MP से उड़कर पाकिस्तान पहुंचा घायल गिद्ध, सरहद पार मिली नई जिंदगी; वायरल हुई रेस्क्यू की तस्वीरें

MP के वन विभाग ने एक ऐसी मिसाल पेश की है। जिसने सीमाओं को पार कर मानवता और विज्ञान के तालमेल का उदाहरण पेश किया है। एक दुर्लभ गिद्ध जिसे जीपीएस टैग लगाकर छोड़ा गया था, तुफान की चपेट में आने से वह पाकिस्तान पहुंच गया। जहां पड़ोसी मुल्क ने उसकी जान बचाई।

  • Facebook Share Icon
  • Twitter Share Icon
  • WhatsApp Share Icon
 
Follow : Google News Icon
Cinereous Vulture Rescue Pakistan
Cinereous Vulture Rescue Pakistan | Image: Meta AI \ Social Media

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के वन विहार नेशनल पार्क में नया जीवन पाने वाली एक दुर्लभ 'सिनेरियस वल्चर' हाल ही में पाकिस्तान में एक बड़े हादसे का शिकार हो गई थी। लेकिन समय रहते भारत और पाकिस्तान के बीच हुए शानदार तालमेल ने इस परिंदे की जान बचा ली।

हलाली डैम से शुरू हुई उड़ान

यह कहानी करीब दो साल की एक मादा गिद्ध की है, जिसे जनवरी में शाजापुर के पास घायल अवस्था में रेस्क्यू किया गया था। भोपाल के वन विहार और BNHS की टीम ने इसकी देखभाल की और इसे पूरी तरह स्वस्थ किया।इसकी आवाजाही पर नजर रखने के लिए 25 मार्च को इसे एक GPS-GSM टैग लगाया गया। इसके बाद 30 मार्च को रायसेन जिले के हलाली डैम से इसे खुले आसमान में छोड़ दिया गया। किसी ने नहीं सोचा था कि यह परिंदा जल्द ही एक अंतरराष्ट्रीय मिशन का हिस्सा बन जाएगा।

जब अचानक गायब हुआ सिग्नल

ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, यह गिद्ध मध्य प्रदेश और राजस्थान के रास्तों से होते हुए 6 अप्रैल को पाकिस्तान की सीमा में दाखिल हुई। सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन 7 अप्रैल को पाकिस्तान के खानेवाल इलाके के पास अचानक सिग्नल मिलना बंद हो गया। सिग्नल रुकते ही भारतीय अधिकारियों की नींद उड़ गई, क्योंकि इसका मतलब था कि गिद्ध किसी बड़ी मुसीबत में है।

कैसे चला रेस्क्यू ऑपरेशन?

Cinereous Vulture reached Pakistan

जैसे ही सिग्नल कटा, WWF-India ने तुरंत WWF-Pakistan से संपर्क साधा। भारतीय टीम ने गिद्ध की आखिरी लोकेशन और जीपीएस डेटा साझा किया। पाकिस्तान के वन विभाग ने तुरंत हरकत में आते हुए खानेवाल जिले में तलाश शुरू की और स्थानीय लोगों की मदद से गिद्ध को ढूंढ निकाला।
बचाव के बाद पता चला कि 7 अप्रैल को पाकिस्तान के खानेवाल और मुल्तान इलाके में भारी आंधी और तूफान आया था।खराब मौसम के कारण यह सिनेरियस गिद्ध उड़ नहीं पा रही थी और घायल हो गई थी। इसके साथ ही एक अन्य 'यूरेशियन ग्रिफॉन' गिद्ध भी घायल अवस्था में मिला।

Advertisement

अब कैसी है गिद्ध की हालत?

वर्तमान में दोनों गिद्धों को पाकिस्तान के 'चंगा मंगा वल्चर कैप्टिव ब्रीडिंग सेंटर' में रखा गया है। राहत की बात यह है कि इन्हें मामूली चोटें आई हैं और दोनों अब खतरे से बाहर हैं। हालांकि, ओलावृष्टि के दौरान सिनेरियस गिद्ध का ट्रैकिंग टैग कहीं गिर गया, जो अब तक नहीं मिल पाया है। जैसे ही यह पूरी तरह स्वस्थ हो जाएगी, इसे वापस खुले आसमान में छोड़ दिया जाएगा।

यह रेस्क्यू क्यों है ऐतिहासिक?

यह मिशन वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक मिसाल है। यह दिखाता है कि लुप्तप्राय प्रजातियों को बचाने के लिए आपसी मतभेद भुलाकर इंटरनेशनल को-ऑर्डिनेशन कितना जरूरी है। साल 2025 में भी इसी तरह एक गिद्ध 4,300 किलोमीटर का सफर तय कर कजाकिस्तान पहुंची थी। इन प्रवासी पक्षियों के रास्तों को समझने से भविष्य में गिद्धों को बचाने की रणनीति बनाने में बड़ी मदद मिलेगी।

Advertisement

ये भी पढ़ें - Asha Bhosle White Saree: बॉलीवुड की रंगीन दुनिया, फिर भी सफेद साड़ी... आशा भोसले ने बताया था क्यों हमेशा पहनती थीं सफेद साड़ी

Published By:
 Aarya Pandey
पब्लिश्ड