Ladakh: लेह हिंसा के लिए सोनम वांगचुक जिम्मेदार? केंद्र ने कहा- नेपाल GEN Z और अरब स्प्रिंग का जिक्र कर भीड़ को उकसाया, 4 की मौत

Leh Ladakh Violence: सरकार का कहना है कि लद्दाख में पर्यायवरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के भड़काऊ बयानों की वजह से हिंसा भड़की। वांगचुक ने अरब स्प्रिंग शैली के विरोध प्रदर्शनों और नेपाल में Gen Z के विरोध प्रदर्शनों का भड़काऊ उल्लेख करके लोगों को गुमराह किया।

  • Facebook Share Icon
  • Twitter Share Icon
  • WhatsApp Share Icon
 
Follow : Google News Icon
Leh Ladakh Violence
Leh Ladakh Violence | Image: X, ANI

Ladakh Violence: लद्दाख का लेह इलाका 24 सितंबर को हिंसा की आग में जल उठा। लद्दाख को अलग राज्य का दर्जा देने समेत अन्य मांगों को लेकर युवा सड़कों पर उतर आए और जमकर हंगामा हुआ। इस हिंसा में कम से कम चार लोगों की मौत हो गई और 60 से ज्यादा लोग घायल हो गए। केंद्र ने इस हिंसा के लिए पर्यायवरण कार्यकर्ता सोनम वांगुनक को जिम्मेदार ठहराया है। सरकार का कहना है कि वांगचुक ने अरब स्प्रिंग शैली और नेपाल में Gen Z के विरोध प्रदर्शनों का भड़काऊ उल्लेख करके लोगों को गुमराह किया।

दरअसल, पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के साथ ही लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग उठ रही है। इसको लेकर 10 सितंबर से सोनम वांगचुक ने भूख हड़ताल भी शुरू की, जबकि इसको लेकर बातचीत चल रही थी।

हिंसा पर सरकार ने क्या कहा? 

गृह मंत्रालय ने बयान में कहा, "सोनम वांगचुक ने 10 सितंबर को छठी अनुसूची और लद्दाख को राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर भूख हड़ताल शुरू की गई थी। भारत सरकार इन्हीं मुद्दों पर एपेक्स बॉडी लेह और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के साथ सक्रिय रूप से बातचीत कर रही है। उच्चाधिकार प्राप्त समिति (HPC) और उप-समितियों के औपचारिक रूप से और नेताओं के साथ कई अनौपचारिक बैठकों के माध्यम से उनके साथ कई बैठकें हुईं।"

मंत्रालय ने कहा कि सरकार ने लद्दाख की अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षण को 45% से बढ़ाकर 84% करने, परिषदों में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण प्रदान करने और भोटी व पुर्गी को आधिकारिक भाषा घोषित करने जैसे अभूतपूर्व फैसले लिए। इसके साथ ही 1800 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया भी शुरू की गई। तब भी कुछ राजनीतिक रूप से प्रेरित व्यक्ति HPC के तहत हुई प्रगति से खुश नहीं थे और संवाद प्रक्रिया को विफल करने की कोशिश कर रहे थे।

Advertisement

वांगचुक ने भड़काऊ भाषणों से उकसाई भीड़’

बयान में यह भी बताया गया कि HPC की अगली बैठक 6 अक्टूबर को होनी है, जबकि लद्दाख के नेताओं के साथ 25 और 26 सितंबर को भी बैठकें आयोजित करने की योजना है। जिन मांगों को लेकर सोनम वांगचुक भूख हड़ताल पर थे, वे HPC में चर्चा का हिस्सा हैं। कई नेताओं की ओर से भूख हड़ताल खत्म करने की अपील की गई, लेकिन उन्होंने इसे जारी रखा। उन्होंने अरब स्प्रिंग शैली के विरोध प्रदर्शनों और नेपाल में Gen Z के विरोध प्रदर्शनों का भड़काऊ उल्लेख करके लोगों को गुमराह किया।

हमले में कई पुलिसकर्मी हुए घायल

गृह मंत्रालय ने कहा कि 24 सितंबर को करबी 11.30 बजे वांगचुक के भड़काऊ भाषणों से उकसाई भीड़ भूख हड़ताल स्थल से निकली और एक राजनीतिक दल के कार्यालय के साथ-साथ लेह के CEC के सरकारी कार्यालय पर हमला किया। उन्होंने इन कार्यालयों में आग लगा दी, सुरक्षाकर्मियों पर हमला किया और पुलिस वाहन को आग लगा दी। बेकाबू भीड़ ने पुलिसकर्मियों पर हमला किया जिसमें 30 से अधिक पुलिस और CRPF के जवान कर्मी घायल हो गए। तब भी भीड़ ने सार्वजनिक संपत्ति को नष्ट करना और पुलिसकर्मियों पर हमला करना जारी रखा। इसके बाद आत्मरक्षा में पुलिस को गोलीबारी करनी पड़ी जिसमें दुर्भाग्य से कुछ लोगों के हताहत होने की खबर है।

Advertisement

बयान में बताया गया कि इन घटनाओं के बाद शाम 4 बजे तक स्थिति नियंत्रण में आ गई। यह स्पष्ट है कि सोनम वांगचुक ने अपने भड़काऊ बयानों के जरिए भीड़ को उकसाया था। इस हिंसक घटनाक्रम के बीच उन्होंने अपनी भूख हड़ताल को तोड़ दिया और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कोई गंभीर प्रयास किए बिना एम्बुलेंस से अपने गांव चले गए। केंद्र ने कहा है कि वो लद्दाख की आकांक्षाओं और संवैधानिक अधिकारों के लिए प्रतिबद्ध है। यह अनुरोध किया जाता है कि लोग पुराने और भड़काऊ वीडियो, मीडिया और सोशल मीडिया पर प्रसारित न करें।

यह भी पढ़ें: Leh Ladakh Protest: लेह में बिगड़े हालात तो लगा कर्फ्यू लगा, हिंसक झड़प में 4 लोगों की मौत; 32 पुलिसकर्मी समेत 60 से ज्यादा घायल

Published By:
 Ruchi Mehra
पब्लिश्ड