तुर्की कांग्रेस ऑफिस मामले में अर्नब गोस्वामी के खिलाफ FIR रद्द, कर्नाटक हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के एडिटर इन चीफ और देश के जानेमाने पत्रकार अर्नब गोस्वामी (Arnab Goswami) को कर्नाटक हाईकोर्ट (Karnataka High Court) से बड़ी राहत मिली है।

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Karnataka High Court
Karnataka High Court | Image: File

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को भाजपा रिपब्लिक टीवी के एडिटर इन चीफ और देश के जानेमाने पत्रकार अर्नब गोस्वामी के खिलाफ टीवी शो में कथित रूप से किए गए झूठे दावे के संबंध में दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया, जिसमें कहा गया था कि तुर्की का इस्तांबुल कांग्रेस सेंटर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अंतरराष्ट्रीय कार्यालय है। न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना की सिंगल बेंच ने गोस्वामी द्वारा दायर आपराधिक याचिकाओं को स्वीकार करते हुए भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 192 (दंगा भड़काने के इरादे से उकसाना) और 352 (शांति भंग करने के लिए जानबूझकर अपमान करना) के तहत दर्ज कार्यवाही को रद्द कर दिया। इससे पहले न्यायालय ने एक अंतरिम आदेश में इस मामले में आगे की जांच पर रोक लगा दी थी।

आपको बता दें कि यह विवाद उस वक्त शुरू हुआ जब सोशल मीडिया और टीवी पर यह दावा किया गया कि कांग्रेस का तुर्की में एक राजनीतिक कार्यालय है। कांग्रेस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह एक “आपराधिक रूप से प्रेरित अभियान” है, जिसका उद्देश्य पार्टी को बदनाम करना और राष्ट्रीय सुरक्षा को नुकसान पहुंचाना है, खासकर जब भारत और तुर्की के बीच संबंध पहले से तनावपूर्ण हैं। कोर्ट ने जांच और संबंधित चीजों की छानबीन के बाद पूरे मामले को प्रोपेगेंडा बताते हुए FIR को खारिज कर दिया है।

कांग्रेस की शिकायत पर दर्ज हुई थी एफआईआर

भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) के कानूनी प्रकोष्ठ के प्रमुख श्रीकांत स्वरूप बी एन ने बेंगलुरु के हाई ग्राउंड्स पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। आरोप लगाया गया कि यह जानबूझकर फैलाई गई फर्जी खबर है जिसका उद्देश्य कांग्रेस पार्टी को बदनाम करना, सांप्रदायिक/राष्ट्रीय भावनाएं भड़काना और लोक शांति भंग करना है। इसके बाद पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 192 (दंगा भड़काने के इरादे से उकसाना) और धारा 352 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना) के तहत एफआईआर दर्ज की थी।

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इस विवाद के तूल पकड़ने पर रिपब्लिक टीवी की ओर से कहा गया था कि डिजिटल डेस्क के एक कर्मचारी से तकनीकी गलती के कारण यह गलत तस्वीर वीडियो में जुड़ गई थी, जिसे बाद में हटा दिया गया था और चैनल ने इस पर खेद जताते हुए शुद्धि-पत्र भी जारी किया था।

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Published By:
 Ankur Shrivastava
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