अपडेटेड 18 February 2026 at 14:42 IST
अब पानी की एक-एक बूंद को तरसेगा पाकिस्तान, रावी का पानी रोकेगा भारत, जानिए पड़ोसी मुल्क पर क्या पड़ेगा असर?
Ravi Water: भारत ने पाकिस्तान को बूंद-बूंद पानी के लिए तरसाने की तैयारी पूरी कर ली है। शाहपुर कंडी बैराज का काम पूरा होने को है। बांध के निर्माण के बाद रावी नदी से पाकिस्तान की ओर बहने वाले अतिरिक्त पानी को रोका जा सकेगा।
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Shahpur Kandi Dam: गर्मी के मौसम में पाकिस्तान में जल संकट गहरा सकता है। भारत ने पाकिस्तान के लिए रावी नदी के पानी को पूरी तरह से रोकने की तैयारी कर ली है। शाहपुर कंडी बैराज का काम मार्च के अंत तक पूरा हो सकता है, जिसके बाद रावी नदी से पाकिस्तान की ओर बहने वाले अतिरिक्त पानी को रोका जा सकेगा। जम्मू-कश्मीर के मंत्री जावेद अहमद राणा ने बांध के निर्माण पर बड़ा अपडेट दिया।
दरअसल, अभी रावी नदी का अतिरिक्त पानी माधोपुर के रास्ते होते हुए पाकिस्तान चला जाता है। बांध बनने से इस पानी को पंजाब और जम्मू-कश्मीर की ओर मोड़ जा सकेगा।
31 मार्च तक पूरा हो सकता है काम- मंत्री
जम्मू-कश्मीर के जल संसाधन मंत्री जावेद अहमद राणा ने बताया कि सिंधु जल संधि को सस्पेंड किए जाने से शाहपुर कांडी बांध के काम में तेजी आई है। प्रोजेक्ट लगभग पूरा को है। बांध के चालू होने से रावी नदी का अतिरिक्त पानी पाकिस्तान की ओर जाने से रोका जा सकेगा। बांध के पानी को कठुआ और सांबा जिलों की तरफ मोड़ा जाएगा। उन्होंने बताया कि शाहपुर कांडी बांध का काम 31 मार्च तक पूरा होने की उम्मीद है
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान जाने वाला अतिरिक्त पानी रोका ही जाना चाहिए। कठुआ और सांबा जिले सूखाग्रस्त है। ये प्रोजेक्ट हमारी प्राथमिकता है, जो कंडी इलाके में बनाया जा रहा है।
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योजना ने अब पकड़ी रफ्तार
शाहपुर कांडी बांध परियोजना की कल्पनासाल 1979 में की गई थी। साल 1982 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इस परियोजना का शिलान्यास किया था, लेकिन इसके बाद पंजाब और जम्मू-कश्मीर सरकारों के बीच आपसी विवाद के चलते इस बांध के निर्माण को रोक दिया गया। साल 2008 में इसे राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया था।
बांध के निर्माण में कुल लागत 3,394 करोड़ रुपये आ रही है। इसमें से लगभग 80 प्रतिशत 2,694 करोड़ रुपये पंजाब सरकार दे रही है, जबकि बाकी 20 प्रतिशत 700 करोड़ रुपये भारत सरकार की ओर से दिए जा रहे हैं। बांध 55.5 मीटर ऊंचा है। इसमें 7.7 किलोमीटर लंबी हाइडल नहर भी शामिल है। बांध का निर्माण पूरा होने के बाद इसकी मदद से पंजाब में करीब 5000 हेक्टेयर जमीन और जम्मू के कठुआ और सांबा जिलों में 32 हजार हेक्टेयर से ज्यादा जमीन की सिंचाई हो सकेगी।
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पाकिस्तान पर मंडरा सकता है जल संकट
1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुई सिंधु जल संधि के तहत, भारत को पूर्वी नदियों- सतलुज, ब्यास और रावी के पानी के इस्तेमाल की इजाजत मिली। वहीं, पाकिस्तान को पश्चिमी नदियों- सिंधु, झेलम और चिनाब के पानी के अधिकार दिए गए। हालांकि पाकिस्तान तक पूर्वी नदियों का अतिरिक्त पानी भी पहुंचता रहा है।
बता दें कि पाकिस्तान की करीब 80 प्रतिशत खेती सिंधु नदी प्रणाली पर ही निर्भर है। पिछले साल पहलगाम में आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि को सस्पेंड कर दिया था। ऐसे में इस डैम के पूरा होने के बाद रावी नदी का पानी भी पाकिस्तान नहीं पहुंचेगा, जिससे पाकिस्तान को गहरे जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।
Published By : Ruchi Mehra
पब्लिश्ड 18 February 2026 at 13:32 IST