Harish Rana: खाने के बाद आज से पानी भी बंद... AIIMS में हरीश राणा की इच्छामृत्यु का अगला चरण, कब तक पूरी होगी प्रक्रिया?

Harish Rana: गाजियाबाद के 32 साल के हरीश राणा को सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बाद AIIMS में निष्क्रिय इच्छामृत्यु दी जा रही है। एम्स में हरीश राणा को ट्यूब के जरिए पोषण देना बंद कर दिया गया है।

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Harish Rana
हरीश राणा की इच्छामृत्यु | Image: Republic

Harish Rana news: हरीश राणा का 13 सालों का लंबा संघर्ष और असहनीय दर्द अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका है। एक ऐसी जिंदगी, जो सालों से मशीनों की सांसों और ट्यूबों के सहारे टिकी रही, अब धीरे-धीरे, गरिमा और सम्मान के साथ अलविदा कह रही है। परिवार भी दिल पर पत्थर रखकर हरीश को हमेशा-हमेशा के लिए दर्द से मुक्ति दे रहा है।

आज से हरीश का पानी भी होगा बंद

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दिल्ली के एम्स अस्पताल में हरीश राणा की निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की प्रक्रिया जारी है। यहां चरणबद्ध तरीके से उनका लाइव सपोर्ट सिस्टम हटाया जा रहा है। सांस लेने और खाने की पाइप पहले ही हटाई जा चुकी है। बताया जा रहा है कि आज (17 मार्च) से हरीश को पानी देना भी बंद कर दिया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शनिवार (14 मार्च) हरीश राणा को दिल्ली के AIIMS लाया गया था। एम्स के इंस्टीट्यूट रोटरी कैंसर अस्पताल की पैलिएटिव केयर यूनिट में भर्ती हैं। मिली जानकारी के अनुसार हरीश राणा को आज से पानी भी देना बंद कर दिया जाएगा। उन्हें कोई ऑक्सीजन सपोर्ट नहीं दिया जा रहा है। पहले हरीश को ट्यूब के सहारे भोजन जा रहा था, जिसे भी बंद कर दिया गया है।

अब आज हरीश का पानी बंद करने के बाद ट्यूब पर कैप लगाया जाएगा, हालांकि ट्यूब को उनके शरीर से नहीं निकाला जाएगा।

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डॉक्टर लगातार कर रहे मॉनिटरिंग

बताया ये भी जा रहा है AIIMS के डॉक्टरों की टीम हरीश राणा की हर धड़कन और नब्ज पर मॉनिटरिंग के जरिए लगातार नजर रख रही है। वे चरणबद्ध तरीके से जीवन रक्षक उपकरणों को हटाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहे हैं, जिससे सब कुछ नियंत्रित और दर्द-रहित रहे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए अस्पताल प्रशासन इस संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी साझा करने से इनकार कर रहा है।

न दवा काम आई न दुआ

2013 में चंडीगढ़ में हुई भयानक दुर्घटना ने हरीश को ऐसी हालत में डाल दिया कि शरीर तो जीवित रहा, लेकिन दिमाग पूरी तरह सो गया। परिवार ने सालों तक संघर्ष किया, हर संभव इलाज करवाया, लेकिन न तो दवा काम आई और न ही दुआ। बेटे के पिछले 13 सालों से हर दिन तड़पते देख माता-पिता भी टूट गए थे। अंत में उन्होंने दिल पर पत्थर रखते हुए बेटे को इस पीड़ा से मुक्ति देने का कठोर फैसला लिया।

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11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पहली बार देश में पैसिव यूथेनेसिया की इजाजत दी। इसके बाद अब हरीश राणा एम्स में भर्ती हैं और दुनिया से सम्मानजनक विदाई की ओर हैं। उनके अलविदा कहने से हर आंख नम है, लेकिन अब हरीश को 13 सालों के दर्द और तड़प से मुक्ति मिलने जा रही है।

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Published By:
 Ruchi Mehra
पब्लिश्ड