहली पूजा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से की गई। उन्होंने विश्व कल्याण के लिए भगवान की पूजा की। बदरी-केदार मंदिर समिति ने हर यात्री को बेहतर दर्शन के लिए हर संभव प्रयास किए हैं। साथ ही मंदिर में वीडियो, रील और अनावश्यक व्यवधान पैदा करने वाले लोगों पर भी कड़ी निगरानी रखी जाएगी।
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हिंदू धर्म के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में से एक केदारनाथ धाम
केदारनाथ मंदिर हिंदू धर्म के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में से एक है और यह भगवान भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल है। हर वर्ष सर्दियों के बाद जब हिमालय की वादियों में बर्फ पिघलने लगती है, तब श्रद्धालुओं के लिए केदारनाथ धाम के कपाट खोल दिए जाते हैं। यह अवसर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा और आस्था का अद्भुत संगम भी दिखाता है।
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भाई दूज के दिन बंद होते हैं केदारनाथ के कपाट
कपाट बंद होने की प्रक्रिया भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। दीपावली के बाद भाई दूज के दिन कपाट बंद कर दिए जाते हैं और भगवान की डोली फिर से उखीमठ लौट जाती है। इस दौरान पूरे क्षेत्र में एक विशेष प्रकार की श्रद्धा और भावुकता देखने को मिलती है।