अपडेटेड 7 March 2026 at 10:57 IST

International Womens Day: दो थीम्स के साथ मनाया जाएगा वुमेंस डे, जानिए 'Give To Gain' और UN की थीम का मतलब

International Women's Day 2026: अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2026 की थीम इस बार 'पाने के लिए देना' (Give To Gain) रखी गई है। जानिए इसका मतलब, इतिहास और 8 मार्च को ही क्यों मनाया जाता है महिला दिवस?

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International Women Day two themes  Give To Gain UN theme
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2026 पर 2 थीम- Give To Gain , Rights. Justice. Action. For ALL Women and Girls | Image: UN women/ @dsfindsofn

International Women's Day 2026: हर साल 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। इस बार महिला दिवस दो खास थीम पर बनाया जा रहा है। इस मौके पर दुनिया भर में महिलाओं की उपलब्धियों का जश्न मनाया जाएगा और लिंग समानता को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता फैलाई जाएगी। भारत में भी अलग-अलग कार्यक्रमों के जरिए महिलाओं के सम्मान और उनके अधिकारों पर बातचीत होती है। संयुक्त राष्ट्र से मान्यता प्राप्त इस दिन को मनाने के पीछे यही मकसद है कि, महिलाओं के योगदान को पहचान मिले और असमानताओं को दूर किया जा सके। 

क्या है इस बार की महिला दिवस थीम?

इस साल की थीम 'पाने के लिए देना' 'Give to Gain' है, इंटरनेशनल वुमन डे वेबसाइट (internationalwomensday.com) पर इसकी घोषित की गई है। इसका मतलब है कि जब हम दूसरों की मदद करते हैं, तो हमें भी फायदा होता है। यह थीम लोगों को प्रोत्साहित करती है कि वे अपने योगदान से लिंग समानता को बढ़ावा दें। उदाहरण के लिए, महिलाओं के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों में निवेश करके समाज मजबूत बन सकता है।

संयुक्त राष्ट्र महिला वेबसाइट की थीम क्या? 

वहीं, संयुक्त राष्ट्र महिला (UN Women) की वेबसाइट के मुताबिक, एक और थीम 'Rights. Justice. Action. For ALL Women and Girls' भी है, जो महिलाओं के अधिकारों और न्याय पर जोर देती है। दोनों ही थीम महिलाओं की प्रगति पर फोकस करती हैं। संयुक्त राष्ट्र महिला वेबसाइट ने जो थीम किया है उसका मतलब ये है अधिकार, न्याय और सभी के लिए।

Rights (अधिकार): सभी महिलाओं को उनके बुनियादी कानूनी और मानवीय अधिकार मिलना।  
Justice (न्याय): समाज और कानून की नजर में उनके साथ भेदभाव न होना और उन्हें उचित न्याय मिलना। 
Action (कार्रवाई): केवल बातें नहीं, बल्कि बदलाव के लिए ठोस कदम उठाना। 
For ALL Women and Girls (सभी महिलाओं और लड़कियों के लिए): यह सुनिश्चित करना कि ये अधिकार और न्याय किसी एक वर्ग के लिए नहीं, बल्कि हर उम्र, जाति और पृष्ठभूमि की महिला को मिले।  
इसका उद्देश्य एक ऐसा समाज बनाना है जहां समानता सिर्फ कागजों पर न होकर असल जीवन में हो। 

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महिला दिवस का इतिहास जानें

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की शुरुआत 20वीं सदी की शुरुआत में हुई। 1908 में न्यूयॉर्क शहर में करीब 15,000 महिलाओं ने काम के घंटे कम करने, बेहतर वेतन और मतदान के अधिकार की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। इतिहासकारों के मुताबिक, यह प्रदर्शन महिला दिवस की नींव माना जाता है। इसके 2 साल बाद, 1910 में जर्मन समाजवादी नेता क्लारा जेटकिन ने कोपेनहेगन में एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में महिला दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा। 1911 में पहली बार ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, जर्मनी और स्विट्जरलैंड में इसे मनाया गया।

8 मार्च को ही क्यों मनाते हैं?

8 मार्च की तारीख का चयन 1917 की एक ऐतिहासिक घटना से जुड़ा है। उस साल रूस में महिलाओं ने 'ब्रेड एंड पीस' (रोटी और शांति) की मांग को लेकर हड़ताल की, जिसके बाद सरकार को महिलाओं को वोट का अधिकार देना पड़ा। यह घटना ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक 8 मार्च को हुई। इसलिए संयुक्त राष्ट्र ने 1975 में इसे आधिकारिक मान्यता दी और तब से वैश्विक स्तर पर 8 मार्च को महिला दिवस के रूप में मनाया जाता है।  यह दिन महिलाओं के संघर्ष को याद करने का प्रतीक है। भारत में महिला दिवस पर सरकारी और गैर-सरकारी संगठन अलग-अलग वर्कशॉप, सेमिनार और अभियान चलाते हैं। जैसे कि महिला सशक्तिकरण पर फोकस करने वाले कार्यक्रम। इस दिन परिवार और दोस्तों को महिलाओं को बधाई देकर उनका सम्मान करना करते हैं। कुल मिलाकर, यह दिन हमें याद दिलाता है कि लिंग समानता के बिना समाज की प्रगति अधूरी है। 

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Published By : Nidhi Mudgill

पब्लिश्ड 7 March 2026 at 10:57 IST