Harish Rana: ट्यूब से खाना-पानी बंद, हट गया वेंटिलेटर... अंतिम सफर के लिए हरीश राणा तैयार, जानिए कब क्या हुआ कबतक पूरी होगी प्रक्रिया

अब हरीश राणा को वेंटिलेटर और अन्य लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटाकर उन्हें सामान्य बेड पर शिफ्ट कर दिया गया है। ट्यूब से खाना-पानी पहले ही बंद कर दिया गया था। अंतिम सफर के लिए हरीश राणा अब तैयार हैं।

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Harish rana passive euthanasia
Harish rana passive euthanasia | Image: X

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद देश में पहली बार किसी व्यक्ति को इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) दी जा रही है। दिल्ली के AIIMS में हरीश राणा की पैसिव इच्छामृत्यु की प्रक्रिया चल रही है। 13 सालों का लंबा संघर्ष और असहनीय दर्द अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका है। शरीर से लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटाने के बाद अब उनको अस्पताल में सामान्य बेड पर शिफ्ट कर दिया गया है। परिवार भी दिल पर पत्थर रखकर हरीश को हमेशा-हमेशा के लिए हर दर्द से मुक्ति दिलाने की कोशिश में लगा है।

हरीश राणा AIIMS के इंस्टीट्यूट रोटरी कैंसर अस्पताल की पैलिएटिव केयर यूनिट में भर्ती हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद  शनिवार (14 मार्च) को 32 साल के हरीश राणा को गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन स्थित उनके घर से AIIMS शिफ्ट किया गया था। फिर धीरे-धीरे पैसिव यूथेनेशिया की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से जारी है। पहले हरीश की पानी वाली ट्यूब (हाइड्रेशन) और फीडिंग ट्यूब को हटा दिया गया और उसमें कैप लगा दिया गया है। फिर ऑक्सीजन सपोर्ट को भी बंद किया गया।  

हरीश राणा को सामान्य बेड पर किया गया शिफ्ट

अब हरीश राणा को वेंटिलेटर और अन्य लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटाकर उन्हें सामान्य बेड पर शिफ्ट कर दिया गया है। उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। डॉक्टर अभी भी दिमाग संबंधी कुछ दवाइयां दे रहे हैं, लेकिन पोषण और हाइड्रेशन पूरी तरह बंद कर दिया गया है। सोमवार को एम्स में मेडिकल कमेटी की बैठक हुई, जिसमें ऑक्सीजन सपोर्ट बंद करने का फैसला लिया गया था।

हरीश के पास और कितना समय

अस्पताल सूत्रों के अनुसार, पूरी प्रक्रिया में 2 से 3 सप्ताह लग सकते हैं।  सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक जीवन रक्षक प्रणालियां सुनियोजित तरीके से हटाई जा रही हैं ताकि व्यक्ति की गरिमा बनी रहे। AIIMS  में हरीश के माता-पिता के लिए रहने की व्यवस्था की गई है। उनकी मां लगातार उनके साथ रह रही हैं, जबकि पिता, भाई और बहन समय-समय पर मुलाकात कर रहे हैं। परिवार के सदस्यों की रोजाना काउंसलिंग की जा रही है।

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 रक्षाबंधन वाले दिन हरीश के साथ क्या हुआ था?

जुलाई 2010 में हरीश ने चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में सिविल इंजीनियरिंग में दाखिला लिया था। वर्ष 2013 में वह अंतिम वर्ष के छात्र थे। इसी दौरान अगस्त 2013 में रक्षाबंधन वाले दिन बहन से मोबाइल फोन पर बात करते हुए पीजी की चौथी मंजिल से गिर गए थे। गंभीर रूप से घायल हरीश को तुरंत पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती कराया गया। बाद में दिसंबर 2013 में उसे दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि वह क्वाड्रिप्लेजिया से ग्रसित हैं।

हादसे ने बदली दी जिंदगी

हरीश राणा की जिंदगी एक हादसे ने उस समय बदल दी, जब वो अपने इंजीनियर बनने के सपने को पूरा करने के लिए चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे थे।जुलाई 2010 में हरीश ने चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में सिविल इंजीनियरिंग में दाखिला लिया था। वर्ष 2013 में वह अंतिम वर्ष के छात्र थे। इसी दौरान अगस्त 2013 में रक्षाबंधन वाले दिन बहन से मोबाइल फोन पर बात करते हुए पीजी की चौथी मंजिल से गिर गए थे।

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गंभीर रूप से घायल हरीश को तुरंत पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती कराया गया। बाद में दिसंबर 2013 में उसे दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि वह क्वाड्रिप्लेजिया से ग्रसित हैं। तब से वे पर्सिस्टेंट वेजिटेटिव स्टेट में हैं- न उठ पाए, न बोल पाए। पिछले 13 सालों से हरीश जिस दर्द से गुजर रहे हैं, साथ ही उनके परिवार ने जो त्याग किए और कष्ट सहे, उसके बारे में जानकर हर आंख नम हो जाती है।

अंतिम सफर पर हरीश राणा

हरीश के पिता अशोक राणा ने खेल मैदान के आसपास बर्गर का कार्ट लगा कर हरीश की पढ़ाई का खर्चा उठाते थे। मन में उम्मीद और सपने लिए अशोक राणा अपने बेटे को इंजिनियर बनता देखना चाहते थे लेकिन भगवान को कुछ और मंजूर था। सुप्रीम कोर्ट से निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति मिलने के बाद हरीश राणा का मामला देशभर में चर्चाओं में हैं।  सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च 2026 को जस्टिस जे.बी.पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की बेंच ने हरीश राणा के माता-पिता की याचिका पर पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति दी। 

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Published By:
 Rupam Kumari
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