गुजरात ध्वस्तीकरण: अवमानना कार्रवाई से जुड़ी याचिका पर 3 हफ्ते बाद सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि वह गिर सोमनाथ जिले में बिना पूर्व-अनुमति के आवासीय और धार्मिक संरचनाओं को कथित रूप से ध्वस्त करने के लिए गुजरात प्राधिकारियों के खिलाफ अवमानना ​​याचिका सहित अन्य याचिकाओं पर तीन सप्ताह बाद सुनवाई करेगा।

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सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो) | Image: PTI

उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि वह गिर सोमनाथ जिले में बिना पूर्व-अनुमति के आवासीय और धार्मिक संरचनाओं को कथित रूप से ध्वस्त करने के लिए गुजरात प्राधिकारियों के खिलाफ अवमानना ​​याचिका सहित अन्य याचिकाओं पर तीन सप्ताह बाद सुनवाई करेगा।

जब यह मामला न्यायमूर्ति बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति एस.वी.एन. भट्टी की पीठ के समक्ष आया तो पीठ ने कहा कि मामले की सुनवाई तीन सप्ताह बाद नियमित मामलों की सुनवाई वाले दिन (गैर-विधिक दिवस) पर की जाएगी । मामले में पेश हुए एक वकील ने कहा कि उन्होंने एक फरवरी से तीन फरवरी तक उर्स उत्सव आयोजित करने की अनुमति के लिए आवेदन दायर किया है।

वकील ने कहा कि वहां सैकड़ों वर्षों से उर्स उत्सव मनाया जाता रहा है और उन्होंने 13 जनवरी को पुलिस से अनुमति मांगी थी, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। गुजरात के प्राधिकारियों की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, “मुझे नहीं पता कि वह (वकील) किसका प्रतिनिधित्व कर रही हैं।”

उन्होंने कहा, “अब, आप माननीय का निर्देश है कि सरकार जमीन पर कब्जा कायम रखेगी। हम जमीन पर कब्जा जारी रख रहे हैं। यह सोमनाथ मंदिर से सटा हुआ है। कई मुद्दे हैं। अदालत में पहले से चल रहे मामले में आवेदन (इंटरलोक्यूटरी एप्लीकेशन) में इसका फैसला नहीं किया जा सकता है...।”

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वकील ने कहा कि वह इस मामले में गैर-पक्षकार नहीं हैं और उन्होंने पीठ को बताया कि वहां एक दरगाह को ध्वस्त कर दिया गया था। मेहता ने कहा, “अब, वहां कोई दरगाह नहीं है। यह अंतरिम आदेश के खिलाफ है। अब, उच्च न्यायालय के समक्ष दलीलें पूरी हो चुकी हैं। दलीलें करीब 1,700 पृष्ठों की हैं। उच्च न्यायालय को इस पर अंतिम फैसला करने दीजिए।”

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पीठ ने मेहता से आवेदन की जांच करने को कहा। न्यायालय ने कहा कि इस पर 31 जनवरी को सुनवाई होगी। पिछले साल दो दिसंबर को मामले की सुनवाई करते हुए, न्यायालय ने गिर सोमनाथ जिले में तोड़फोड़ अभियान पर गुजरात सरकार द्वारा हलफनामा दायर करने के बाद याचिकाकर्ताओं को अपना पक्ष रखने के लिए चार सप्ताह का समय दिया था। 

Published By:
 Nidhi Mudgill
पब्लिश्ड