J&K: कड़ी सुरक्षा के बीच श्रीनगर के पंथा चौक से अमरनाथ यात्रा के लिए नया जत्था रवाना
अमरनाथ यात्रा के लिए श्रद्धालुओं का एक और जत्था आज सुबह ( रविवार) कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच श्रीनगर के पंथा चौक आधार शिविर से रवाना हुआ है।
- भारत
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Amarnath Yatra: जम्मू-कश्मीर में अमरनाथ यात्रा जारी है, अमरनाथ यात्रा के लिए श्रद्धालुओं का एक और जत्था आज सुबह ( रविवार) कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच श्रीनगर के पंथा चौक आधार शिविर से रवाना हुआ है। इस जत्थे में बड़ी संख्या में तीर्थयात्री शामिल हैं, जो बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए उत्सुकता से आगे बढ़े।
सुरक्षा बलों ने यात्रा मार्ग पर कड़ी निगरानी रखी हुई है, ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। वहीं, यात्रा के सुचारू संचालन के लिए प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए हैं, जिससे श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के अपनी यात्रा पूरी कर सकें।
अमरनाथ यात्रा के लिए जत्था रवाना
दक्षिण कश्मीर हिमालय स्थित अमरनाथ गुफा मंदिर में बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए शुक्रवार को भी 390 से ज्यादा श्रद्धालुओं का एक नया जत्था को रवाना हुआ था। अधिकारियों ने बताया कि, 'केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और पुलिस की कड़ी सुरक्षा के बीच भगवती नगर आधार शिविर से 14 वाहनों के काफिले में 398 तीर्थयात्रियों का 42वां जत्था तड़के तीन बजकर 26 मिनट पर रवाना हुआ।'
इन सभी तीर्थयात्रियों ने गांदरबल के 14 किलोमीटर के दुरूह बालटाल मार्ग को चुना। इस साल अब तक पांच लाख से ज्यादा तीर्थयात्री बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं। यात्रा 29 जून को शुरू हुई और 19 अगस्त को खत्म होगी। शुक्रवार सुबह 730 तीर्थयात्री सीमावर्ती जिले पुंछ स्थित प्राचीन बूढ़ा अमरनाथ मंदिर के लिए रवाना हुए। यह यात्रा सात अगस्त को शुरू हुई जो 20 अगस्त तक जारी रहेगी।
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अमरनाथ का नाम अमरनाथ क्यों पड़ा?
मान्यता है कि एक बार पार्वती मां भगवान ने शिव से अमृत कथा जानने की इच्छा जताई। तब भगवान शिव ने माता पार्वती को उस गुफा में अमृत कथा सुनाई। कहते हैं वह कथा माता पार्वती के अलावा कबूतर के जोड़े ने भी सुनी थी इसलिए वह अमर हो गए और उस गुफा का नाम कथा के साक्षी होने के कारण अमरनाथ पड़ा। श्रद्धालु दावा करते हैं कि आज भी उस गुफा में कबूतर के जोड़े के दर्शन होते हैं।
मान्यता है कि भगवान शिव ने उस गुफा में प्रवेश करने से पहले नंदी, मां गंगा, चंद्रमा आदि का त्याग किया था। वहीं महागुण पर्वत पर भगवान गणेश को बैठाया था, जिससे गुफा में कोई अन्य प्रवेश न कर सके। उसके बाद भगवान शिव ने नंदी का त्याग किया, जिसका नाम पड़ा पहलगांव। वहीं उन्होंने जहां चंद्रमा का त्याग किया, उसका नाम पड़ा चंदनवाड़ी, जहां उन्होंने सर्प का त्याग किया, उसका नाम पड़ा शेषनाग और अपनी जटाओं से मां गंगा का त्याग किया, उसका नाम पड़ा पंचतरणी। इस तरह भगवान शिव ने अमरनाथ की गुफा में प्रवेश किया।