Rameshwaram Cafe Blast: IIM से एमबीए,कोरोना में तैयार किया प्लान...ऐसे हुई रामेश्वरम कैफे की शुरूआत
Rameshwaram Cafe: रामेश्वरम कैफे में हुए हालिया ब्लास्ट के बाद हर कोई इस कैफे से जुड़ी कई दिलचस्प बाते जानना चाहता है।

Rameshwaram Cafe: शुक्रवार दोपहर करीब एक बजे बेंगलुरु का राजाजीनगर स्थित 'रामेश्वरम कैफे' भीषण धमाके से हिल उठा था। इस धमाके में कई लोग घायल हो गए हैं जिनका इलाज स्थानीय अस्पताल में चल रहा है। एक खाने-पीने की जगह पर होने वाला ये धमाका जहन में कई सवाल खड़े करता है। इस कैफे में बेहद स्वादिष्ट साउथ इंडियन खाना परोसा जाता है, लोग यहां के खाने का जायका लेने के लिए घंटों कतार में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं।
मगर सवाल ये है कि एक साधारण लेकिन अपने स्वाद के लिए मशहूर इस कैफे में धमाका क्यों हुआ? इन सवालों की जांच फिलहाल पुलिस की टीम कर रही है। हालांकि अब हर कोई इस कैफे से जुड़ी हर बात जानना चाहता है, ऐसे में चलिए हम आपको कुछ ऐसी बातें बताते हैं जो इस रामेश्वरम कैफे को बेहद खास बनाती है।
कैसे हुई थी 'रामेश्वरम कैफे' की शुरुआत?
दिव्या राघवेंद्र नाम की एक महिला ने चार्टर्ड अकाउंटेंट करने के बाद आईआईएम अहमदाबाद से मैनेजमेंट ऑफ फाइनेंस की पढ़ाई की, और इसके साथ ही वह फूड बिजनेस पर केस स्टडी कर रही थीं। इस दौरान वह कई विदेशी फूड ब्रांड्स जैसे स्टारबक्स, केएफसी, मैकडॉनल्ड्स आदि के बारे में जान रही थीं।
उनके इस अध्ययन के दौरान एक बार उनकी क्लास में किसी प्रोफेसर ने भारतीय खाने को बेकार बताया था और कहा था कि इसका कोई ब्रांड नहीं है। यहीं से दिव्या ने अपने मन में एक इंडियन रेस्तरां को खोलने की ठान ली थी। जिसके बाद दिव्या ने साउथ इंडियन खाने को ग्लोबल लेवल तक पहुंचाने का मन बना लिया।
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अपनी इस जिद्द के साथ दिव्या ने राघवेंद्र राव नाम के एक व्यक्ति के साथ हाथ मिलाया और दोनों ने कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान रामेश्वरम कैफे का पूरा प्लान तैयार किया, जिसे उन्होंने साल 2021 में बेंगलुरु में 'द रामेश्वरम कैफे' लॉन्च किया।
कौन हैं राघवेंद्र राव?
दिव्या के साथ मिलकर 'द रामेश्वरम कैफे' लॉन्च करने वाले राघवेंद्र राव एक मैकेनिकल इंजीनियर हैं, जिन्हें फूड इंडस्ट्री में 20 से ज्यादा समय तक काम करने का अनुभव है। वह आईडीसी किचन के संस्थापक और प्रमोटर हैं। इसके अलाव राघवेंद्र 'रामेश्वरम कैफे' चेन ऑपरेशन का नेतृत्व करते हैं।
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छोटी सी जगह से शुरू हुआ था कैफे
'रामेश्वरम कैफे' की एक खास बात ये भी है कि ये कैफे सबसे पहले बेंगलुरु के इंदिरा नगर में 10×10 स्क्वायर फीट की एक छोटी सी दुकान में शुरू किया गया था। छोटी सी जगह होने के बावजूद भी इस कैफे में मिलने वाले स्वाद और साफ सफाई ने लोगों का दिल जीत लिया और देखते ही देखते इस कैफे के कई आउटलेट अलग-अलग जगहों पर खुल गए।
'रामेश्वरम कैफे' का बढ़ता कारोबार
'रामेश्वरम कैफे' की मैनेजिंग डायरेक्टर दिव्या ने एक इंटरव्यू में यह दावा किया है कि शुरुआती दिनों में इस कैफे की पूंजी रुपये तक भी नहीं पहुंच पाती थी। लेकिन अब एक आउटलेट में 3 साल में 8-10 करोड़ का कारोबार किया जा रहा है। वहीं, खास बात ये है कि इतना बड़ा कारोबार होने के बावजूद भी इस कैफे में सुबह पूजा करने के बाद ही कोई काम शुरू किया जाता है।