BRICS 2026: राजनितिक अनिश्चितताओं के बीच आज दुनिया सबसे जटिल दौर से गुजर रही है, इन चुनौतियों के प्रति ब्रिक्स की क्या प्रतिक्रिया है? पेजेशकियान ने उठाए सवाल
BRICS 2026: ब्रिक्स बिजनेस फोरम के लीडर्स सेशन को संबोधित करते हुए ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने कहा 'आज दुनिया अपने सबसे मुश्किल दौर से गुज़र रही है। सप्लाई चेन में रुकावट और राजनीतिक दबाव बनाने के लिए आर्थिक साधनों के बढ़ते इस्तेमाल ने आर्थिक माहौल को और भी जटिल बना दिया है।'
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BRICS 2026: शुक्रवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने ब्रिक्स बिजनेस फ़ोरम के लीडर्स सेशन को संबोधित करते हुए कहा ब्रिक्स की असली ताकत सिर्फ़ इसके सदस्यों की अर्थव्यवस्था के आकार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह तब और साफ तौर पर दिखती है जब इन क्षमताओं को व्यापार, निवेश और संयुक्त फाइनेंसिंग के नेटवर्क में बदला जाता है। उन्होंने "संभावित सहयोग से असल सहयोग की ओर बढ़ने" का आह्वान किया।
मंच से उन्होंने कहा 'आज दुनिया अपने सबसे मुश्किल दौर से गुज़र रही है। भू-राजनीतिक अनिश्चितता, सप्लाई चेन में रुकावट और राजनीतिक दबाव बनाने के लिए आर्थिक साधनों के बढ़ते इस्तेमाल ने उस आर्थिक माहौल को और जटिल बना दिया है जिसमें देश काम करते हैं। सवाल यह है कि इन चुनौतियों का सामना करने के लिए ब्रिक्स का क्या जवाब है?"
दुनिया अपने सबसे मुश्किल दौर से गुजर रही-ईरानी राष्ट्रपति
ब्रिक्स बिजनेस फोरम के लीडर्स सेशन में बोलते हुए, मसूद पेज़ेश्कियान ने कहा कि आज दुनिया अपने सबसे मुश्किल दौर से गुज़र रही है। सप्लाई चेन में रुकावट और राजनीतिक दबाव बनाने के लिए आर्थिक साधनों के बढ़ते इस्तेमाल ने आर्थिक माहौल को और भी जटिल बना दिया है।
"संभावित सहयोग से असल सहयोग की ओर बढ़ने" का आह्वान
ईरानी राष्ट्रपति ने मंच से आगे कहा 'ब्रिक्स (BRICS) की असली ताकत सिर्फ़ इसके सदस्यों की अर्थव्यवस्था के आकार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह तब और साफ़ तौर पर दिखती है जब इन क्षमताओं को व्यापार, निवेश और संयुक्त फाइनेंसिंग के नेटवर्क में बदला जाता है। उन्होंने "संभावित सहयोग से असल सहयोग की ओर बढ़ने" का आह्वान किया।'
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अपनी-अपनी करेंसी के इस्तेमाल को बढ़ाना होगा
राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने कहा, "सबसे अहम कदमों में से एक है सदस्यों के बीच व्यापार में अपनी-अपनी करेंसी के इस्तेमाल को बढ़ाना। इस कदम के साथ-साथ करेंसी से जुड़े जोखिमों और आपसी लेन-देन के निपटारे के लिए ज़रूरी सिस्टम भी बनाना होगा।'
आगे उन्होंने कहा 'चूंकि मौजूदा फाइनेंशियल सिस्टम कुछ ही करेंसी पर निर्भर होने की वजह से राजनीतिक झटकों के प्रति संवेदनशील है, इसलिए व्यापार सहयोग को असल निवेश में बदलने के लिए न्यू डेवलपमेंट बैंक को सदस्य देशों में इंफ्रास्ट्रक्चर और एनर्जी के लिए फाइनेंसिंग का मुख्य जरिया बनना होगा। इसके लिए डेडिकेटेड क्रेडिट लाइन, लोकल करेंसी में फाइनेंसिंग और प्राइवेट कैपिटल को आकर्षित करने के लिए गारंटी जैसे साधनों का इस्तेमाल करना होगा।'