Rafale Deal: भारतीय नौसेना की बढ़ेगी ताकत, थर-थर कापेंगे दुश्मन, ड्रैगन का उड़ेगा होश; फ्रांस के साथ 63000 करोड़ की बड़ी डील
भारत ने फ्रांस के साथ राफेल मरीन फाइटर जेट खरीदने की डील की है। सुरक्षा पर कैबिनेट समिति ने भारत के अब तक के सबसे बड़े लड़ाकू जेट सौदे को मंजूरी दी।
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Rafale Marine fighter aircraft deal: भारत के जहन में भविष्य की ताकत और दुश्मनों से मिलने वाली चुनौतियां दोनों हैं। लिहाजा देश में उसी दिशा में काम बडे़ स्तर पर हो रहा है। खासकर पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान और चीन के हाथ रिश्ते नाजुक रहे हैं और ये दोनों मुल्क एक दूसरे के सहयोगी है, इससे भारत को दो मोर्चे पर स्थिति संभालनी पड़ती है। इसी को समझकर भारत ने फ्रांस के साथ एक बड़ा समझौता किया है, जिससे समुद्र के अंदर भारतीय नौसेना की ताकत में बहुत बड़ा इजाफा होगा।
असल में भारत ने फ्रांस के साछ राफेल मरीन फाइटर जेट खरीदने की डील की है। सुरक्षा पर कैबिनेट समिति (CCS) ने मंगलवार को भारत के अब तक के सबसे बड़े लड़ाकू जेट सौदे को मंजूरी दी। इसमें भारतीय नौसेना के लिए 26 राफेल मरीन लड़ाकू विमानों की खरीद की जाएगी। सरकारी सूत्रों ने एएनआई को बताया कि 63000 करोड़ रुपये से अधिक का ये सौदा फ्रांस के साथ गवर्नमेंट-टू-गवर्नमेंट समझौते के तहत पूरा किया जाएगा। समझौते के अनुसार 22 सिंगल-सीटर और 4 ट्विन-सीटर राफेल मरीन जेट खरीदे जाएंगे।
5 साल बाद राफेल एम जेट की डिलीवरी संभव
सौदे पर हस्ताक्षर होने के लगभग 5 साल बाद राफेल एम जेट की डिलीवरी शुरू होने की उम्मीद है। इन लड़ाकू विमानों को भारत के पहले स्वदेशी विमानवाहक पोत INS विक्रांत पर तैनात किया जाएगा। नया राफेल मरीन सौदा भारतीय सेना की क्षमताओं को बढ़ाने में भी मदद करेगा। ये सुविधा लगभग 10 भारतीय वायुसेना के राफेल विमानों को हवा में ही अन्य विमानों में ईंधन भरने में सक्षम बनाएगी, जिससे उनकी परिचालन सीमा का विस्तार होगा।
बढ़ेगी भारतीय नौसेना की ताकत
रक्षा सूत्रों ने पहले एएनआई को बताया था कि इस सौदे में भारतीय वायुसेना के बेड़े के लिए जमीन आधारित उपकरण और सॉफ्टवेयर अपग्रेड शामिल होंगे। इसके अलावा नौसेना को 4.5 पीढ़ी के राफेल जेट के संचालन का समर्थन करने के लिए अपने एयरक्राफ्ट कैरियर पर खास उपकरण स्थापित करने की जरूरत होगी। जबकि मिग-29K आईएनएस विक्रमादित्य से संचालित होते रहेंगे, राफेल मरीन जेट के शामिल होने से नौसेना की वायुशक्ति में जबरदस्त वृद्धि होने की उम्मीद है। भारतीय नौसेना स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू जेट को भी शामिल करने की योजना बना रही है, जो रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) की तरफ से बनाए जा रहे हैं।