अपडेटेड 21 March 2026 at 14:55 IST
India to Buy Iranian Oil: अमेरिका के एक फैसले से जंग के बीच राहत की खबर, अब ईरान से तेल खरीदेगी भारतीय कंपनियां; सरकार की हरी झंडी का इंतजार
Iranian Oil: अमेरिका ने ईरानी तेल से अस्थायी प्रतिबंध हटा दिया है। इसके बाद भारतीय रिफाइनरों ने इस छूट का लाभ उठाने की योजना बनाई है। कंपनियां ईरान का तेल खरीदने की तैयारी में हैं।
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US-Iran War news: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच भारत के ऊर्जा बाजार के लिए राहत भरी खबर आई है। ट्रंप के एक फैसले के बाद अब रूस के बाद भारत ईरान से भी तेल खरीद सकता है। दरअसल, अमेरिका ने ईरानी तेल पर लगाए गए प्रतिबंधों में अस्थायी ढील दी है। इसके बाद भारतीय रिफाइनरों ने इस छूट का लाभ उठाए और ईरान से कच्चा तेल खरीदने की योजना बनाई है। वे फिलहाल सरकार की हरी झंडी मिलने का इंतजार कर रही हैं।
दरअसल, अमेरिका ने ईरान को करीब 140 मिलियन बैरल तेल बेचने की अस्थायी अनुमति दे दी है। यूएस ने ईरान पर प्रतिबंधों को 19 अप्रैल तक स्थगित किया है। यह उन तेल खेपों पर लागू होगी, जो शुक्रवार (20 मार्च) तक जहाजों में लोड की जा चुकी थीं।
भारतीय रिफाइनरों ने बनाई योजना
अमेरिका के इस फैसले के बाद तीन भारतीय ऑयल रिफाइनरी कंपनियों ने कहा है कि वे ईरानी तेल खरीदने की योजना बना रहे हैं, लेकिन वह इसके लिए सरकार के निर्देशों और अमेरिका से भुगतान जैसी शर्तों पर स्पष्टता का इंतजार किया जा रहा है। वहीं, अन्य एशियाई रिफाइनर यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या वे तेल खरीद सकते हैं।
अगर ऐसा होता है तो यह भारत के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। भारतीय रिफाइनरियों के लिए ईरानी तेल न केवल किफायती है। साथ ही साथ इसकी आपूर्ति का समय भी कम रहता है। यही वजह है कि भारतीय रिफाइनिंग कंपनियां इस मौके को भुनाने की कोशिशों में लगी हैं, जिससे घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों को स्थिर रखा जा सके।
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अमेरिका ने ईरानी तेल से क्यों हटाया प्रतिबंध?
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने ईरानी तेल पर अस्थायी छूट देने के फैसले की जानकारी दी थी। इस फैसले के पीछे के तर्क को स्पष्ट करते हुए कहा कि इससे आपूर्ति पर पड़ रहे दबाव को कम करने में मदद मिलेगी। उन्होंने X पर एक पोस्ट करते हुए कहा, “फिलहाल, प्रतिबंधित ईरानी तेल को चीन सस्ते दामों पर जमा कर रहा है। दुनिया के लिए इस मौजूदा आपूर्ति को अस्थायी रूप से खोलकर, अमेरिका लगभग 140 मिलियन बैरल तेल को वैश्विक बाजारों में तेजी से पहुंचाएगा, जिससे ईरान के कारण आपूर्ति पर पड़ रहे अस्थायी दबाव को कम करने में मदद मिलेगी।”
उन्होंने आगे कहा कि यह अस्थायी, अल्पकालिक अनुमति पूरी तरह से केवल उस तेल तक सीमित है जो पहले से ही परिवहन में है, और यह किसी भी नई खरीद या उत्पादन की अनुमति नहीं देती है। इसके अलावा, ईरान को इससे होने वाली किसी भी आय तक पहुंचने में कठिनाई होगी। अमेरिका, ईरान और उसकी अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली तक पहुंचने की क्षमता पर अपना अधिकतम दबाव बनाए रखना जारी रखेगा।
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भारत अपनी कुल तेल जरूरत का 90 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है। साल 2018 में अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंध से पहले भारत ईरानी कच्चे तेल का एक प्रमुख खरीदार था। हालांकि, प्रतिबंधों के बाद भारत ने धीरे-धीरे ईरान से अपनी तेल खरीद को कम किया और इसके लिए रूस और अन्य खाड़ी देशों का रुख किया।
Published By : Ruchi Mehra
पब्लिश्ड 21 March 2026 at 14:55 IST