ISRO ने फिर रचा इतिहास, GSLV-F17 के साथ अंतरिक्ष में भेजा ‘Naughty Boy’,सैटेलाइट EOS-05 सफतापूर्वक लॉन्च; सीमा पर रखेगा दुश्मन पर पैनी नजर

ISRO ने सतीश धवन स्पेस सेंटर के दूसरे लॉन्च पैड से GSLV-F17/EOS-05 मिशन को सफलतापूर्वक लॉन्च किया।

  • Facebook Share Icon
  • Twitter Share Icon
  • WhatsApp Share Icon
 
Follow : Google News Icon
‘Naughty Boy’ GSLV-F17 Is Back: All You Need To Know About EOS-05, The Satellite Giving India A 24x7 Eye On Its Borders
ISRO ने फिर रचा अंतरिक्ष में इतिहास, GSLV-F17 के साथ लॉन्च हुआ 'बाज' सैटेलाइट | Image: Republic

इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) ने एक बार फिर से अंतरिक्ष में इतिहास रच दिया। सतीश धवन स्पेस सेंटर के दूसरे लॉन्च पैड से GSLV-F17/EOS-05 मिशन को सफलतापूर्वक लॉन्च किया, जो भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में एक बड़ी उपलब्धि है। EOS-05 भारत का पहला ऐसा इमेजिंग सैटेलाइट है जिसे जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट में स्थापित किया गया है, जिससे पृथ्वी को देखने और उसकी निगरानी करने की देश की क्षमता बेहतर होगी।

4 सितंबर की तड़के, जब देश अभी नींद में था, सतीश धवन स्पेस सेंटर के दूसरे लॉन्च पैड से अचानक रोशनी की चमक और गर्जना फूटी। ठीक 2:55 बजे GSLV-F17 रॉकेट ने आसमान की ओर उड़ान भरी। सैटेलाइट EOS-05 भारत का पहला जियो-इमेजिंग सैटेलाइट, जिसे जियोसिंक्रोनस कक्षा से धरती की निगरानी का काम सौंपा गया है।

सैटेलाइट EOS-05 सफतापूर्वक लॉन्च

यह उड़ान भारत के जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल की 19वीं उड़ान थी। रॉकेट ने सटीक तरीके से ईओएस-05 को सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित कर दिया। मिशन पूरी तरह सफल रहा। यह सैटेलाइट 36,000 किलोमीटर ऊंचाई से भारत का हर 30 मिनट में फोटो लेगा। भारत की सीमाओं को निगरानी रखने के साथ ही ये आपदा प्रबंधन और कृषि निगरानी के लिए भी महत्वपूर्ण मिशन है।

EOS-05 मिशन के सफल लॉन्च पर ISRO प्रमुख ने क्या कहा?

GSLV-F17/EOS-05 मिशन के सफल लॉन्च पर ISRO प्रमुख वी. नारायणन ने कहा, "यह मिशन हमारे देश के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि हम पहली बार पृथ्वी पर नजर रखने वाले एक सैटेलाइट को जियो-सिंक्रोनस ऑर्बिट में स्थापित करने जा रहे हैं। पृथ्वी पर नजर रखने के लिए भारत और उसके आस-पास के इलाकों की लगातार निगरानी करने के मकसद से यह बहुत जरूरी है और यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण एप्लीकेशन है जिसमें हम सभी की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी शामिल है। इसलिए, यह एक महत्वपूर्ण सैटेलाइट है जिसे बनाया गया है; इसमें एडवांस्ड कैमरे और कई महत्वपूर्ण पेलोड लगे है। इस फाइनेंशियल ईयर में, भारत के माननीय प्रधानमंत्री के निर्देशों के अनुसार, हम 6 और लॉन्च करने का लक्ष्य रख रहे हैं, जिसमें गगनयान प्रोग्राम का पहला बिना क्रू वाला मिशन भी शामिल है।"

Advertisement

 ISRO के लिए थी बड़ी चुनौती

यह लॉन्च ISRO के लिए एक बहुत ही अहम समय पर हुआ है। पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) - जिसे पहले दुनिया के सबसे भरोसेमंद रॉकेटों में से एक माना जाता था, के साथ कई दिक्कतों के बाद, एजेंसी एक मुश्किल दौर से गुजर रही है। अभी PSLV को रोक दिया गया है और उसकी जांच और टेस्टिंग चल रही है, ऐसे में GSLV-F17 की सफलता भारत के स्पेस प्रोग्राम में भरोसे को काफी बढ़ा सकती है।

हालांकि, ये दोनों लॉन्चर अलग-अलग तरह के हैं और इनके प्रोपल्शन सिस्टम भी अलग हैं। इसलिए, PSLV की हालिया दिक्कतें सीधे तौर पर GSLV Mk II से जुड़ी नहीं हैं, जिससे शुक्रवार के मिशन का मूल्यांकन उसकी अपनी तकनीकी खूबियों के आधार पर किया जा सकता है।

Advertisement

इसरो ने अंतरिक्ष भेजा नॉटी बॉय

इस GSLV मिशन पर इतनी बारीकी से नज़र क्यों रखी जा रही है? GSLV का इतिहास काफी उतार-चढ़ाव वाला रहा है। ISRO के अंदर इसे "नॉटी बॉय" (शरारती बच्चा) कहा जाता है क्योंकि इसके बनने के शुरुआती सालों में इसका प्रदर्शन एक जैसा नहीं रहा था। पहली 18 उड़ानों में से छह अपने मिशन को सफलतापूर्वक पूरा नहीं कर पाई थीं। हालांकि, इसी रॉकेट ने बड़े सैटेलाइट लॉन्च करने की क्षमता विकसित करने की भारत की कोशिशों में अहम भूमिका निभाई है।

यह भी पढ़ें: PM मोदी-पुतिन के बाद एस जयशंकर यूक्रेन में; खत्म होगा रूस-यूक्रेन युद्ध?
 

Published By:
 Rupam Kumari
पब्लिश्ड