मस्जिद अच्छी स्थिति में, बाहरी हिस्से पर पेंट उखड़ा... संभल की शाही जामा मस्जिद पर ASI ने रिपोर्ट में क्या-क्या बताया?
सूत्रों के मुताबकि, रिपोर्ट में ASI ने कहा कि संभल की शाही जामा मस्जिद में पेंट की जरूरत नहीं है। इलाहाबाद हाईकोर्ट अब ASI की रिपोर्ट के बाद अपना फैसला देगा।
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Sambhal Shahi Jama Masjid: संभल की शाही जामा मस्जिद को लेकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI ने अपनी रिपोर्ट तैयार करके इलाहाबाद हाईकोर्ट में पेश कर दी है। रमजान से पहले संभल की जामा मस्जिद की पेंटिंग को लेकर विवाद है। पिछले दिन इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एएसआई को निर्देश दिया था कि वो शाही जामा मस्जिद का निरीक्षण करें और बताएं कि रंगाई-पुताई की जरूरत है या नहीं। इसके अगले दिन ही ASI ने अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश कर दी है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देश के बाद ही तीन सदस्यीय टीम ने गुरुवार को संभल मस्जिद का दौरा किया था। भारतीय पुरातत्व विभाग की टीम ने पूरी मस्जिद का अंदर से और बाहर से सर्वेक्षण किया। जामा मस्जिद के बाहर धरणी कूप को भी देखा। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के तहत एएसआई को संयुक्त महानिदेशक मदन सिंह चौहान, निदेशक (स्मारक) जुल्फेगर अली और मेरठ सर्कल के सुपरिटेंडिंग आर्कियोलियजिस्ट विनोद सिंह रावत को मस्जिद सर्वे के लिए नियुक्त किया था। रिपोर्ट में ASI ने बताया है कि संभल की शाही जामा मस्जिद में पेंट की जरूरत नहीं है।
ASI की रिपोर्ट में क्या-क्या कहा गया?
एएसआई ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि आधुनिक इनेमल पेंट अभी भी अच्छी स्थिति में है और इसे फिर से पेंट करने की कोई जरूरत नहीं लगती है। हालांकि स्मारक (मस्जिद) के बाहरी हिस्से में पेंट के उखड़ने के कुछ निशान हैं, लेकिन इस स्थिति को फिलहाल तुरंत ठीक करने की जरूरत नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, पूरा स्मारक (संभल मस्जिद) अच्छी स्थिति में है। हालांकि एंट्री गेट पर, नमाज हॉल के पीछे और उत्तरी हिस्से में कुछ जगह पेंट हटने के निशान दिखते हैं।
एएसआई रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि पहले मस्जिद में रिपेयर और रिनोवेशन के काम किए गए थे, जिसमें स्मारक (मस्जिद) के फर्श को पूरी तरह से टाइलों और पत्थरों से बदला गया। इसके अलावा मस्जिद के अंदरूनी हिस्से को सुनहरे, लाल, हरे और पीले जैसे रंगों के इनेमल पेंट की मोटी परतों से रंगा गया, जो स्मारक की मूल सतह को छिपाते हैं।
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संभल की शाही मस्जिद को लेकर नया विवाद क्या है?
संभल की शाही जामा मस्जिद प्राचीन स्मारक संरक्षण अधिनियम-1904, प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल और अवशेष अधिनियम-1958 के प्रावधानों के तहत संरक्षित स्मारक घोषित है। हालांकि मस्जिद कमेटी की तरफ शाही जामा मस्जिद की देखरेख की जाती है और हर साल रमजान से पहले रंग रोगन और पुताई का काम करवाया जाता है। इसको लेकर नया विवाद ये है कि रमजान से पहले मुस्लिम पक्ष शाही जामा मस्जिद की रंगाई पुताई के मामले को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा।
इस साल संभल में विवाद होने के बाद रंगाई पुताई के काम की इजाजत नहीं मिली। मस्जिद कमेटी का कहना है कि हर साल सफाई पुताई हम करते हैं। फिर भी हमने इस साल स्थानीय प्रशासन को पत्र लिखे और एएसआई को भी लिखे। किसी की भी तरफ से जवाब नहीं आया। तब हमें अदालत की शरण लेनी पड़ी। फिलहाल इस मामले में हाईकोर्ट ने रंगाई पुताई की इजाजत नहीं दी है।