'गैर कानूनी है तो हटाना पड़ेगा, वहां मस्जिद जिन लोगों ने बनाया...', Kolkata Airport Masjid विवाद पर BJP नेता दिलीप घोष का बड़ा बयान
कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के परिसर में स्थित एक मस्जिद को स्थानांतरित करने के प्रस्ताव पर पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप की प्रतिक्रिया आई है। उन्होंने साफ कह दिया है कि ये गैर कानूनी है तो हटाना पड़ेगा।
- भारत
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नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट (NSCBI) के परिसर में स्थित एक 136 साल पुरानी ऐतिहासिक मस्जिद को दूसरी जगह शिफ्ट करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन और मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नई सरकार के गठन के बाद लंबित इस मामले को हल करने के लिए एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया और राज्य प्रशासन सक्रिय हो गए हैं। मगर मस्जिद समिति और अल्पसंख्यक संगठन इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। अब पूरे विवाद पर पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष की प्रतिक्रिया आई है।
मस्जिद को स्थानांतरित करने के प्रस्ताव पर पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने कहा, "बंगाल में ऐसे बहुत जगह धर्म स्थान बनाया गया है मंदिर और मस्जिद भी है भगवान को सम्मान के साथ रखना चाहिए। भगवान को अतिक्रमण में उपयोग नहीं करना चाहिए। जमीन कब्जा के लिए ईश्वर का इस्तेमाल गलत है। मेरा प्रश्न है वहां मस्जिद बना कैसे?"
मस्जिद गैर कानूनी है तो हटाना ही पड़ेगा-दिलीप घोष
दिलीप घोष ने आगे कहा, "मस्जिद गैर कानूनी है तो हटाना ही पड़ेगा। मगर मेरा सवाल है कि किन लोगों ने वहां पर मस्जिद बनने दिया। जिन्होंने बनाया वो अपना-अपना हटा ले, मंदिर, मस्जिद को कही भी बना देते हैं भगवान को इस तरह उपयोग नहीं करना चाहिए, उनकी गरिमा को नष्ट नहीं करना चाहिए।"
एयरपोर्ट में कहां है 136 साल पुरानी मस्जिद
बता दें कि एयरपोर्ट के सेकेंडरी रनवे से महज 165 मीटर की दूरी पर स्थित यह मस्जिद बाउंड्री वॉल के अंदर 150 मीटर पर बनी हुई है। विमानन सुरक्षा नियमों के अनुसार रनवे और किसी भी स्थायी निर्माण के बीच न्यूनतम 240 मीटर की दूरी अनिवार्य है। मस्जिद को हटाने या स्थानांतरित करने की मांग लंबे समय से की जा रही थी, लेकिन राजनीतिक कारणों से यह प्रस्ताव बार-बार ठंडे बस्ते में चला जाता था।
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पुरानी सरकारों ने नहीं दी थी हटाने के अनुमति
रिपोर्ट्स के मुताबिक, 1995 से लेकर अब तक नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए मस्जिद हटाने की मांग की थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री ज्योति बसु, बुद्धदेव भट्टाचार्य और ममता बनर्जी के कार्यकाल में राज्य सरकार की असहमति के चलते यह प्रस्ताव लागू नहीं हो सका। 1962 में एयरपोर्ट अथॉरिटी ने आसपास की जमीन अधिग्रहित की थी, लेकिन मस्जिद वाली जमीन अभी भी पुराने रिकॉर्ड में उसी के नाम दर्ज है।
क्या अब एयरपोर्ट से हट जाएगा मस्जिद?
साल 1890 में बनी यह मस्जिद करीब 136 साल पुरानी है। एयरपोर्ट अथॉरिटी एक बार फिर प्रशासनिक स्तर पर मस्जिद को वैकल्पिक जगह शिफ्ट करने के लिए बातचीत कर रही है। सरकार ने भी इस सहमति जताई है। अब इसे लेकर मस्जिद समिति और अल्पसंख्यक संगठनों के साथ बातचीत जारी है। नई सरकार के आने के बाद एयरपोर्ट की सुरक्षा और विकास कार्यों को गति देने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है।