वायु प्रदूषण को लेकर आईसीएमआर को अधिक अध्ययन करना चाहिए : संसदीय समिति
आईसीएमआर को वायु प्रदूषण के दुष्प्रभावों के बारे में अधिक अध्ययन करने और प्रतिकूल प्रभावों से निपटने के लिए तरीके सुझाने की खातिर एक प्रभावी योजना बनानी चाहिए।
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संसद की एक समिति ने सिफारिश की है कि भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) को वायु प्रदूषण के दुष्प्रभावों के बारे में अधिक अध्ययन करने और प्रतिकूल प्रभावों से निपटने के लिए तरीके सुझाने की खातिर एक प्रभावी योजना बनानी चाहिए।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग संबंधी स्थायी संसदीय समिति ने बुधवार को संसद में पेश अपनी रिपोर्ट में कहा कि वायु प्रदूषण को पहले दिल्ली जैसे कुछ एक बड़े शहरों में खतरा माना जाता था लेकिन अब, छोटे शहर भी इससे प्रभावित हैं।
समिति ने ‘‘भारत के विभिन्न राज्यों में मृत्यु, बीमारी और जीवन प्रत्याशा पर वायु प्रदूषण के प्रभाव’’ संबंधी निष्कर्षों को ध्यान में रखते हुए नीति या कार्यक्रम तैयार करने की सिफारिश की।
समिति ने वायु प्रदूषण को स्वास्थ्य खतरा माना जो एक बड़ी चुनौती के रूप में उभरा है। रिपोर्ट में, समिति ने कहा कि वायु प्रदूषण के स्वास्थ्य प्रभावों का अध्ययन करने के लिए आईसीएमआर द्वारा शुरू किए गए प्रयासों पर ध्यान दिया गया है।
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समिति ने रेखांकित किया कि वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए बहु-एजेंसी की भागीदारी की आवश्यकता है और संस्थागत संरचना के माध्यम से अंतर-विभागीय/संगठनात्मक समन्वय सुनिश्चित करने के लिए हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि समिति सिफारिश करती है कि डीएचआर-आईसीएमआर (स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग) को वायु प्रदूषण के दुष्प्रभावों के बारे में अधिक शोध करने और इसके प्रतिकूल प्रभावों से निपटने के तरीकों के लिए एक प्रभावी योजना बनानी चाहिए।